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नगर आयुक्त को हटाए जाने के बाद बैक डेट में चेक काटे जाने की जिला प्रशासन की ओर से हो रही छानबीन के बीच सोमवार को एक नया मामला भी सामने आया। कहा गया कि नगर आयुक्त रमेश प्रसाद रंजन जाते-जाते 5 दर्जन कर्मचारियों को नियोजित कर गए। बैक डेट में चेक काटने के बाद गलत ढंग से नियोजन की बात सामने आने पर कर्मचारियों से लेकर निगम की राजनीति से जुड़े लोगों के बीच भी हड़कंप की स्थिति है। तत्कालीन नगर आयुक्त पर अवैध नियोजन का आरोप निगम कामगार यूनियन ने लगाया है। यूनियन के संयोजक रमेश ओझा ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी तब हुई, जब सोमवार को निगम का अंचल कार्यालय खुलने पर कई कर्मचारी जॉइन करने पहुंचे। इधर, संघ की ओर से दावा किया गया है कि सोमवार को अंचल संख्या- 5 में 17 सफाई कर्मचारी, अंचल- 6 में 7 सफाई कर्मचारी और ऑटो टिपर चलाने को 4 चालकों ने योगदान दिया है। यूनियन के संयोजक श्री ओझा ने आरोप लगाया है कि जाते-जाते कर्मचारियों को नियोजित कर पैसे का बड़ा खेल खेला गया है। यूनियन की ओर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। उधर, मेयर ने कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी।

दिन भर चेक रिकॉर्ड को लेकर मची रही अफरातफरी 

सोमवार को निगम कार्यालय खुला तो सबसे अधिक अफरातफरी लेखा शाखा में दिखी। स्टाफ चेक संख्या, बैंक से जुड़ी जानकारी और खाता संख्या का रिकॉर्ड तैयार करने और इसके मिलान में जुटे थे। बता दें कि नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री प्रधान सचिव के निर्देश के बाद छानबीन तेज हो गई है। डीएम धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर नगर सचिव अपनी निगरानी में निगम के बैंक खाते की छानबीन में जुटे थे। जानकारी के अनुसार नगर आयुक्त की ओर से 1 दिसंबर के बाद जारी चेक के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

 

निगम में बैक डेट में कर्मचारियों के नियोजन का मामला संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर विभाग को लिखा जाएगा। -मेयर, सुरेश कुमार 

इस तरह का मामला गंभीर है। विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। यदि गड़बड़ी हुई होगी, तो कार्रवाई होगी। किसी तरह की अवैध नियुक्ति पर संबंधित लोगों को वेतन भुगतान नहीं दिया जाएगा। -नगरविकास एवं आवास विभाग मंत्री, सुरेश शर्मा 

Source : Dainik Bhaskar

 

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