सोनपुर मेला: कहीं हाथी देखने की भीड़ तो कहीं चाट और कुल्फी का मज़ा उठा रहे हैं लोग

0
184

सोनपुर मेला का मुख्य प्रवेश द्वार और घड़ी की सूई दोपहर के पूरे 12 बजने का इशारा कर रही थी. झुंड बनाकर लोग मेले में प्रवेश कर रहे थे. सूर्य की गर्मी जैसे-जैसे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे मेला घूमने आनेवाले लोगों की भीड़ में इजाफा हो रहा था. मानों सोनपुर का मेला फिर से जवानी को पा रहा था. मेला की अप्रत्याशित भीड़ छुट्टी के दिन के होने का संकेत दे रही थी.

जिधर देखो उधर भीड़ ही भीड़ मतलब देहाती भाषा में कहें तो ठेलम ठेल भीड़ और हर जगह दर्शनार्थियों का उमड़ता हुजूम मेले की रौनक बढ़ा रहा था. बुजुर्गों ने अपने घरों के लोगों के सहारे मेले का आनंद लिया. उमड़ी भीड़ को देखकर ऐसा लगा कि विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला अब पूरा रंग पकड़ चुका है और मेला अब अपने पूरे शबाब की ओर है.

मेले में शायद ही कोई ऐसा जगह दिखा, जहां ठेलमठेल भीड़ नहीं दिखी. चाहे वह नखास चौक का इलाका हो या हरिहरनाथ मंदिर जाने वाला रास्ता, चाहे चिड़िया बाजार जाने वाली गली हो या फिर मेला का मुख्य पथ, हर जगह भीड़ ही भीड़ दिखी. जगह-जगह लोगों ने सेल्फी का आनंद लेते हुए मेले में गुजारे अपने यादगार क्षणों को कैमरे या फिर मोबाइलों में कैद करते नजर आये.

ग्राहकों की भीड़ भी दुकानों की शोभा बढ़ा रही थी तो थियेटरों के चालू होने के बाद मेले में लौटी चमक से सैकड़ों दुकानों के दुकानदार आह्लादित दिखे. जादूगर, झूला, डिस्को डांस, मौत का कुआं आदि जगहों पर एनाउंसमेंट की गूंज इतनी थी कि मोबाइल का कॉल रिसीव करना मुश्किल था. लिट्टी-चोखा, छोला भटोला, चाट चाउमिन व गोलगप्पे की दुकानों पर युवा ग्राहक बड़ी संख्या में नजर आये.

मुख्य पंडाल के बगल में अवस्थित आर्ट एंड क्राफ्ट बाजार व ग्राम श्री मंडप परिसर में अपेक्षाकृत ज्यादा भीड़ देखने को मिली. आर्ट एंड क्राफ्ट बाजार में उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान केंद्र के कलाकारों की कला को लोग घंटों निहारते मिले. इन सभी कलाकारों के लगे स्टालों तक पहुंचकर लोगों ने उनकी द्वारा बनायी गयी कलाकृतियों को बारीकी से देखा, फिर कला व कलाकारों की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की. ग्राम श्री मंडप में एक कलाकार द्वारा बनाये गये भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की मूर्ति के पास तस्वीर व सेल्फी लेने की होड़ दिखी, यहीं वह जगह दिखा जहां मेले में सबसे ज्यादा लोगों ने सेल्फी ली.

इसी मंडप में जीविका समूह द्वारा लगे स्टॉल पर लोगों ने खूब खरीदारी भी की. किसी ने लिट्टी-चोखा का आनंद लिया तो कोई मनेर के लड्डू का आनंद लेता नजर आया. इसके अलावा पापड़ी, मियां मिठाई, हवा मिठाई, मुगलई पराठा व शाही हलवे का भी लोगों ने भरपूर आनंद उठाया और ठंड के मौसम में भी आइसक्रीम व कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री खूब हुई.

आधुनिक जमाने के बीच भी सैकड़ों युवाओं ने मेले में तलवार की खरीद कर पुराने जमाने को याद किया और उसे पीठ पर टांगकर मेले का आनंद उठाते देखे गये. वहीं मुख्य मेला से विपरीत दिशा में लगे पशु मेला में पहले की तरह रौनक नहीं दिखी. इस बाजार में घोड़े तो दिखे, मगर अच्छे व चमकदार घोड़ों की कमी दिखी. कुत्ता व बकरी बाजार में खरीदने वाले कम और निहारने वालों की संख्या ज्यादा दिखी. जैसे-जैसे शाम ढलता गया, वैसे-वैसे बिजली की रोशनी में नहाये सोनपुर मेले की भीड़ में इजाफा होता चला गया. मेला घूमने आनेवाले लोगों को देर शाम तक भीड़ से संघर्ष करना पड़ा. वहीं दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा दिखा और प्रशासनिक चुस्ती देखने को मिली.

Source : Live Cities