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BIHAR

अनोखा विश्वविद्यालय: छात्रों की परीक्षा और रिजल्ट तक निकालना भूल जाता है, मुजफ्फरपुर स्तिथ बिहार यूनिवर्सिटी

Abhishek Ranjan Garg

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बी.एच.एम. एस के छात्रों की स्थिति का अंदाजा शायद बिहार विश्वविद्यालय को नहीं है. विश्वविद्यालय ना जाने किन कामो मे मग्न है कि छात्रों की परीक्षा भी समय पर नही ली गयी. छात्रों का कहना है कि उन्हें यूनिवर्सिटी का चक्कर लगाना पड़ता है तब जाकर परीक्षा होती है और परीक्षा हो जाये तब भी लापरवाही का हद ऐसा है कि साहब रिजल्ट निकालना तक भूल जाते है. विद्यार्थि कहते है कि फिर से उन्हें यूनिवर्सिटी का चक्कर लगाना पड़ता है तब जाकर कहीं परीक्षाफल प्रकाशित किया जाता है.

ऐसी ही एक होमियोपैथी के छात्र ने बताया कि बिहार विश्वविद्यालय के अन्तर्गत महाविद्यालय में पढ़ने वाले उन जैसे हजारों होम्योपैथी के छात्रों की स्थिति बेहद खराब हो गई है.

अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र इन छात्रों से 1- 1.5 वर्ष आगे हो चुके हैं, बिहार विश्वविद्यालय का ये रवैया देखकर छात्र ख़ुद को कोस रहे है कि उन्होंने बेकार ऐसे यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया जिन्हें छात्रों की सूद तक नही है.

राज्य के एक मात्र सरकारी और अन्य कई प्राइवेट होम्योपैथिक चिकित्सा संस्थान बी. आर. ए. बिहार विश्वविद्यालय मुज़फ़्फ़रपुर से संचालित हो रहे है, चिकित्सा प्रणाली का मानव जीवन मे महवपूर्ण स्थान होते हुए भी चिकित्सा के इस प्रणाली के प्रति ऐसा बरताव दुखदायी है.

छात्र कहते है कि होमियोपैथी आज भी चिकित्सा की दूसरी सबसे प्रमुख पद्धति घोषित है और असंख्य लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं, किसी विश्वविद्यालय के लिये तो ये गौरव की बात होनी चाहिए परन्तु मुज़फ्फरपुर स्तिथ बिहार विश्वविद्यालय के प्रशासन कानों में तेल डाल कर सो जाते है.

इस देश के हर विश्वविद्यालय में जहाँ भी होमियोपैथी (बी.एच.एम. एस) की पढ़ाई होती है वहां सभी जगह सेशन 2014-2019 का ईन्टर्नसिप पुरा हो गया है, यहाँ तक कि 2015-2020 का भी फाइनल परीक्षा परिणाम आ गया, परंतु बिहार विश्वविद्यालय मुज़फ़्फ़रपुर में अभी तक 2014 बैच( Final year) के साथ-साथ 2015,2016,2018 बैच का परीक्षा परिणाम तक नही आया है जबकि हमलोगों की परीक्षा फरवरी में ही ख़त्म हो गई थी.

बिहार विश्वविद्यालय के इस रवैया से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है, ये पूरे देश के छात्रों से 1-1.5 वर्ष पूर्ण रूप से पीछे हो गया है.

इस सेशन के छात्र बिहार के छात्रों से सीनियर हो चुके हैं, एक बार विश्वविद्यालय प्रसाशन खुद से सोच कर देखे छात्रों का भविष्य ऐसे में कितना मानसिक,आर्थिक प्रताड़ना हो रहा होगा.

बिहार विश्वविद्यालय मुज़फ्फरपुर का ये रवैया सिर्फ इसी कोर्स में नही है बल्कि कई कोर्सो में यह यूनिवर्सिटी छात्रों के जीवन से खेलती है यूनिवर्सिटी को तमाम खबरो से भी फर्क नही पड़ता ये कहना जायज़ होगा कि बिहार विश्वविद्यालय के प्रसाशन और कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय को भगवान भरोसे छोड़ दिया है ऐसे में छात्र दर दर की ठोकरें खा रहे है और ख़ुद को कोस रहे है.

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लॉ एंड आर्डर को लेकर सख्त हुए CM नीतीश, DGP और चीफ सेक्रेटरी के साथ की मीटिंग

Muzaffarpur Now

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज लॉ एंड आर्डर पर हाई लेवल मीटिंग की. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि सभी मुस्तैदी से काम करें. किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी.सीएम ने गड़बड़ी करने वाले लोगों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है.

कानून का राज स्थापित करें

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि हर हाल में अपराध पर नियंत्रण रखें. कोताही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई करें. कानून का सख्ती से पालन हो और अपराधियों में कानून का भय हो, यह सुनिश्चित करें. सीएम नीतीश ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी थाना क्षेत्र में रात में सघन गश्ती हो. मुख्यमंत्री ने वरीय अधिकारियों को कहा कि जहां गश्ती में लापरवाही बरती जाए संबंधित पदाधिकारी पर कड़ी कार्रवाई करें. वरीय पदाधिकारी स्वयं भी गश्ती करें तथा चेकिंग करें.

अब हर थाने में होगी सरकारी राशि

अधिकारियों के साथ मीटिंग में मुख्यमंत्री ने प्रत्येक थाने में स्टेशनरी और अन्य सामग्री के लिए रिवाल्विंग फंड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं. सीएम ने कहा कि ऐसा सिस्टम बनाएं कि थाने के अकाउंट में हमेशा राशि उपलब्ध रहे.

Input : News4Nation

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BIHAR

तेजस्वी पर बरसे मांझी, कहा- उन्हें नहीं कोई संवैधानिक जानकारी, नीतीश कुमार से मांगें माफी

Muzaffarpur Now

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पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सदन में जो किया वो सही नहीं है. मेरी तेजस्वी के प्रति अच्छी सोच थी लेकिन तेजस्वी को संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी नहीं है. तेजस्वी किसी काम के आदमी नहीं हैं, उन्हें नीतीश कुमार से माफी मांगनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में जो हुआ वह सभी ने देखा. जिस तरह से भाषाओं का प्रयोग किया गया वह कहीं से संवैधानिक नहीं था.

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी (Jitanram Manjhi) ने कहा कि 17वां सत्र था और कार्यकारी अध्यक्ष मुझे बनाया गया था. फिर प्रक्रिया को मैंने पूरा किया और विजय सिन्हा अध्यक्ष बने. सत्र छोटा था और राज्यपाल का अभिभाषण के बाद धन्यवाद ज्ञापन करने की बात थी. सारी बात सही चली, लेकिन अंतिम समय तेजस्वी यादव ने जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर मर्यादित टिप्पणी की उससे बात बिगड़ गई.

उन्होंने कहा कि जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने कहा था, वह सदन के पटल पर कुछ नहीं कहा था बल्कि एक सभा में कहा था लेकिन तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सदन में जिस तरह से बयान दिए वह अमर्यादित था. ऐसे मुद्दों को भी उठाया जिस पर कोर्ट का आदेश आना बाकी है.

जीतनराम मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार यदि कहें कि बच्चे के चाह में बच्चियां पैदा होती रहीं तो वह बड़े भाई-छोटे भाई का नाता है. वह कह सकते हैं. इस बात को तेजस्वी यादव का कहना कोई औचित्य नहीं है, लेकिन जिस तरह से तेजस्वी यादव ने कहा नीतीश कुमार का बेटा है कि नहीं या घृणित बात है.

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के प्रति मेरी अच्छी भावना थी, लेकिन कल से मेरे दिमाग में बात चल रही है. मेरी सोच गलत थी तेजस्वी यादव किसी कर्म के आदमी नहीं हैं. कोई संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी नहीं है. तेजस्वी यादव के पास कोई नॉलेज नहीं है. यह अमर्यादित घटना घटी है इसके लिए दुख व्यक्त करते हुए तेजस्वी यादव को माफी मांगना चाहिए.

नीतीश कुमार ने बाद में कहा कि हम लोगों में बड़े भाई-छोटे भाई का मामला है और हम लोग कुछ भी कह सकते हैं. तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार से माफी मांगनी चाहिए. अगर नहीं मांगते हैं तो यह लोकतंत्र की हत्या है.

वही, राबड़ी देवी के बयान पर मांझी ने राजनीतिक और व्यक्तिगत टिप्पणी पर कुछ भी कहने से इनकार किया और कहा कि जिस तरह से नीतीश कुमार ने मजाक किया है. उसी तरह से राबड़ी भी मजाक कर सकती हैं.

Source : Zee News

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BIHAR

राज्यसभा सांसद बन राष्ट्रीय राजनीति करेंगे सुशील मोदी, केंद्र में बन सकते हैं मंत्री!

Muzaffarpur Now

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बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से राज्यसभा का टिकट मिलने से उन्हें केंद्र में आगे बड़ी जिम्मेदारी मिलने के भी संकेत हैं. मोदी सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें मौका मिल सकता है. ऐसा भाजपा से जुड़े सूत्रों का भी कहना है. एनडीए के संख्या बल को देखते हुए सुशील कुमार मोदी का राज्यसभा सदस्य चुना जाना तय है.

बिहार की यह राज्यसभा सीट लोक जनशक्ति पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई है. पिछले साल एक समझौते के तहत भाजपा ने तत्कालीन एनडीए सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी को यह राज्यसभा सीट दी थी, तब राम विलास पासवान उच्च सदन पहुंचे थे. चूंकि बिहार चुनाव से पहले लोक जनशक्ति पार्टी ने एनडीए का साथ छोड़ दिया, इसलिए भाजपा ने पासवान के निधन से खाली हुई सीट से अपना उम्मीदवार उतारा है.

राज्यसभा सांसद बन राष्ट्रीय राजनीति करेंगे सुशील मोदी, केंद्र में बन सकते हैं मंत्री!

वर्ष 2005 से जब-जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में भाजपा और जदयू की सरकार बनी, तब सुशील कुमार मोदी उपमुख्यमंत्री बने. इस साल हुए विधानसभा चुनाव में बिहार में 125 सीटों के साथ बहुमत से एक बार फिर एनडीए की सरकार बनी, लेकिन उप मुख्यमंत्री पर सुशील कुमार मोदी की जगह दो डिप्टी सीएम चुने गए.

भाजपा की तरफ से तारकेश्वर प्रसाद और रेणु कुमारी उपमुख्यमंत्री बने. जिसके बाद भाजपा की तरफ से संकेत दिए जाने लगे कि सुशील कुमार मोदी को राज्य की राजनीति से अब केंद्र की राजनीति में शिफ्ट करने की तैयारी है.

बिहार की राजनीति से जुड़े भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, सुशील कुमार मोदी बिहार में भाजपा के एक बड़े चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. इस बार उप मुख्यमंत्री नहीं बने तो उनका सम्मानजनक समायोजन होना जरूरी है. ऐसे में राज्यसभा उन्हें पार्टी भेज रही है. अनुभव को देखते हुए आगे और बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. (इनपुट: IANS)

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