रिसर्च पब्लिकेशन में फिर पिछड़ गया बीआरएबीयू
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रिसर्च पब्लिकेशन मामले में बीआरए बिहार विवि एक बार फिर पिछड़ गया है। इस कारण विवि को मिलने वाला 3 करोड़ का अनुदान रुक गया है। अपर्याप्त शिक्षण, रिसर्च और गुणवत्तापूर्ण रिसर्च पब्लिकेशन नहीं होने से ऐसी किरकिरी हुई है। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी फीस्ट के तहत पीजी बॉटनी विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। इसके तहत पीजी बॉटनी की ओर से डीएसटी फीस्ट के रिसर्च प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए प्रपोजल भेजा गया था। डीएसटी की ओर से फीस्ट प्रोग्राम 2017 के तहत सहायता पाने वाले संस्थानों और इसमें विभिन्न निर्धारित मापदंडों पर फेल होने वाले संस्थानों की सूची जारी कर दी गई है। पांच वर्ष के लिए दिए जाने वाले अनुदान से संबंधित विभाग में शिक्षण के साथ-साथ रिसर्च की गुणवत्ता को बेहतर करने में सहायता प्रदान की जाती है। लेवल 1 के तहत विवि के पीजी विभागों को 3 करोड़ रुपये की राशि दी जाती है। पीजी बॉटनी विभाग में शिक्षकों की संख्या भी काफी कम है।

एलएस, आरडीएस, एमडीडीएम को मिल चुका है प्रोजेक्ट 

डीएसटी फीस्ट की ओर से एलएस, आरडीएस, एमडीडीएम कॉलेज को रिसर्च प्रोजेक्ट मिल चुका है। वर्ष 2015 में एलएस कॉलेज और आरडीएस कॉलेज को 80-80 लाख रुपये दिए गए थे। वहीं वर्ष 2016 में एमडीडीएम को लगभग 92 लाख की राशि प्रदान की गई थी। वहीं पीजी जूलॉजी विभाग और केमेस्ट्री विभाग को भी डीएसटी की ओर से रिसर्च प्रोजेक्ट दिया जा चुका है।

नैक मूल्यांकन में भी रिसर्च में पिछड़ा था विवि

बीआरए बिहार विवि को नैक मूल्यांकन में भले ही बी ग्रेड हासिल हो गया हो लेकिन रिसर्च और पब्लिकेशन मामले में विवि की काफी किरकिरी हुई थी। विवि के मूल्यांकन के लिए पहुंचे नैक की पीयर टीम ने अपने एक्जिट रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। वहीं इसे दुरुस्त करने का भी सुझाव दिया था।

कुछ बिंदुओं पर कमी रह गई। रिसर्च प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए दुबारा कमियों को दूर कर प्रयास किया जाएगा। शोध को बढ़ावा दिए जाने के लिए विवि को भी ठोस कदम उठाना होगा। – डॉ संतोष कुमार, पीजी बॉटनी विभागाध्यक्ष 

Input : Dainik Bhaskar

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