यहां-वहां के चक्कर में गई मासूम की जान, कंधे पर ले गए शव
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धरती के भगवान ने बच्चे की गंभीर हालत को नजरअंदाज क्या किया, उसकी मौत ही हो गई। इससे आक्रोशित परिजनों ने एसकेएमसीएच में जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना था कि यदि उसे यहां-वहां नहीं दौड़ाकर बच्चे का इलाज किया गया होता तो शायद उसकी मौत नहीं होती। मृतक के परिजन शव ले जाने को तैयार नहीं थे। वे दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

अहियापुर थाना के मुस्तफापुर निवासी मो. जावेद अपने परिवार के साथ आजकल लक्ष्मी चौक के समीप रहता है। बुधवार की रात वह अपने दो वर्षीय बीमार पुत्र मो. शाबिर को लेकर एसकेएमसीएच पहुंचा। यहां इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने उसे पीआइसीयू में रेफर कर दिया। वहां दवा उपलब्ध नहीं होने पर नर्स इलाज करने से मुकर गई। चार बार मरीज को गोद में लेकर परिजन पीआइसीयू व इमरजेंसी का चक्कर काटते रहे। इसी दौरान उसके पुत्र की मौत हो गई। बच्चे को मृत देख परिजनों का आक्रोश भड़क उठा और हंगामा करने लगे। इससे वहां अफरातफरी मच गई। स्वास्थ्य प्रबंधक एंबुलेंस की सुविधा देने पहुंचे जिसे लेने से परिजन मुकर गए। कहा कि जब बच्चा जिंदा था तो इलाज व ट्राली की सुविधा नहीं मिली। गोद में लेकर इलाज को इधर-उधर दौड़ना पड़ा। अब मर जाने के बाद सुविधा देने पहुंचे हैं। गोद में लेकर इलाज को भटके, अब गोद में ही शव लेकर जाएंगे। इसके बाद परिजन कंधे पर शव लेकर चले गए।

Source : Dainik Jagran

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