सीबीआइ ने माना, जमीन को लेकर हुई नवरुणा की हत्या

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Navruna, Murder Mystery, CBI, Supreme Court, Muzaffarpur

 

Navruna, Murder Mystery, CBI, Supreme Court, Muzaffarpur

 

नवरुणा के अपहरण व हत्या का मामला करोड़ों की जमीन को लेकर हुआ। इसके पीछे भू-माफिया की भूमिका रही है। घटना की तार नाला की सफाई व उसमें से मिले कंकाल से भी जुड़े हैं। आरोपित बनाए गए नगर निगम के पार्षद राकेश कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी इसी नाला व कंकाल बरामदगी के संबंध में मिले साक्ष्य के आधार पर की गई है। सीबीआइ का मानना है। सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक एएच खान ने पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में मामले के जमीन के सौदे से जुड़े होने की बात को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार वार्ड पार्षद के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। जल्द ही उनके विरुद्ध अनुसंधान पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

 

11 फाइलें लेकर कोर्ट पहुंची थी सीबीआइ : वार्ड पार्षद को कोर्ट में पेश करने को लेकर सीबीआइ उनके खिलाफ पुख्ता सुबूत को लेकर आई थी। सुबूतों के पूरी 11 फाइलें कोर्ट के समक्ष रखी गई। फिर इन्हें सीबीआइ अधिकारी अपने साथ लेते चले गए। अभी अनुसंधान पूरा नहीं होने के कारण सीबीआइ की ओर से इन सुबूतों का खुलासा नहीं किया गया है।

 

पप्पू के बदलते रहे तेवर, कभी रोए तो कभी सीबीआइ से उलझे : गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेशी के लिए कचहरी परिसर में लाए गए वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिन्हा उर्फ पप्पू के तेवर कई बार बदले। कभी वे सीबीआइ अधिकारी से उलझ रहे थे तो कभी वह फूट-फूट कर रो पड़ते थे। सीबीआइ अभिरक्षा में कचहरी परिसर में पहुंचे तो उसके चेहरे पर मायूसी के भाव थे। कदम थके-थके थे, लेकिन यहां जब उसने अपने बड़ी संख्या में अपने समर्थकों को देखा तो उनके चेहरे के भाव बदल गए। वे बात-बात में सीबीआइ अधिकारी से उलझ पड़े। यह देखकर उनके समर्थकों ने भी हंगामा व नारेबाजी करनी शुरू की। जब उन्हें कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जाने लगा तो आखिर में वे टूट पड़े और अपने को निर्दोष बताते हुए फूट-फूट कर रोने लगे। कोर्ट की कागजी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद जब उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल पहुंचाने के लिए सीबीआइ अधिकारी अपनी गाड़ी में बैठाने लगे तो एक बार फिर से वे ताव में आ गए। चिल्ला-चिल्लाकर यह बताया कि वे निर्दोष हैं। पार्षदों को नसीहत दी कि जनता के कहने पर कोई नाला साफ न कराए नहीं तो उन्हीं की तरह हत्या की फर्जी केस में फंसा दिए जाएंगे।

वार्ड पार्षद समर्थकों पर सीबीआइ की थी खास नजर : कचहरी परिसर पहुंचे वार्ड पार्षद के समर्थकों पर सीबीआइ अधिकारियों की खास नजर थी। सीबीआइ की टीम के पहुंचने से पहले खुफिया विभाग के कई अधिकारी कचहरी परिसर में पहुंच कर इन सबकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। दरअसल, इन अधिकारियों की नजर उन समर्थकों पर थी जो जमीन व सूद-ब्याज के धंधे से जुड़े हैं। यह भी जांच की जा रही है कि हंगामा करने वाले में कहीं उन रसूखदारों के समर्थक तो शामिल नहीं जो अपनी संभावित गिरफ्तारी का भय सताने लगा है। इनकी कुंडली खंगालने की बात बताई जा रही है। कचहरी परिसर में हंगामा के पीछे कौन हो सकते हैं। सीबीआइ की नजर इस पर भी है।

 

Source : Dainik Jagran