नौवीं में बिहार के एक स्कूल से निकाल दिया गया था बाहर, इंटर में फेल, आज हैं इंडियन टीम का प्लेयर
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स्कूल की परीक्षा में फेल होने या कम अंक आने का ये मतलब नहीं कि आप प्रतिभाशाली नहीं हैं। संभव है, आपमें कोई ऐसी प्रतिभा है, जिसका आकलन अब तक नहीं हो सका हो। असफलता का मतलब है कि सफलता का प्रयास ठीक से नहीं किया गया। निराश होने से अच्छा है कि अगली बार और जमकर तैयारी की जाए ताकि अच्छे नतीजे आ सके।

मैं खुद पढ़ने में कमजोर रहा हूं मगर अपने खेलने की प्रतिभा के कारण अपनी पहचान बनाई है। जब मैं डीपीएस में नौवीं कक्षा में पढ़ रहा था तो स्कूल प्रबंधन ने मुङो पढ़ाई को लेकर चेतावनी दी। स्पष्ट कहा कि क्रिकेट और पढ़ाई में किसी एक को चुनो। आखिर में उपस्थिति काफी कम होने के कारण मुङो स्कूल से निकाल दिया गया। मैं शुरू से क्रिकेट को ज्यादा तरजीह देता था। इसमें पिता की रजामंदी थी, लेकिन मां मेरी पढ़ाई को लेकर चिंतित रहती थी।

काफी मुश्किल से मैं और पापा, मां को मनाने में सफल रहा। इसके बाद दानापुर में अश्विनी पब्लिक स्कूल में मैंने दाखिला लेकर मैटिक की परीक्षा दी। इसके बाद कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इंटर में दाखिला लिया, लेकिन इसी साल अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप टीम की कमान मिलने से मैं जैसे-तैसे परीक्षा दे सका।

नतीजा मैं जानता था और हुआ भी वही। मैं फेल हुआ, लेकिन मेरा मानना है कि जिंदगी की परीक्षा में मैं पास हो चुका हूं। आज मैं अंडर-19 टीम के साथ आइपीएल में गुजरात लायंस की तरफ से भी खेल रहा हूं। किशन इसे सही भी मानते हैं। अभिभावकों से मेरी गुजारिश है कि वे बच्चों पर अपनी अपेक्षा का बोझ न डालें। वे जिस क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं, बनाने दें। पांच साल की उम्र में बड़े भाई राज किशन की अंगुली पकड़कर मैंने मैदान का रुख किया। धीरे-धीरे क्रिकेट में रुचि बढ़ी। साढ़े सात साल की उम्र में एसजीएफआइ के लिए अंडर-16 टीम में चयन हुआ।

2011 में आखिरी बार बिहार की स्कूली गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया क्रिकेट टीम का कप्तान बना। राज्य में क्रिकेट की दिशा व दशा ठीक न होते देख 2012 में झारखंड का रुख किया और उसी साल झारखंड रणजी टीम में चुन लिया गया। 2013 में महज 15 साल की उम्र में झारखंड अंडर-19 क्रिकेट टीम में जगह बना ली। फिर जोनल टूर्नामेंट खेले और 2015 में पहली बार रणजी खेलने का मौका मिला। साल 2016 कॅरियर का टर्निग प्वाइंट साबित हुआ। पहले भारतीय अंडर-19 टीम में जगह बनाई और फिर विश्व कप में टीम इंडिया की कमान संभाली।

 

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