इंटरनेट निर्भरता के मामले में भारत नंबर-1, सावधान!
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आज इंटरनेट ने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल कर रख दी है। एक तरफ दुनियाभर में तेज़ी के साथ इसके यूजर्स बढ़े हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोबाइल क्रांति के बाद इंटरनेट की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। लेकिन, सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि आज इंटरनेट की दुनिया में सबसे ज्यादा निर्भरता भारत की है। जबकि, दूसरे नंबर पर इंटरनेट निर्भरता के मामले में ब्रिटेन और उसके बाद चीन व अन्य देश हैं।

82% भारतीयों ने कहा- इंटरनेट के बिना नहीं रह सकते एक दिन

जी हां, इंटरनेट के बिना जीवन कैसा हो सकता है? इस सवाल पर मार्केटिंग की रिसर्च फर्म इप्सोस ने पूरी दुनिया में एक सर्वे कराया। लेकिन, सर्वे में सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि इंटरनेट पर निर्भरता के मामले में भारत बाकी देशों को पीछे छोड़ते हुए पहले नंबर पर है। यहां पर 82 फीसद लोगों ने बताया कि वे इंटरनेट के बिना एक दिन भी नहीं रह सकते हैं।

इंटरनेट इस्तेमाल में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड, तीसरे पर चीन

इंटरनेट पर निर्भरता को लेकर इप्सोस के सर्वे में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड तीसरे पर चीन के लोग रहे हैं। अमेरिका, जापान जैसे देशों के लोगों की इंटरनेट पर निर्भरता भारत के मुकाबले कम है। इप्सोस ने ये सर्वे दुनिया के 23 देशों में 25-35 आयु वर्ग के 18,180 लोगों के बीच किया। भारत में 49% इंटरनेट यूजर्स ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। जबकि इसका ग्लोबल औसत सिर्फ 38% है। 2016 में भारत में करीब एक लाख करोड़ रु. की ऑनलाइन शॉपिंग हुई। 2016 में ग्लोबल रिटेल ई-कॉमर्स 119 लाख करोड़ रु. का था।

 

 

दुनिया की आधी आबादी कर रही है इंटरनेट का इस्तेमाल

2016 में एक सर्वे आया था, उसके मुताबिक पूरी दुनिया में साढ़े तीन अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यानि, दुनिया की करीब 45 फीसदी से ज्यादा आबादी इस वक्त इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही है। इनमें 25-35 आयु वर्ग के लोग रोजाना औसत 185 मिनट मोबाइल इंटरनेट पर बिताते हैं। 35-55 आयु में यह औसत 110 मिनट है।

इंटरनेट करता है दिमाग खराब

एक तरफ जहां भारत में सबसे ज्यादा इंटरनेट पर लोग निर्भर हैं तो वहीं दूसरी तरफ ऐसे इंटरनेट यूजर्स के लिए बहुत बुरी खबर है। इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल इसके यूजर्स का दिमाग खराब कर सकता है। इसके चलते लोगों का मानसिक व्यवहार बदल रहा है। एम्स के चिकित्सकों, न्यूरोबायोलॉजिस्ट और एटियोलॉजिकली इल्युसिव डिसऑर्डर रिसर्च नेटवर्क (ईईडीआरएन) की रिपोर्ट में यह सामने आया है। इसे चिकित्सकीय भाषा में न्यूरो कॉगनेटिव डिस्फंक्शन (दिमाग और व्यवहार में असंतुलन) का नाम दिया गया है।

क्यों बढ़ी इस कदर इंटरनेट पर भारतीयों की निर्भरता

दरअसल, इस बारे में मनोचिकित्सक आर.के. बंसल ने Jagran.com से खास बातचीत में बताया कि इसका ज्यादा इस्तेमाल एक लत की तरह है। इंटरनेट से पॉजिटिव और निगेटिव दो तरह का प्रभाव पड़ता है। बंसल ने बताया कि आज जिस तरह से सारी चीज इंटरनेट पर सुगमता से मिल रही हैं इसके चलते लोग इस पर निर्भर हो गए हैं। इसके चलते लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है। इंटरनेट के चलते लोगों का सोशल स्ट्रक्चर पूरी तरह से बदल रहा है। बंसल ने आगे बताया कि इंटरनेट पर निर्भरता की सबसे बड़ी वजह है संयुक्त परिवारों का खत्म हो जाना और लोगों में अकेलेपन का भाव आना।

बेहद खतरनाक साबित हो सकता है इस कदर इंटरनेट पर निर्भरता

जबकि, सुप्रीम कोर्ट में वकील और साइबर मामलों के जानकार पवन दुग्गल ने Jagran.com से विशेष बातचीत में बताया कि आज भारत में लोग अंध रूप से इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। मोबाइल क्रांति ने इंटरनेट यूजर को जन्म दिया है। ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया पर लोगों को सक्रिय होना इस बात का संकेत है। इंटरनेट पर अधिकांश समय तक निर्भरता से ज्यादा निगेटिव प्रभाव पड़ता है। दुग्गल ने बताया कि कंप्यूटर, मोबाइल पर ज्यादा निर्भरता से आज इसके हैकिंग की संभावना काफी बढ़ गई है।

 

Source : Dainik Jagran

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