यहां बालिका वधु के लिए राहत बनकर आया सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला…
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 18 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार माने जाने का ऐतिहासिक फैसला दिया है. यह फैसला निश्चित ही बच्‍चों के लि‍ए दुरूह परि‍स्‍थि‍ति‍यों में एक नई लकीर खींचने जैसा है. भारत जैसे देश में, जहां बच्चों से संबंधित तमाम मापदंड इतने गंभीर रूपों में व्याप्त हैं, वहां इसका असर बहुत दूरगामी होने वाला है, लेकिन इस फैसले के पहले के कई और पड़ाव हैं, जिन्हें हल किए बिना बच्चों को सम्मान और सुरक्षा देना वास्तव में मुश्किल ही होगा. देखा जाए तो इस फैसले के लागू किए जाने के पहले ही देश के एक और कानून ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम’ का उल्लंघन हो चुका होता है. इसका उल्‍लंघन करने पर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं, लेकिन हर साल सरकार खुद ही यह बताती है कि उसने देश में लाखों बाल विवाह होने से रोके हैं. इसका मतलब तो यही है कि कम उम्र में बच्चों का विवाह इस देश का एक भारी संकट है, जिसे सुधारना कभी प्राथमिकता में नहीं रखा गया है.

 

 

जब आंकड़े इतने भयावह हों, तो उनको सुधार पाना कोई एक-दो दिन या एक अभियान या एक फैसले का काम नहीं है. अब से 16 बरस पहले देश में महिला सशक्तीकरण की राष्ट्रीय नीति को लागू कर कहा गया था कि वर्ष 2010 तक बाल विवाह का व्यवहार खत्म कर दिया जाएगा. हम 2017 में मौजूद हैं, लेकिन ऐसा दावा नहीं कर सकते हैं कि बाल विवाह समाज से खत्म हो चुका है. बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना 2005 में भी यही निश्चय था कि वर्ष 2010 तक जन्म, मृत्यु, विवाह और गर्भावस्था का 100 प्रतिशत पंजीयन किया जाने लगेगा और वर्ष 2010 तक बाल विवाह का व्यवहार खत्म कर दिया जाएगा. क्या ऐसा हो पाया, नहीं तो क्यों…?

ऐसे में यह देखना होगा कि यह फैसला बच्चों के हक में और उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार को दूर करने में किस तरह और कितना कारगर हो पाता है…?

 

राकेश कुमार मालवीय एनएफआई के पूर्व फेलो हैं, और सामाजिक सरोकार के मसलों पर शोधरत हैं…

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

Source : NDTV

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