इस विजयादशमी करें समाज से दस शत्रुओं का नाश और लाएं दस अच्छाई खुद में और समाज में

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इस विजयादशमी करें समाज से दस शत्रुओं का नाश और लाएं दस अच्छाई खुद में और समाज में –

हमारे दस शत्रु और उनसे निबटने के उपाए –

1. प्रदुषण (साँस की बिमारिओं का और कैंसर फ़ैलाने वाला सबसे बड़ा राक्षस) का करें खात्मा

अपने जन्म दिन पे एक पेड़ लगाए और साल भर उसकी देखभाल करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक तथा आतिशबाजी को कहें ना।

2. गन्दगी (प्रदुषण की जननी), इसे एक दिन में ख़त्म नहीं किया जा सकता, हर दिन मारना पड़ेगा

अपने घर और दुकान में करें डस्टबिन का प्रयोग, पब्लिकप्लेस हो या पब्लिक ट्रांसपोर्ट इधर उधर कूड़ा ना फेकें, अपने घर को साफ रखने के चक्कर में कूड़ा कही और ना फेकें, नदिओं में और पोखरों में कोई भी चीज यहाँ तक की फूल पत्तियां तक ना फेकें।

3. अशिक्षा तथा कुशिक्षा (हर प्रकार के दोष का जनक) को करें दूर

सिर्फ लिखना पढ़ना आजाना हमें शिक्षित नहीं कर देता और कई तो ऐसे हैं जिन्हे उतना भी नहीं आता, क्या करना है या कैसे करना है सिखने या सीखने से पहले ये सीखें और सिखाएं की क्यों करना है, शिक्षा का महत्व समझे समझाए और शिक्षा का उजाला फैलाएं।

4. जातीय, राजनितिक या धार्मिक असहिष्णुता तथा कट्टरवाद रूपी शत्रु (जो अक्सर मित्र के वेश में मिलता है) का करें नाश

देश में आज जातपात हो या धार्मिक कट्टरता, अलगाववाद हो या छेत्रवाद इनसब ने इतना पैर पसार लिया है की हम लोगो से एक भारतीय की तरह नहीं मिलते बल्कि इनसब पैमाने में दाल के अपने हिसाब से टोल मोल के मिलते हैं, ये देश को अंदर से खोखला कर रहा है, इसे मिटाना बहोत जरुरी है।

5. रोग और अस्वस्थता

रोग और अस्वस्थता चाहे शारीरिक हो या मानसिक हमारे कार्य छमता को घटा देती है तथा ना सिर्फ हमारे शरीर और दिमाग को बल्कि हमारे पैसे, मिल सकने वाले मौके भी हमसे छीन लेती है, कहते हैं की स्वास्थ्य पे खर्च किया हर एक रूपया 16 गुना फायदा देता है यानि की अगर आप अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए एक रुपया खर्च करते हैं तो आप 16 रुपये कमा या बचा सकते हैं, तो समझे समाज में स्वास्थ्य का महत्व, अपने आप को स्वस्थ रखें और सर्कार को भी स्वास्थ्य के चैत्र में काम करने पे जोर देने कहें, याद रखें जान है तो जहाँ है।

6. असुरक्षा तथा अन्याय से लड़ें

समाज में बढ़ती असुरक्षा तथा अन्याय से लड़ने के लिए कोई अलग से नहीं आएगा, देवता प्रकट नहीं होते वो मानव मस्तिष्क में विराजते हैं और हमें अग्रसर करते हैं की हम बुराइयों का नाश कर सके अपने अच्छाईओं के द्वारा, हम किसी को मुसीबत में देखते हैं तो ये सोच के दूर निकल लेते हैं की कौन मुसीबत मोल लेने जाये, कई बार बहन बेटिओं की इज्जत लोगो के आँखों के सामने लूट जाती है, लोग एक्सीडेंट में दम तोड़ देते हैं, परोस में डाका हो रहा होता है, मगर लोग ये देखते हैं की हमें क्या मतलब कौनसा हमारे जान पहचान वाले हैं या कौनसा हमें इससे फर्क पड़ेगा, ये मानसिकता बदलनी होगी तभी समाज सुरक्षित बनेगा।

7. लोभ तथा भ्रस्टाचार

आज भारत में और विश्व में जो सबसे ज्यादा फैला है वो है भ्रस्टाचार, चाहे नेता मंत्री हों, या दफ्तरों के बड़े साहब या पुलिस या चपरासी काम के बदले घुस लेना और और ज्यादा और ज्यादा का लालच लोगों को घेर रखा है, हमें बताना होगा की काम के लिए बैठें हैं लोग घुस के लिए नहीं, अपने अंदर के लालच को भी मारना होगा और हर लालची का भी विरोध करना होगा, नेताओं से उनके काम का हिसाब लेना होगा हर साल, ताकि ५ साल बाद या तो ाचा काम करके फिर वोट ले जाएँ या अगले साल ही इस्तीफा दे दें जनता इतना विरोध करे उनके भ्रस्टाचार और निकम्मेपन का।

8. पुरूषप्रधानता तथा दहेज़ प्रथा

भारत में वैदिक काल से ही महिलाओं तथा पुरुषों को समान अधिकार दिए गया था , अर्धनारीश्वर कह लें, शिव शक्ति या दसरथ के साथ साथ देवासुर संग्राम लड़ती उनकी पत्नी कैकई या स्वयं माँ भगवती दुर्गा हमने जब हमेशा नारी का शास्त्रों में सम्मान किया है तो सच में उनसे उनके अधिकार छीनने का दुःसाहस कैसे कर सकते है ?

घर में पहले पुरुष खाना खाएंगे, या उच्च सिख्सा का अधिकार सिर्फ पुरुषों को है, या संपत्ति पे अधिकार सिर्फ बेटों को मिलेगा ये कहाँ का न्याय है और कैसे तर्क संगत है? और ये भी है की नारी अधिकारों के हनन में भी नारियों की मुख्या भूमिका होती है, जबतक आप अपने हके के लिए आवाज नहीं उठाओगे कोई नहीं आगे आएगा।

दहेज़ के लोभी लोग चाहते हैं की लड़की बहोत लिखी हो, ढेर सारा दहेज लाये और घर में आके चूल्हा चौका करे, अगर ऐसा ही है तो पढ़ी लिखी क्यों चाहिए ? और दहेज़ मांग के अपने आप को कैसे बेच सकते हो आप? यदि सच में मर्द हैं तो कहें की तुम अपने हिस्से की संपत्ति अपने पास रखना और जो चाहे करना और आप अपने लिए संपत्ति स्वयं अर्जित करें।

9. वंशवाद तथा परिवारवाद

अभिनय हो या राजनीती या शिक्षा या रोजगार का कोई अन्य अवसर वंशवाद और परिवारवाद का जहर इसकदर फैला हुआ है की लोग बस अपने नाते रिश्तेदारों को ही मदद करते हैं आगे आने में तथा जो दूसरे उनसे कहीं ज्यादा सुयोग्य हैं वो मौका ना मिल पाने के कारन आगे नहीं बढ़ पाते।

समाज में भी लोग नेता के बेटों को या अन्य रिश्तेदारों को वोट देते हाँ उन्हें सपोर्ट करते हैं सिर्फ इसलिए क्यूंकि फलां बाबू के रिश्ते में है, और ऐसा कर के हम दूसरे अच्छे उम्मीदवारों से जो काम कर सकते थे अच्छे से उन्स ेमौका छीन लेते हैं, और बाद में रट हैं की काम क्यों नहीं हो रहा, और वो जिन्हे ये लगता है की अपने जान पहचान का है तो काम हो जायेगा वो बेवकूफ हैं क्यूंकि याद रखें वो पद काम करने के लिए ही है , और अगर आप काम करने वाले को चुनेंगे तो वो सब के लिए काम करेगा ना की बस कुछ के लिए, और जब सब के लिए काम होगा तभी समाज बढ़ेगा और आप भी बढ़ेंगे।

10. बेरोजगारी

बेरोजगारी के बढ़ते स्तर का वैसे तो कई कारन है, ऊपर दिए गए मुद्दों को पढ़ते हुए आ रहे होंगे तो अबतक आप ये समझ गए होंगे की क्या क्या कारन हैं इनमे से, मगर ये मुद्दा अलग से इसलिए रखा गया है क्यूंकि बहोत बार इसका कारन सिर्फ और सिर्फ हम स्वयं होते हैं।

लोग हमें कहते हैं ये कर लो और नौकरी मिल जाएगी और हम वो करने लग जाते हैं बिना सोचे की वो हमें पसंद है या नहीं, लोग भर बकरी की तरह इंजीनियरिंग, मेडिकल चार्टर एकाउंटेंसी की या पब्लिक सर्विस कमिशन की तैयारी में जुटे रहते हैं , ये नहीं सोचते की उन्हें क्या पसंद है, वो कितना मेहनत कर पाएंगे, या पैसे कमाने क अलावा इस काम से समाज का क्या भला होगा उनका क्या भला होगा , और होता ये है की बस कुछ लोग सफल होते हैं बाकि असफलता को ही अपनी किस्मत मन के कुछ और काम भी नहीं करते।

याद रखें पैसा काम से आ जाता है लेकिन हर काम पैसे कमाने के लिए नहीं होता, आप काम मन से करेंगे तभी जब आपको वो काम आएगा अच्छे से, काम तभी अच्छे से आएगा जब आप उस विषय के बारे में पढ़ेंगे अच्छी तरह और जब काम अच्छा होगा तो पॉज तो खुद ब खुद आ ही जाने है और साथ में इज्जत भी मिलेगी, और कोई काम सफल ना हो इसका ये मतलब नहीं की कुछ और भी नहीं कर सकते आप, लगे रहें तबतक जबतक कुछ ऐसा ना कर लें की वो काम आपसे अच्छा और कोई ना कर पाए।

यदि आपने इसे पूरा पढ़ा है तो बधाई हो आप सच में इन दस बुराइयों पे विजय पाने के मार्ग में एक कदम चल चुके हैं, माँ भगवती आपको सफल बनाये और समस्त सृष्टि की कृपा आपके लगन को बनाये रखे।
विजयादशमी की ढेरों बधाइयाँ
Content by Anshuman
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