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महज पांच वर्षों में अपनी संपत्ति में 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने वाले बिहार के 28 वर्तमान व पूर्व विधायकों पर आयकर विभाग का शिकंजा कसने वाला है। आयकर विभाग इन सभी 28 वर्तमान व पूर्व माननीयों को जल्द ही नोटिस जारी उनसे संपत्ति के स्रोत पूछने जा रहा है। यदि उनके जवाब से आयकर विभाग संतुष्ट नहीं होगा तो संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।

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दरअसल, वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे इन माननीयों ने अपनी संपत्ति की जो घोषणा की थी, उसका मिलान वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में की गई संपत्ति की घोषणा से किया। पाया गया कि संपत्ति में 200 फीसद का इजाफा हुआ है।

हालांकि आयकर विभाग ने इस मामले में बिहार के कुल 50 विधायकों की पहचान की थी। लेकिन इनमें 22 नेताओं ने आयकर विभाग को अपना जो जवाब भेजा, उससे आयकर विभाग संतुष्ट है। लेकिन बाकी 28 वर्तमान व पूर्व विधायकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि इन सभी 28 विधायकों की कुल 30 करोड़ की संपत्ति जांच के दायरे में है। आशंका है कि यह उनकी अघोषित संपत्ति हो सकती है। आयकर विभाग ने इन माननीयों की संपत्ति से संबंधित मामले को रीओपन करने के संकेत दिए हैं। क्योंकि अघोषित आय पर आयकर अधिनियम की धारा 147 के तहत पेनाल्टी वसूली का प्रावधान है। वह भी उसपर लगने वाले टैक्स का तीन गुना। इस मामले में सभी राजनीतिक पार्टियों के माननीय शामिल हैं।

इसमें प्रमुख नामों में अरुण कुमार सिन्हा, जेल में बंद राजवल्लभ यादव, भाजपा के राणा रंधीर सिंह, सर्फुद्दीन, शमीम अहमद, पूर्णिमा यादव, श्री नारायण यादव, विजय कुमार सिन्हा, नरेंद्र कुमार नीरज, रेखा देवी, निरंजन राम, अरुण यादव, पूर्व विधायक रामाधार सिंह व विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला शामिल हैं।

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Source : Dainik Jagran


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