मुजफ्फरपुर : निगम में पद हैं, पदाधिकारी नहीं
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नगर निगम में नौ पदों को एक दशक से अपने अधिकारियों का इंतजार है। बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के तहत पदों का सृजन तो किया गया, पर उनपर पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई।

पहले शहरी निकायों का संचालन पटना नगरपालिका अधिनियम के तहत होता था। लेकिन, उसमें कई खामियां थीं। वर्ष 2007 में सरकार ने उन खामियों को दूर करते हुए बिहार नगरपालिका अधिनियम पास किया। इसमें निकायों के संगठनात्मक ढांचे को नया स्वरूप दिया गया और कार्यो के अनुसार पदों का सृजन किया गया।

पूर्व में नगर निगम में सिर्फ दो पदधारक होते थे। एक प्रशासक और दूसरा स्वास्थ्य पदाधिकारी। नए अधिनियम में प्रशासक के स्थान पर नगर आयुक्त का पद सृजित किया गया, जिसे मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी का अधिकार प्राप्त हुआ। अधिनियम में नगर आयुक्त के साथ तीन अपर नगर आयुक्त, नगर वित्त एवं लेखा पदाधिकारी, नगर आंतरिक अंकेक्षक, मुख्य नगर अभियंता, नगर वास्तुविद् एवं नगर निवेशक, मुख्य नगर स्वास्थ्य पदाधिकारी, नगर विधि पदाधिकारी, नगर सचिव एवं संयुक्त नगर आयुक्त या नगर उप आयुक्तया उपमुख्य नगर अभियंता के पद सृजित किए गए। सरकार ने निगमों में नगर आयुक्त व अपर नगर आयुक्त को भेजा। तीन माह के लिए नगर वित्त व लेखा नियंत्रक की नियुक्ति हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया।

मुख्य नगर स्वास्थ्य पदाधिकारी का प्रभार जिले के एसीएमओ को दिया गया है। निगम कोष से राशि की निकासी नगर आयुक्त, नगर वित्त एवं लेखा नियंत्रक के हस्ताक्षर से होती है। उनके स्थान पर अपर नगर आयुक्त इसे कर रहे थे। सृजित पदों पर अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति नहीं होने से निगम में कार्य संस्कृति का अभाव है। न विकास कार्य योजनाबद्ध तरीके से हो रहे हैं और न ही उनके लिए कारगर योजनाएं बन पा रही हैं। कार्य या तो कर्मचारियों की सहायता से कराया जाता है या बड़ी राशि खर्च कर बाहरी व्यक्ति से। महापौर सुरेश कुमार का कहना है कि अधिकारियों की कमी से निगम का कार्य प्रभावित हो रहा है। न योजना बन पा रही है न ही बोर्ड एवं सशक्त स्थाई समिति की बैठकों का अनुपालन हो रहा है। सरकार को चाहिए कि सभी सृजित पदों पर अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति करे।

Source : Dainik Bhaskar

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