ठंड के इस मौसम में ‘अयोध्या’ ने पटना से दिल्ली तक गर्माहट ला दी है। मोर्चेबंदी चल रही है। राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) अयोध्या को दिल्ली शिफ्ट करना चाहता है। मगर, इस फैसले पर जानकार और पशु प्रेमी सवाल उठा रहे हैं। अयोध्या के जाने से पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में करोड़ों की लागत से बने ब्रीडिंग सेंटर पर भी खतरा मंडरा रहा है। खुद सीजेडए के पूर्व सदस्य सचिव ने भी इसे लेकर मोर्चा खोल दिया है।

दरअसल, दिल्ली के चिड़ियाघर की कोशिश किसी तरह पटना के चिड़ियाघर से अयोध्या नाम के नर गैंडे को ले जाने की है। मगर इसे लेकर पर्यावरण प्रेमी अजय कुमार ने सवाल उठाते हुए इसे लेकर आपत्ति दर्ज कराई। राज्य सरकार को भी शिकायत की। असल में 2015 में पटना और दिल्ली के चिड़ियाघर प्रबंधन के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत पटना जू से एक नर गैंडा दिल्ली भेजना था। बदले में दिल्ली से एक नर गैंडा और तीन शंघाई हिरन यहां भेजे जाने थे। तब से इस प्रस्ताव में कई बार बदलाव हुआ। मगर, अब जो ताजा प्रस्ताव है, उसमें बदले में मादा गैंडा देने की बात ही शामिल नहीं है।

विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस मामले में कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सरकार को असल स्थिति बताई ही नहीं है। आपके अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। फिर इसे लेकर गहमागहमी शुरू हुई। राज्य सरकार इस मामले पर अब गंभीरता से विचार कर रही है। जल्द इसे लेकर एक प्रस्ताव सीजेडए को भेजने की तैयारी है। सूत्रों की मानें ‘अयोध्या’ को भेजने के बदले में अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

सीजेडए के पूर्व अधिकारी ने उठाए सवाल
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली के पूर्व सदस्य सचिव डीएन सिंह ने ‘अयोध्या’ को दिल्ली भेजने के फैसले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि बिहार के पास देश का अकेला सफल ब्रीडिंग सेंटर है। ‘अयोध्या’ ही फिलहाल यहां ऐसा गैंडा है, जो कई मादाओं के साथ मैटिंग के लिए सहज है। आरोप लगाया है कि दिल्ली जू की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। कहा कि अब पटना के चिड़ियाघर को क्यों बर्बाद करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे सही स्थिति सरकार को बताएं। वैसे भी नियम है कि ब्रीडिंग पेयर को कभी भी एक्सचेंज में नहीं दिया जाता है।
Source : Hindustan


