तो इस कालजयी रचनाकार की बदौलत साहित्य की धरोहर है मुजफ्फरपुर की धरती

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कटोरिया। बांका – हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री ने अपनी लेखनी से भाषा साहित्य के भंडार को समृद्ध किया।उनका महाकाव्य राधा हिन्दी के चंद महाकाव्यों की शृंखला में श्रेष्ठतम कृति है। शास्त्री जी महान और उत्कृष्ट गद्यकार भी हैं। ये बातें बांका के मुक्ति निकेतन में आयोजित महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के जयंती समारोह में प्रख्यात साहित्यकार डॉ. संजय पंकज ने कही। वे आचार्यश्री के सर्वप्रिय शिष्य और बेला पत्रिका के संपादक सह अखिल भारतीय साहित्य परिषद के भी हैं।

उन्होंने कहा कि छोटी उम्र में ही काकली जैसी संस्कृत काव्य कृति से तत्कालीन महामहोपाध्याय को चमत्कृत करने वाले शास्त्री जी ने हिंदी में रूप अरूप गीत संग्रह से बड़े बड़े आलोचकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।वे निराला, पंत, प्रसाद आदि तत्कालीन महाकवियों के प्रिय रहे। छायावाद के आलोक से निकलते हुए शास्त्री जी ने संख्या और गुणवत्ता में जितने गीत लिखे उतने किसी और ने नहीं लिखे। प्रेम ,सौंदर्य और अाध्यात्म के गायक आचार्य जी जीवन भर जीवन राग गाते रहे। उन्होंने साहित्यकारों की कई पीढ़ीयां तैयार की। अच्छी भाषा और मजबूत लेखनी के लिए नयी पीढ़ी को उनके साहित्य का गहन अध्ययन करना चाहिए।

डॉ. पंकज ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति के पुनर्निर्माण और पीढ़ियों के निर्माण के लिए आचार्य जी का साहित्य मानक है। सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के पूर्व राजभाषा अधिकारी व लेखक विमल कुमार परिमल ने कहा कि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की कविताएं हमें मानवीयता का पाठ पढ़ाती हुई संवेदना के उस भावभूमि पर प्रतिष्ठित कर देती है जहां रागद्वेष की सारी दीवारें ध्वस्त हो जाती हैं। हम उस भावलोक में विचरण करने लगते हैं जहां व्यक्ति किसी जाति ,धर्म विशेष का न होकर मानव मात्र का हो जाता है। वहीं महाकवि राम इकबालसिंह राकेश साहित्य परिषद, सिमुलतला आवासीय विद्यालय के संयोजक सह हिंदी अध्यापक, कवि साहित्यकार डॉ. सुधांशु कुमार ने कहा कि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री का संपूर्ण साहित्य एक ऐसी संस्कारशाला है जिसमें संस्कारित होकर कवि, साहित्यकार सभी अपने आपको संस्कारित करते हुए समाज व राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु बनाने में अपना अपना योग दे सकते हैं।उनका साहित्य हर युग व हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक है।

ध्वस्त हो रहे मूल्यों के बीच उनका साहित्य अमरदीप की तरह हमारा मार्ग आलोकित कर रहा है। मुक्ति निकेतन कटोरिया के संस्थापक सचिव व साहित्य मर्मज्ञ श्रीप्रसाद सिंह ने कहा कि आज युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण के लिए शास्त्री जी के विचार अत्यंत ही प्रासंगिक हैं। आज जरूरत है कि हर स्तर के छात्रों के पाठ्यक्रम में शास्त्री जी की कविताएं शामिल की जाए ।संस्था के सचिव चिरंजीवी कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि आज इस मंच की सार्थकता है कि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की जयंती मनाई जा रही है ।

 


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