छह की सीट पर बैठाते 12 खतरे में यात्रियों की जिंदगी

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ऑटो चालक छह की सीट पर 12 से 13 लोगों को बैठा रहे हैं। क्षमता से दोगुनी सवारी बैठाने की वजह से हादसे हो रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई की रफ्तार काफी धीमी है। चालक की सीट पर भी तीन से चार यात्रियों को बैठाया जा रहा है। वह अपने दाहिने व बाएं साइड भी दो-दो यात्री बैठाकर खुद लटककर ऑटो चलाते हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस नदारद, परमिट का भी पता नहीं : ड्राइविंग लाइसेंस नदारद, परमिट का पता नहीं, फिर भी भी सड़क पर ऑटो पूरी रफ्तार में हैं। जिले में चलने वाले अधिकतर ऑटो चालकों के पास कमर्शियल लाइसेंस नहीं है। काफी संख्या में बिना परमिट वाले ऑटो भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। फिटनेस-प्रदूषण प्रमाणपत्र को भी अधिकतर नजर अंदाज कर रहे हैं। परिवहन व पुलिस की कार्रवाई काफी सुस्त है। इससे ये बेखौफ हैं। विभाग संसाधन की कमी का रोना रो रहा है तो पुलिस की कार्रवाई उगाही तक सिमट कर रह जा रही है।

12 से 14 वर्ष के बच्चे चला रहे ऑटो : 12 से 14 वर्ष के बच्चे भी ऑटो चला रहे हैं। इन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं। इनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही अनुभव। विडंबना है कि स्थिति से अवगत होने के बाद भी परिवहन विभाग मौन है। इससे हादसों की संभावना रहती है


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