30 हजार छात्रों की रुकी परीक्षा पर लगी मुहर
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बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के करीब डेढ़ सौ कोसरें के 30 हजार छात्रों की रुकी परीक्षा पर सिंडिकेट की बैठक में शोर-शराबे के बीच मुहर लगी । कुलपति डॉ. अमरेन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को सिंडिकेट की बैठक हुई। जिसमें विवि प्रशासन के कार्यो पर सवाल उठाए गए। सिंडिकेट की बैठक में लिए गए फैसले को लागू क्यों नहीं किया गया। इस सवाल के बाद शोर-शराबा शुरू हो गया। सिंडिकेट सदस्यों ने विवि अधिकारियों को कई मुद्दों पर घेरा।

राजभवन ने डीडीई के कोर्सो के रेगुलेशन को लौटा दिया था। सिंडिकेट की बैठक से पास कराने को कहा था। तमाम कोसरें की मंजूरी के बाद अब इसे राजभवन भेजा जाएगा।

मुजफ्फरपुर में डीडीई की सभी परीक्षाएं

सिंडिकेट की बैठक में फैसला हुआ कि डीडीई के सभी छात्रों की परीक्षाएं मुजफ्फरपुर में ही होगी। सदस्यों ने कहा कि विवि के सभी वोकेशनल कोसरें के डायरेक्टर संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। ऐसे में लाइब्रेरी में चलने वाले कोर्स के डायरेक्टर लाइब्रेरी के डायरेक्टर हो। डॉ. हरेन्द्र कुमार, डॉ. रेवती रमण, इकबाल मोहम्मद शमी, डॉ. शिवानंद सिंह, डॉ. नरेन्द्र पटेल ने कई सवाल उठाए। बैठक में कुलसचिव डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव सहित तमाम सदस्य मौजूद थे।

असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्टिंग में गड़बड़ी

सिंडिकेट सदस्यों ने असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्टिंग में गड़बड़ी का आरोप लगाया। नियमानुसार पदस्थापन नहीं की गई है। सदस्य डॉ. हरेन्द्र कुमार, डॉ. रेवती रमण ने कहा कि जिस कॉलेज में शिक्षक हैं, वहीं कई शिक्षकों की पोस्टिंग की गई। जबकि कई कॉलेजों में पद खाली थे। वहीं लाइब्रेरी में रेखा पाण्डेय व रंजन कुमार की प्रोन्नति रोके जाने पर भी सवाल खड़े किए।

विवि को नहीं मिल रही राशि

सिंडिकेट सदस्यों ने कहा कि कॉलेजों पर सख्ती जरूरी है। छात्रों से पैसा वसूले जाने के बाद विवि को पैसा नहीं दिया जा रहा है। नामाकन के समय एनएसएस, खेलकूद व कई अन्य मदों का पैसा लिया जाता है। लेकिन कॉलेज प्रशासन विवि को निर्धारित राशि नहीं वापस करते हैं।

बीएड प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट ओपेन करने का उठा मामला

सिंडिकेट सदस्य डॉ. वीरेंद्र चौधरी ने बीएड प्रवेश परीक्षा का मामला उठाया। कहा कि प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट ओपेन होना चाहिए। ताकि संबंधित छात्र को पता चल सके कि कितना अंक आया। इससे पारदर्शिता भी आएगी। उधर, डॉ. वीरेन्द्र चौधरी, डॉ. रेवती रमण ने अधिकारियों की बहाली में आरक्षण नियम का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि बहाली में इसका अनुपालन होना चाहिए।

Source : Dainik Jagran

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