भगवान भास्कर को पहला अ‌र्घ्य आज
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सूर्योपासना के महापर्व छठ के तीसरे दिन गुरुवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य अर्पित कर अपने, परिवार के कल्याण व निरोग रहने की कामना करेंगे। शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ यह महा अनुष्ठान संपन्न होगा। पर्व को लेकर बुधवार को दिनभर खरीदारी होती रही। व्रतियां गुरुवार की सुबह से ही प्रसाद तैयार करने में जुट जाएंगी। शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बांस की टोकरी में अ‌र्घ्य का सूप सजाकर व्रती अपने परिवार व सगे संबंधी के साथ घाट पर जाएंगे। अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाएगा।

अ‌र्घ्य देने से दूर होते कष्ट

सदर अस्पताल स्थित मां सिद्धेश्वरी दुर्गा मंदिर के पुजारी पं.देवचंद्र झा व जगदंबा नगर, बैरिया के पं.अभिनय पाठक बताते हैं कि सूर्य षष्ठी व्रत की विशेषता है कि इसमें भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य देने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। संध्या व प्रात:काल जल में खड़े होकर अ‌र्घ्य देने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। माता षष्ठी पुत्रहीनों की गोद भरती हैं। सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद माता पूरी करती हैं।

मदद को उठे कई हाथ

घरों की साफ-सफाई के साथ-साथ घाटों की ओर जाने वाले मार्ग की तस्वीर बदल चुकी है। व्रतियों के स्वागत में पूजा समितियां जोर-शोर से जुटी हैं। बूढ़ी गंडक किनारे छठ घाट हो या शहर व गांव में विभिन्न निजी छठ घाट, लोग घाट की सफाई से लेकर साज-सज्जा में पूरी श्रद्धा के साथ लगे हैं। व्रतियों को कोई परेशानी न हो, इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। सड़कों व गली-मोहल्ले में छठी मइया के गीत गूंज रहे हैं, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया है।

Source : Dainik Jagran

Image : Sanchit

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