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आसमां मुकम्मल करना है तो तूफानों से जूझना सीखो। यह उक्ति सटीक बैठती है मुजफ्फरपुर के पंकज नारायण पर। मुजफ्फरपुर जिले के तुर्की छाजन टोला के रहने वाले पंकज नारायण को आज विशेष पहचान की जरूरत नहीं। वे पहले ऐसे भारतीय निर्माता व प्रोड्यूसर हैं जिन्होंने प्रतिभा को मंच देने के लिए परंपरा को जिंदा रखा। बड़े पर्दे पर सफल हो चुके पंकज ने रचनात्मक विचार को कायम रखते हुए छोटे पर्दे के लिए एक एक रियलिटी शो बनाया है। एक टीवी चैनल पर प्रसारित हो रहे रियलिटी शो “ओम शांति ओम” में परंपरा को रचनात्मकता से जोड़ते हुए आजाद रखा गया है। इसके निर्माण में प्रोड्यूसर पंकज नारायण को पत्नी अपूर्वा बजाज ने बखूबी साथ निभाया है।

मां के विश्वास ने कभी थकने नहीं दिया :

अपनी कविता ‘मां को शहर के सजने से कोई दिक्कत नहीं है, उसे बस इतना डर है कि मैं किसी स्ट्रीट लाइट की दो-चार घूंटों में न बदल जाऊं।’ सुनाते हुए पंकज कहते हैं मां चित्ररेखा देवी के विश्वास ने मुझे जीवन में कभी थकने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में सुखी रहने का मंत्र है कि जीवन में ईश्वर ने जो दिया है उसी में खुश रहो। पंकज कहते हैं कि पिता शंभू नारायण सिंह के आशीर्वाद से मुझे जीवन की मशक्कतों को झेलने में कभी दिक्कत नहीं हुई। उनको इस मुकाम तक पहुंचाने में मुजफ्फरपुर के शिक्षाविदों की सीख का भी अहम योगदान है। साहित्यकारों की नगरी मुजफ्फरपुर से प्रेरित होकर ही पंकज मायानगरी मुंबई तक पहुंचे हैं।

प्रतिभाओं को ढूंढ़कर दुनिया के सामने लाने का है शौक :

पंकज हमेशा से एक यात्री रहे हैं। बहुमुखी मीडिया व्यवसायी पंकज बहतर जिंदगी की तलाश में मुजफ्फरपुर से दिल्ली पहुंचे। फिर अपने बड़े सपनों का पीछा करते हुए मुंबई आ गए। रचनात्मकता से लगाव होने के कारण पंकज कुछ समय तक पत्रकारिता में भी सक्रिय रहे हैं। वे एक बहुमुखी मीडिया व्यवसायी हैं। फिलहाल वे मुंबई में एक प्रोडक्शन हाउस चलाते हैं। उनका कहना है बिहार की प्रतिभाएं विस्थापित हो रही हैं। यहां के लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि इसे रोकने के लिए कुछ विशेष करें। कला को मंच देने के लिए बिहार में ही व्यवस्था की जाए तो यहां से पलायन रूक सकेगा।

Source : Hindustan

Pankaj Narayan, Bihar, Muzaffarpur

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