बेतिया की गरिमा ने बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में पायी सफलता

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बेतिया की गरिमा
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बेतिया की गरिमा

बेतिया : परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाती. भले ही थोड़ा समय लगता हो लेकिन अंततः सच्ची मेहनत का फल मिल ही जाता है. बस दिल में लगन सच्ची होनी चाहिए. चंपारण ने समय-समय पर देश को कई ऐसे रत्न दिये हैं जिस पर आज भी चंपारण के लोगों को नाज होता है. इन दिनों अपने कठिन परिश्रम और पक्के इरादे से चंपारण वासियों को गर्व करने का फिर से एक मौका दिया है चंपारण की बेटी गरिमा रानी ने. जिन्होंने अपने प्रथम प्रयास में ही बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में 96वां स्थान हासिल कर महिलाओं का परचम लहराया है.

बता दें कि गरिमा बेतिया न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता दयानंद प्रसाद और गृहिणी साधना रानी की पुत्री हैं. और शुरु से ही काफी प्रतिभावान रही हैं. स्थानीय संततेरेसा स्कूल से 2006 में मैट्रिक पास करने के बाद इंटर तक की पढ़ाई बेतिया से ही की. और पटना वाणिज्य कॉलेज से बीकॉम किया. इसके बाद पटना लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई की. फिर गरिमा ने बेतिया कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरु की. इस बीच न्यायिक सेवा की परीक्षा के लिये इन्होंने काफी मेहनत किया. जिसके परिणामस्वरूप प्रथम प्रयास में ही इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की.

अपनी इस सफलता के बारे में गरिमा ने बताया कि महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. कानून के क्षेत्र में भी उन्हें आगे आना चाहिए. हर तबके के महिलाओं को कानून के बारे में जानना चाहिये. ताकि वे अपने अधिकारों को समझें और उनके प्रति सजग रहें. जब वे कानून को जानेंगी तभी तो अपने अधिकारों के प्रति सजग रहेंगी.

बता दें कि 5 भाई-बहनों में गरिमा से दो बड़ी बहने भी अधिवक्ता हैं. गरिमा ने बताया कि घर में वकालत का माहौल है इससे काफी मदद मिली. गरिमा ने अपने इस उपलब्धि के लिये माता-पिता सहित पूरे परिवार के सहयोग को धन्यवाद दिया. इधर‌ गरिमा की इस उपलब्धि पर अधिवक्ता बहन मेधा श्री, नूपुर श्री, अनीमा श्री, और भाई कुणाल गौरव, अमित कुमार, राकेश कुमार समेत अन्य परिजनों ने बधाई दी है.

 

Source: Live Cities


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