विधायक और एमएलसी अनुशंसित योजनाओं की 12.7% राशि ही खर्च

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चालू वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में डेढ़ माह का समय बचा हुआ है। लेकिन, जिले के विधायक व विधान पार्षदों की अनुशंसा से चयनित योजना की अब तक महज 12.7 फीसदी राशि ही खर्च हो सकी है। स्थिति यह है कि जिले में 11 विधायक व तीन विधान पार्षदों की अनुशंसा से 2245.81 लाख रुपए से स्वीकृत 290 योजनाओं में केवल 299.74 लाख रुपए ही खर्च हुए हैं। इसमें 34 योजनाओं को पूरा बताया जा रहा है। मजे की बात है कि गायघाट विधायक की अनुशंसा से ली गई योजना का 95 फीसदी राशि खर्च हो चुकी है और छह में तीन योजनाओं को पूरा बताया जा रहा है। दूसरी ओर मुजफ्फरपुर, औराई व बरुराज विधायक के साथ तिरहुत स्नातक क्षेत्र के विधान पार्षद की अनुशंसित योजनाओं में अब तक फूटी कौड़ी भी नहीं खर्च हो सकी है।

जिले के सभी 11 विधायकों के साथ विधान पार्षद दिनेश प्रसाद सिंह, डाॅ. संजय कुमार सिंह और देवेश चंद्र ठाकुर ने इस वर्ष अब तक 290 योजनाओं की अनुशंसा की है। इन सभी योजनाओं की जिला योजना कार्यालय से अनुशंसा होने के बाद भी पिछले तीन माह से काम पूरी तरह ठप है। इन योजनाओं में पारू विधायक अशोक सिंह की सबसे अधिक दस व डाॅ. संजय कुमार सिंह की नौ योजनाएं पूरी की गई हैं। इसके अलावा महेश्वर यादव की तीन, राजीव कुमार की दो, लालबाबू राम की चार, राम विचार राय की एक और विधान पार्षद दिनेश प्रसाद सिंह की पांच योजनाओं को पूरा किया गया है। जिले के विधायक व विधान पार्षदों के 2245.81 लाख में अब तक केवल 299.74 लाख ही खर्च हो सके हैं। उधर, जिला योजना अधिकारी संजय कुमार गंगवाल ने तीन माह से बालू की कमी होने से योजनाओं के नहीं चलने की जानकारी दी है।

 

इस प्रकार है विधायक व विधान पार्षदों की योजनाओं की स्थिति 

 

क्या कहते हैं मंत्री, जन प्रतिनिधि

 

सुरेश कुमार शर्मा, मंत्री : अब बिहार में बालू की कोई कमी नहीं है। यह अधिकारियों की लापरवाही है। अनुशंसित योजनाओं को पूरा कराने में अधिकारी रुचि नहीं ले रहे है।

नंद कुमार राय, बरूराज विधायक : 15 दिन पहले जिला योजना अधिकारी से मिलकर काम को शुरू कराने का आग्रह किया तो बालू की कमी के कारण काम रुकने की बात बताई गई।

सुरेन्द्र कुमार राय, औराई विधायक : चापाकल व सोलर लाइट को छोड़कर सभी प्रकार की योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। अधिकारी व सरकार इस दिशा में ध्यान दें।

देवेश चंद्र ठाकुर, विधान पार्षद : तीन माह पहले राशि नहीं उपलब्ध होने की बात कही गई। अब बालू की कमी होने की बात कही जा रही है।

Input : Dainik Bhaskar