सर्वेः बिहार में 42% बच्चों के दांत खराब, 19% को दृष्टि दोष
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टीवी और मोबाइल बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। खासकर स्कूली बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। राष्ट्रीय अंधता निवारण प्रोग्राम के तहत प्रदेश में 2016-17 में किए गए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। 42 फीसदी बच्चों के दांत खराब हैं जबकि 19 फीसदी में दृष्टिदोष पाया गया है।

सबसे अधिक पटना जिले में पीड़ित बच्चे पाए गए हैं। इसके बाद मुंगेर, मधेपुरा, पश्चिमी चंपारण और बक्सर है। स्वास्थ्य विभाग ने एक गैर सामाजिक संगठन के साथ मिलकर 2016-17 के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 8 से 14 साल के बच्चों का नेत्र परीक्षण किया है। इसमें पटना जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले चार लाख 97 हजार 364 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।

इसमें 8019 में दृष्टिदोष पाया गया। 5474 बच्चों के नेत्र में अधिक गड़बड़ी होने के कारण चश्मा पहनना पड़ा। इसी प्रकार मुंगेर में 442, मधेपुरा के 438, पश्चिम चंपारण के 415, बक्सर के 45 बच्चों में दृष्टिदोष पाया गया।

सहायकों की कमी के कारण नहीं हुआ नेत्र परीक्षण

हालांकि सर्वे में सभी स्कूलों के बच्चों का नेत्र परीक्षण नहीं हुआ। क्योंकि विभाग के पास नेत्र सहायकों की कमी है। इससे पहले 2013-14 में 1786, 2014-15 में 1528 तथा 2015-16 में 1669 बच्चों को परीक्षण के बाद चश्मा लगाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्क्रीनिंग में पता चला कि जिन बच्चों के नेत्र में गड़बडी हुई है उसमें 90 फीसदी ज्यादा देर तक टीवी, मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। कुछ को पोषण तत्व का अभाव था। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के 18 साल के आयु के कुल बच्चों में 19 प्रतिशत ऐसे हैं जिनके आंख में दृष्टिदोष है।

चॉकलेट और फास्ट फुड खराब कर रहे दांत

नेशनल हेल्थ मिशन के तहत किए गए स्क्रीनिंग प्रोग्राम में पता चला कि स्कूल जाने वाले बच्चों में 42 प्रतिशत के दांत में गड़बड़ी है। दांत में खराबी होने का मुख्य कारण बिस्कुट, चाकलेट, फास्ट फूड आदि का सेवन करने के बाद दांत की सफाई न करना है। दांत की सफाई नहीं करने के कारण कीड़ा लग जाते हैं। ऐसे में दो से तीन साल के अंदर दांत सड़ जाते हैं। स्टेट प्रोग्राम अधिकारी डॉ. अंजनी कुमार का कहना है कि बच्चों को फास्ट फुड खाने की आदत से दांतों में अधिक खराबी हो रही है।

सर्वे में शून्य से छह साल के बच्चों की स्थिति
40 प्रतिशत कुपोषित
43 प्रतिशत एनीमिया
42 प्रतिशत दांत की समस्या
10 प्रतिशत मंद मानसिक विकास

बच्चे हो हरे ड्राई आई सिंड्रोम से पीडित: डॉ सुनील

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार सिंह का कहना है कि आंख की पुतली एक मिनट में औसतन 16 से 17 बार झपकती है। जब बच्चे मोबाइल या टीवी देखते हैं तो पुतली सामान्य तौर पर चार से पांच बार ही झपकती है। देर तक आंख को खुला रखने के कारण आंख का पानी सूखने लगता है। ऐसे बच्चे ड्राई आई सिंड्रोम से पीडित हो जाते हैं। ऐसे बच्चों में जल्द दृष्टिदोष अधिक होता है। दृष्टिदोष अधिक होने पर बच्चों को चश्मा लेने की जरूरत पड़ जाती है।

 

Source : Live Hindustan

 

 

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