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नवादा जिला प्रशासन के अजीब रंग हैं। जिसने जुर्म होने की सूचना दी उसे ही प्राथमिकी का सूचक बनने को मजबूर किया गया। प्रशासन के इस रवैए से सूचक परेशान हैं। कह रहे हैं यही हाल रहा तो कोई सूचना देने से भी परहेज करेगा। मामला रजौली थाना क्षेत्र में एक नबालिग जोड़े के बाल विवाह से जुड़ा है।

मामला कुछ यूं है 

रजौली थाना क्षेत्र के हरदिया सेक्टर ए के काली मंदिर के समीप शनिवार की संध्या बाल विवाह हो रहा था। इस क्षेत्र में बाल उत्पीडऩ पर काम करने वाली संस्था बाल विकास धारा से जुड़े बाल मित्र के सदस्यों ने सूचना अपने कोआर्डिनेटर शशिकांत मेहता को दी। शशिकांत ने सूचना पहले बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजीव नयन को दी। उन्होंने रजौली बीडीओ को सूचना देने को कहा।

 

रजौली बीडीओ को फोन किया गया तो उन्होंने थानाध्यक्ष को सूचना देने को कहा। तब शशिकांत ने सूचना थानाध्यक्ष को दिया। थानाध्यक्ष अवधेश कुमार ने पुलिस बल को भेजा। पुलिस शादी के मंडप पर बैठे वर-वधू सहित उसके परिजनों को उठाकर थाना ले आई। यहां तक सब ठीक-ठाक रहा।

 

परिजन नहीं दे पाए उम्र प्रमाण पत्र 

बाल जोड़े को जब थाना लाया गया तब परिजनों ने दोनों के बालिग होने का दावा किया। तब दोनों के परिजनों को उम्र प्रमाण पत्र लाने को कहा गया। लेकिन परिजन उम्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे। तब बौढ़ी कला निवासी वर पक्ष के रामवृक्ष भुईयां व वधू पक्ष शिरोडावर के सरजू भुईंया को हिरासत में ले लिया गया।

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प्राथमिकी की आ गई नौबत 

वर-वधू पक्ष द्वारा उम्र प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने पर मामला फंस गया। नौबत प्राथमिकी दर्ज करने की आ गई। प्राथमिकी कौन करे इसपर अधिकारियों का मंथन शुरू हुआ। उसके बाद सूचना देने वाले एनजीओ के कोआर्डिनेटर शंशिकांत को तलब किया गया। उनपर प्राथमिकी लिखकर देने का दवाब बनाया गया। लेकिन वो इंकार कर गए।

धमका कर लिखाई प्राथमिकी

शशिकांत ने बताया कि जब प्राथमिकी लिखकर देने से इंकार किया तो वहां मौजूद बीडीओ व थानाध्यक्ष ने धमकाया। और अंतत: प्राथमिकी लिखकर हमें देना पड़ा। शशिकांत के लिखित प्रतिवेदन पर प्राथमिकी  कांड संख्या 0 6 / 18 दर्ज की गई। और वर-वधू के पिता रामवृक्ष भुईंया व सरयू भुईंया को जेल भेज दिया गया। दरअसल, थानाध्यक्ष व बीडीओ की मंशा ही इस मामले में सही नहीं थी।

 

अधिकारियों की मंशा पर उठाए सवाल 

इस बाबत शशिकांत का कहना है कि स्वयं सेवी संगठन का कार्यकर्ता होने के नाते हमने समय रहते प्रशासन को सूचना दे दी थी। आगे की कार्रवाई करने का जिम्मा प्रशासन का बनता था। गुप्त सूचना देना हमारा फर्ज बनता था, वहां तक हमने सही किया।

 

लेकिन प्रशासन ने एक तो हमारे नाम को सार्वजनिक किया और उपर से प्राथमिकी का सूचक भी बना दिया। यह उचित नहीं है। ऐसे में स्वयं सेवी संस्था के कार्यकर्ता के नाते काम करना मुश्किल होगा।

 

अन्य संगठनों ने भी जताई आपत्ति 

रजौली के बीडीओ व थानाध्यक्ष पर दवाब बनाकर संस्था के कार्यकर्ता को प्राथमिकी का सूचक बनाए जाने पर टवासी समाज न्यास के लिए काम करने वाली कुमारी संगीता ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि स्वयं सेवी संगठन के कार्यकर्ता निहत्थे क्षेत्र में रोज काम करते हैं।

 

प्रशासन का यह रवैया रहा तो असुरक्षा के बीच काम करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास शक्ति है, हमारे जैसे कार्यकर्ता के पास कुछ नहीं है।

 

प्रशासन का यही रवैया रहा तो बाल विवाी, दहेजबंदी, मानव तस्करी जैसी घटनाएं कमने की बजाय बढ़ेगी। क्योंकि कोई समाजसेवी प्रशासन को सूचना देकर परेशानी गले में डालना नहीं चाहेगा। कहीं भी दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद घायलों को कोई मदद नहीं करेगा। पुलिस सूचना देने वालों के प्रति अपना नजरिया बदले।

 

कहते हैं थानाध्यक्ष 

-हमने किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया। बीडीओ साहब के कहने पर उसने खुद लिखकर दिया है।

अवधेश कुमार, थानाध्यक्ष, रजौली।

Source : Dainik Jagran

 

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