बच्चे की मौत पर सदर अस्पताल में बवाल, तोड़फोड़
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भिखनपुरा इलाके के पोखर में डूबने से अचेत बच्चे को सदर अस्पताल में मृत घोषित करने के बाद उसके परिजन बेकाबू हो गए। उन्होंने भारी बवाल करते हुए सदर अस्पताल व स्टेशन रोड को शव के साथ जाम कर दिया। ऑपरेशन थियेटर (ओटी) तोड़ दिया गया। इमरजेंसी वार्ड, सीएस, डिप्टी सीएस के कार्यालय को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। शव वाहन व पांच एंबुलेंस को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

वे डॉक्टर व नर्सिग स्टाफ के नहीं रहने, एंबुलेंस उपलब्ध कराने के एवज में पैसे मांगने के आरोप लगा रहे थे।

इधर, सीएस डॉ. ललिता सिंह ने अस्पताल आने से पहले ही बच्चे की मौत होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इमरजेंसी सेवा बहाल नहीं हो सकती है।

 

दोस्त के साथ गया था रोहित

बताया गया कि रोहित (12) सदर थाना क्षेत्र के भिखनपुरा गांव नर्सरी मोहल्ले के निवासी शंकर साह का पुत्र था। वह शौच को पोखर की तरफ गया। पड़ोस के सात साल का करण कुमार भी उसके साथ था। पोखर में दोनों के पैर फिसल गए। रोहित डूब गया, करण तैरना जानता था, इसलिए वह निकल गया। करण के हल्ला करने पर ग्रामीण धर्मेद्र पोखर में कूदा और रोहित को पानी से बाहर निकाला। उसने बताया कि उसकी सांसें चल रही थीं। ऑटो से इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया। वहां न नर्सिग स्टाफ थे और न ही डॉक्टर। काफी देर बाद डॉ. के जमां आए और मृत घोषित कर दिया। परिजन एंबुलेंस चालक द्वारा लाल कार्ड व रुपये मांगने से भड़क उठे।

 

स्टेशन रोड पर बांस-बल्ली लगाया

परिजन ने स्ट्रेचर पर शव रख हॉस्पीटल गेट व स्टेशन रोड पर बांस-बल्ली लगा दिया। टायर जलाकर मुख्य सड़क को जाम कर दिया। पुलिसकर्मी समझाने पहुंचे तो और ज्यादा उग्र हो गए। जाम कर रहे लोग हमलावर हो गए। शव वाहन के साथ पांच एंबुलेंस को क्षतिग्रस्त कर दिया। डर से डॉक्टर नवीन कुमार, डॉ. प्रशांत तिवारी, एएनएम व गार्ड ने भाग कर अपनी जान बचाई। डर से आइसोलेशन वार्ड से कई मरीज भी अस्पताल छोड़ भागे। इमरजेंसी सेवा ठप होने के बाद क्षति आकलन करने सीएस पहुंचीं और अन्य जानकारी जुटाई।

अस्पतालों में मौत या जरूरतमंदों को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराना नासूर बनता जा रहा है। इसे लेकर आए दिन अस्पतालों में तोड़फोड़ और बवाल हो रहा है। सरकार को करोड़ों की क्षति हो रही है। लेकिन, इस दिशा में जिला और अस्पताल प्रशासन की ओर से ठोस पहल नहीं की जा रही।

सदर अस्पातल में तोड़फोड़ के दौरान लाखों की हुई क्षति के मामले में डीएम धर्मेन्द्र सिंह गंभीर हैं। एसडीओ से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।

चल रही थी बच्चे की सांस

भिखनपुरा नर्सरी टोले के पोखर में डूबे 12 साल के अचेत रोहित को परिजन सीधे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। पता चलने पर गांव के लोग भी पहुंचने लगे। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की सांस चल रही थी। किसी ने भर्ती नहीं किया। काफी देर बच्चा वैसे ही पड़ा रहा। इस बीच उसकी मौत हो गई। सूचना पर नगर थाने की पुलिस आई और परिजनों के साथ कागजी काम निपटाने लगी। पोस्टमार्टम में एसकेएससीएच ले जाने के लिए शव वाहन मांगा गया। पहले बीपीएल कार्ड मांग कर टरकाने का प्रयास किया। बाद में पैसे की मांग करने लगे। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा। लोगों ने सड़क जाम कर बबाल मचाना शुरू कर दिया।

पुलिसकर्मियों की संख्या थी कम

सड़क जाम की सूचना जिला प्रशासन से लेकर राज्य मुख्यालय तक चली गई। लेकिन, बवाल शांत करने को नगर थाने से एसआइ के साथ एक एएसआइ पहुंचे। कम संख्या होने के कारण वे लोग तमाशबीन बने रहे। बच्चे के पिता शंकर साह की दो महीने पहले मृत्यु हो गई थी। बच्चे की मां बार-बार बेहोश हो रही थी। इसे देख लोगों का आक्रोश और भी बढ़ गया। अस्पताल में घुसने के साथ तोड़फोड़ शुरू कर दी। मौके पर मौजूद डॉक्टर, गार्ड, स्टाफ जान बचाकर छिप गए। ताला तोड़कर लोग इमरजेंसी वार्ड में घुसे। ओटी में रखे सारे औजार को क्षतिग्रस्त कर दिया। डीएस कार्यालय के आलमीरा, कुर्सी, टेबल, टेलीफोन, खिड़की आदि तोड़ डाले। सिविल सर्जन कार्यालय का भी वही हाल किया। एसी, कंम्प्यूटर सहित लाखों की क्षति कर दी गई। शव वाहन के साथ पांच एंबुलेंस को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आइसोलेशन वार्ड की एएनएम छत पर जाकर छिप गईं।

Source : Dainik Jagran

Photos : Manoj Kumar

 

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