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गांधी जी के तीनों बंदरों की कहानी तो सभी ने सुनी होगी। प्रतीकात्मक रूप से लोगों को ‘बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो और बुरा मत बोलो’ की सीख देने वाले तीनों बंदर गांधी की मृत्यु के बाद न जाने कहां बिला गये थे। लेकिन लोगों को उन बंदरों के बारे में जानने की उत्सुकता लगातार बनी रही। वे किस धातु के बने हैं और कहां हैं? यह सवाल गांधी जी के जीवन दर्शन में रूचि रखने वालों के लिए जिज्ञासा का एक विषय था।

हाल ही में काफी टाल-मटोल के बाद सरकार ने गांधी के इन बंदरों के बारे में जानकारी दे दी है। बताया है कि गांधी जी के यह तीनों बंदर चीनी मिट्टी के बने है और यह मौजूदा समय में नई दिल्ली के राजघाट स्थित राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में मौजूद हैं।

गांधी जी के बंदरों को लेकर यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत गांधी जी के जीवन दर्शन पर रूचि रखने वाले मध्य प्रदेश के राजीव खरे की ओर से मांगी गई जानकारी के दौरान सामने आया है। हालांकि इसके लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके लिए उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत सबसे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से यह जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा था कि गांधी जी अपने साथ हमेशा तीन बंदरों की छोटी आकृति रखते थे। वे किस धातु के बने थे और वे वर्तमान में कहां रखे गये हैं?

प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें इस जानकारी को देने से पहले तो इनकार किया और कहा कि वह इसके लिए संबंधित विभाग के पास आवेदन दें। इसके बाद उन्होंने संस्कृति मंत्रालय से इसकी जानकारी मांगी। लेकिन मंत्रालय ने समय पूरा होने के बाद भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी। इसके बाद तो राजीव ने इसे लेकर सक्षम अधिकारी के पास अपील की, जहां मंत्रालय ने गांधी जी के बंदरों की खोजबीन के लिए समय मांगा।

इस बीच करीब तीन माह की पड़ताल के बाद संस्कृति मंत्रालय के अधीन गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति ने बताया कि वर्ष 1948 में गांधी जी की मृत्यु के बाद उनकी निजी यादगार की वस्तुएं दिल्ली, पुणे और साबरमती आश्रम अहमदाबाद के संग्रहालय को दे दी गई थी। समिति के निदेशक दीपांकर श्री ज्ञान ने बताया कि गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति का गठन 1973 में हुआ था, इसलिए उनके पास गांधी जी की यादगार वस्तुएं उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि जानकारी के मुताबिक, ये बंदर चीनी मिट्टी के बने है और वर्तमान में यह राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय राजघाट दिल्ली में रखे हुए है।

Input : Dainik Jagran


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