नगर आयुक्त रमेश प्रसाद रंजन हटाए गए, आईएएस के जिम्मे होगा नगर निगम
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नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर आयुक्त रमेश प्रसाद रंजन को पद से हटा दिया है। इनकी सेवा सामान्य प्रशासन विभाग को वापस कर दी है। नगर एवं आवास विभाग के अवर सचिव रामसेवक प्रसाद ने शुक्रवार को आदेश जारी कर प्रशासनिक दृष्टिकोण से इन्हें एक दिसंबर से ही विरमित कर दिया है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डीएम धर्मेंद्र सिंह को प्रभारी नगर आयुक्त के लिए अधिकारियों के नाम की अनुशंसा करने को कहा गया है।

Nagar Ayukt, Muzaffarpur

नगर अायुक्त रमेश प्रसाद रंजन को आखिरकार जाना ही पड़ा। वह इस पद पर तकरीबन ढाई साल तक रहे। इस दौरान उनका विवादों से गहरा नाता रहा। उन पर वित्तीय अनियमितताओं के साथ एक दर्जन से अधिक आरोप लगे। वैसे, नियुक्ति के बाद से ही विभिन्न फैसलों की वजह से उनका विरोध होता रहा। लेकिन, नगर निगम के चुनाव के बाद निगम बोर्ड में बदले समीकरण में उनके लिए चुनौती बढ़ गई थी।

तत्कालीन मेयर वर्षा सिंह के कार्यकाल में नगर निगम पर पूर्व नगर विधायक विजेंद्र चौधरी का कब्जा था। तब उन पर पूर्व नगर विधायक के इशारे पर कई विवादित फैसले लेने के आरोप लगे। सरकार के आदेश-निर्देशों के विरुद्ध कार्य करने एवं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सिर्फ पूर्व नगर विधायक विरोधी खेमे के पार्षदों से उनकी कई बार तीखी नोक-झोंक हुई, बल्कि नगर विधायक (वर्तमान नगर विकास एवं आवास मंत्री) सुरेश शर्मा के भी निशाने पर रहे। उन्हें हटाने की मांग को लेकर निगम में जमकर धरना-प्रदर्शन भी हुआ था। लेकिन, बताते हैं कि उस वक्त पूर्व नगर विधायक समर्थक पार्षदों का समर्थन होने से श्री प्रसाद ने किसी तरह के विरोध की परवाह नहीं की।

वित्तीय अनियमितता, कार्य में पारदर्शिता का अभाव, सात निश्चय के कार्यों में गड़बड़ी, अभियंता कर्मियों की नियुक्ति में गड़बड़ी, सफाई कर्मचारियों का वेतन भुगतान, इलेक्ट्रिक पोल पर नंबर प्लेट लगाने में अनियमितता, सुपर सकर मशीन की खरीदारी, एलईडी लाइट की खरीदारी, मिनी पंप लगाने में गड़बड़ी का आरोप हो या पार्षदों के प्रस्ताव को नजरअंदाज का मामला। वे तमाम आरोपों को झेलते रहे और मनमाफिक फैसले लेते रहे। मगर, निगम के जानकारों के मुताबिक, गत नगर निगम चुनाव के बाद समीकरण बदला तो नगर आयुक्त की राह भी मुश्किलों से भर गई।

पूर्व नगर विधायक खेमा जहां हासिए पर खिसक गया। वहीं, निगम की राजनीति की एक डोर विधान पार्षद दिनेश सिंह तो दूसरी डोर नगर विधायक सुरेश शर्मा के हाथ में चली गई। नगर विधायक के नगर विकास एवं आवास मंत्री बनने के बाद तो समर्थक पार्षदों के हौसले और बढ़ गए। यही वजह है कि अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नगर आयुक्त के खिलाफ डिप्टी मेयर मानमर्दन शुक्ला के तेवर और तल्ख हो गए। पटना में स्मार्ट सिटी को लेकर हुई बैठक की जानकारी नहीं देने के मामले में तो मेयर सुरेश कुमार एवं डिप्टी मेयर दोनों ने ही मोर्चा खोल दिया था। इस दौरान गतिरोध खत्म करने के ख्याल से नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने मामले में हस्तक्षेप कर आक्रोश को शांत करा दिया। लेकिन, अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अंतत: उन्हें जाना ही पड़ा।

नगर विकास मंत्री ने कहा – शहर का चयन स्मार्ट सिटी में इसलिए आईएएस अधिकारी होंगे नियुक्त

उधर, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि शहर काे स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित होने से अब नगर आयुक्त के पद पर आईएएस अधिकारी को तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई प्रकार की शिकायतें मिलने के बाद नगर आयुक्त की सेवा वापस किए जाने की बात कही। नगर आयुक्त रमेश प्रसाद रंजन जिले में ढ़ाई वर्ष से तैनात थे तथा विवादों मं रहने से निगम की राजनीति के केन्द्र विन्दु में रहते थे। इनका तबादला होने के बाद भी आवासीय कार्यालय में बैक डेट में चेक काटे जाने की सूचनाएं उच्चाधिकारियों से लेकर मंत्री तक भेजी जाती रही। हालांकि, विभाग ने इनका तबादला करते हुए एक दिसंबर से इनके द्वारा काटे गए किसी चेक के साथ आदेश के प्रभावी नहीं होने का आदेश दिया है।

डिप्टी मेयर मानमर्दन ने आतिशबाजी कर किया खुशी का इजहार

शुक्रवार की शाम जैसे ही नगर आयुक्त के पद से हटने का आदेश जारी हुआ कि विरोधी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कई पार्षदों के साथ डिप्टी मेयर मानमर्दन शुक्ला ने आतिशबाजी की। उन्होंने कहा कि शहर के विकास एवं नगर निगम की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए नगर आयुक्त का जाना अच्छा संकेत है। शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जाना है। निगम को काम करने वाले नगर आयुक्त चाहिए। ताकि स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में तेजी से काम हो।

Source : Dainik Bhaskar

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