मुजफ्फरपुर में इस बार लेट निकलेगा लीची का मंजर

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तापमान में निरंतर हो रही गिरावट लीची की फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। बढ़ती ठंड से जहां एक ओर लीची के बगीचे में नमी की कमी हो रही है, वहीं दूसरी ओर समय से मंजर आने पर भी खतरा मंडराने लगा है। अमूमन 15 जनवरी के बाद से लीची में मंजर आने लगता है। लेकिन इस बार जो स्थिति बनती दिख रही है उस आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि लीची में मंजर में 15-20 दिनों तक बिलंब हो सकता है।

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राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एसडी पांडेय के अनुसार जबतक दिन का तापमान 23 डिग्री और रात का तापमाम 11 डिग्री तक नहीं पहुंचेगा। तबतक लीची में मंजर आने में समस्या होगी। लीची की फसल में तापमान के उतार चढ़ाव की बड़ी भूमिका होती है। मंजर निकलने से लेकर दाना आने तक अधिकतम तापमान 20 डिग्री से ऊपर रहने पर अच्छी क्वालिटी की लीची होती है।

लीची के बगीचे में नहीं करे सिंचाई

लीची अनुसंधान केंद्र की ओर से किसानों को सलाह दी गई है कि ठंड अधिक होने पर बगीचे में नमी की मात्रा में कमी देखी जा सकती है। ऐसे में किसान को घबराने की आवश्यकता नहीं है। वह बगीचे में सिंचाई नहीं करे, क्योंकि जैसे ही तापमान में बढ़ोतरी होगी लीची के पेड़ को नुकसान पहुंचाएगा। लीची के बगीचा में मिट्टी कटाई या इस प्रकार की कोई अन्य गतिविधि नहीं करने की सलाह दी गई है।

Source : Hindustan

 

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