लजीज और खास्ता तिलकुट की सौंधी खुशबू से सुगंधित होने लगे हैं शहर के बाजार
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सर्दी का मौसम आते ही लजीज एवं जायकेदार खास्ता तिलकुट का बाजार गर्म हो गया है। सौंधी खुशबू से बाजार का कोना-कोना महकने लगा है। हालांकि, बिक्री में तेजी नहीं आई है। लेकिन, शहर के प्रमुख बाजार कल्याणी, सरैयागंज, अखाड़ाघाट रोड से लेकर धर्मशाला, कलमबाग चौक, टेक्नीकल चौक सहित विभिन्न चौक-चौराहे पर तिलकुट की दुकानें सज गई हैं। एक तरफ तिल कूटने से लेकर बनाने का काम हो रहा है, दूसरी तरफ स्टॉल पर आधा किलो, दो सौ ग्राम की पन्नी में तिलकुट सजे हैं। ग्राहकों को लुभाने के लिए ऐसा किया जाता है। कल्याणी हरिसभा रोड स्थित दुकानदार ने बताया कि तिल कुटने पर इसकी सुगंध निकलती है। यह ग्राहकों का ध्यान आकृष्ट करती है। सामने बनाने का मकसद यह रहता है कि ग्राहकों को ताजा तिलकुट दिया जा सके। तिलकुट बनाने वाले कारीगरों के बारे में भी दुकानदार यह बताने से परहेज नहीं करते कि यह गया से बुलाये गए हैं। टेक्नीकल चौक स्थित विश्वनाथ ताजा तिलकुट भंडार के दुकानदार सत्यनारायण ने बताया कि तिल से बनी सामग्री की दुकानदारी सर्दी में तीन-चार माह होती है। पारा गिरने पर दो दिनों से दुकान लगाए हैं। गया के कुशल कारीगर बुलाकर बनवा रहे हैं।

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लाई-तिलकुट और रेट 

खोआ का तिलकुट से लेकर सुगर फ्री तिलकुट भी ग्राहकों के लिए उपलब्ध हो गए हैं। वेराइटी के साथ कई रेंज भी है। खोआ तिलकुट और पापड़ी तिलकुट की भी अच्छी खासी मांग होने लगी है। खोआ तिलकुट 400 रुपये किलो है। चीनी और गुड़ के तिलकुट के अलग-अलग रेंज है। 240 से 280 रुपये मिल रहा है।

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सफेदकाला तिलकतरा Rs 200 और चूड़ा लाई Rs 80 किलो 

तिलकुट के साथ चूड़ा, चावल, मकई लावा की लाई, सफेद-काला तिलकतरी, सफेद तिल वाली रेवरी की दुकानें भी सज गई हैं। चूड़ा 80 रुपये तो सफेद-काला तिलकतरा 200 से 220 रुपये किलो है। ठेले पर चंपारण का प्रसिद्ध एवं मुजफ्फरपुर का गौरव बताकर लाई भंडार के हरिशचंद्र साह कहते हैं, बाजार में चक्कर लगाकर पूरे दिन में 50 से अधिक लाई एवं तिलकतरी बिक जा रहे हैं। गया के कारीगरों को तिलकुट बनाने में महारत हासिल है। इसलिए उनके द्वारा बनाये गए तिलकुट की मांग सबसे ज्यादा है।

Source : Dainik Bhaskar | Pic by Tanay Singh

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