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आधार नियम संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, अब संसद में होगा पेश

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मंत्रिमंडल ने बैंक खाता खोलने तथा मोबाइल फोन कनेक्शन लेने के लिये आधार के स्वैच्छिक उपयोग की अनुमति देने को लेकर बुधवार को एक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इस संशोधन के बाद किसी अन्य कानून की बाध्यता नहीं होने पर व्‍यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिये आधार देने के लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकेगा।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में ‘आधार तथा अन्य कानूनों में (संशोधन) के विधेयक, 2019’ को मंजूरी दी गयी। इसमें नियमों के उल्लंघन पर कड़ा जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

इस संशोधन विधेयक को संसद के 17 जून से शुरू सत्र में पेश किया जाएगा

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यह विधेयक आधार कानून 2016 तथा अन्य कानून में संशोधन के रूप में होगा और मार्च 2019 में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। इस संशोधन विधेयक को संसद के 17 जून से शुरू सत्र में पेश किया जाएगा। संशोधन में आधार कानून के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर इकाइयों पर एक करोड़ रुपये तक का दिवानी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया गया है। अगर लगातार नियमों का अनुपालन नहीं किया जाता है तो प्रतिदिन 10 लाख रुपए तक के अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। आधार के लिए अनुरोध करने वाली इकाइयों या भौतिक रूप से सत्यापन के मामले में आधार का अनाधिकृत उपयोग दंडनीय है। इसके लिये 10,000 रुपए तक के जुर्माने के साथ तीन साल तक कारावास का प्रावधान है। कंपनी के मामले में यह र्जुमाना 1 लाख रुपये तक है। अनाधिकृत तरीके से सेंट्रल आइडेन्टिटीज डोटा रिपोजिटीरी’ तक पहुंच के साथ डाटा से छोड़छाड़ के लिये मौजूदा तीन साल से 10-10 साल की सजा का प्रावधान है।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘इस निर्णय से यूआईडीएआई (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) लोगों के हितों के अनुरूप एक मजबूत प्रणाली बनाने में सक्षम होगा और इससे आधार के दुरुपयोग को कम करने में सहायता मिलेगी। इस संशोधन के बाद यदि संसद द्वारा पारित किसी कानून की बाध्‍यता न हो तो किसी व्‍यक्ति को अपनी पहचान साबित करने हेतु आधार नम्‍बर प्रस्‍तुत करने के लिए बाध्‍य नहीं किया जा सकेगा।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘प्रस्‍तावित संशोधन लोगों की सुविधा के लिये बैंक खाते खुलवाने में आधार के उपयोग को मान्‍यता देता है परंतु बैंक को आधार नम्‍बर देना स्‍वैच्छिक होगा। टे‍लीग्राफ अधिनियम, 1885 तथा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के त‍हत बैंक इसे केवाईसी दस्‍तावेज के रूप में स्‍वीकार कर सकते हैं।’’ इसका मतलब है कि इसमें बैंक खाता खोलने तथा मोबाइल फोन कनेक्शन लेने के लिये सत्यापन और पहचान पत्र के रूप में आधार के स्वैच्छिक उपयोग की अनुमति होगी।

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केवल संस्‍थानों को सत्‍यापन करने की अनुमति दी गयी है

विज्ञप्ति के अनुसार इस निर्णय से आधार, लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक और उपयोगी सिद्ध होगा। प्रस्‍तावित संशोधन राष्‍ट्रपति द्वारा 2 मार्च, 2019 को घोषित अध्‍यादेश के प्रावधानों के अनुरूप है। प्रस्तावित बदलाव के तहत व्‍यक्ति स्‍वेच्‍छा से प्रमाणन या सत्‍यापन के लिए भौतिक रूप से अथवा इलेक्‍ट्रानिक रूप में आधार नम्‍बर का उपयोग कर सकता है। इसमें आधार के वैकल्पिक वर्चुअल पहचान के उपयोग की सुविधा दी गयी है ताकि व्‍यक्ति के वास्‍तविक आधार नम्‍बर को गुप्‍त रखा जा सके।

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विज्ञप्ति के अनुसार इसमें केवल संस्‍थानों को सत्‍यापन करने की अनुमति दी गयी है बशर्ते वे प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्‍ट निजता और सुरक्षा के मानकों का अनुपालत करते है। इसके तहत किसी व्यक्ति को अपनी पहचान के लिए अपने पास आधार नंबर होने का प्रमाण देने या उस काम के लिए आधार सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने लिए विवश नहीं किया जा सकता जब तक कि संसद द्वारा पारित किसी कानून में ऐसा कोई प्रावधान हो। संशोधन विधेयक में निजी संस्‍थानों द्वारा आधार के उपयोग से संबंधित आधार अधिनियम की धारा 57 को हटाने का प्रस्‍ताव है। यदि आधार नम्‍बर का सत्‍यापन नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में भी किसी व्‍यक्ति को सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता। साथ ही इसमें· भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण कोष स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है।

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BIHAR

चुपके से आई यूपी की पुलिस टीम, बिहार से ले गई तीन युवकों को

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यूपी के लखनऊ में एक हत्याकांड में संलिप्तता पाए जाने के बाद एसआइटी (यूपी) की टीम ने बड़हरिया थाना क्षेत्र के अटखंबा गांव में शनिवार की सुबह तीन युवकों को गुपचुप तरीके से दबोच लिया और उन्हें अपने साथ लेकर यूपी चली गई। एसआइटी टीम में एक जवान पुलिस के वेश में था जबकि शेष सादे लिबास में थे। तीनों युवकों को हिरासत में लेकर जाने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म था। वहीं स्वजन इस मामले में पुलिस कुछ भी नहीं बताए जाने को लेकर चिंतित हो गए।

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यूपी की एसआइटी टीम आई थी बिहार

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मामले में एसपी शैलेश कुमार सिन्हा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यूपी की एसआइटी टीम ने संपर्क किया था तीनों युवकों को पूछताछ के लिए टीम अपने साथ हिरासत में लेकर गई है। इधर घटना की सूचना जैसे ही बड़हरिया थानाध्यक्ष को हुई वह मौके पर पहुंचा कर जांच में जुट गए। गांव में लगे सीसी कैमरा की मदद से उन्होंने सभी की पहचान की। थानाध्यक्ष ने बताया कि बड़हरिया थाना क्षेत्र के अटखंमबा गांव के तीन लड़कों को सिविल ड्रेस में आई यूपी पुलिस अपने साथ लेकर चली गई। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि पांच लोग सिविल ड्रेस में और एक पुलिस की वर्दी में थे। प्रारंभिक जानकारी मिली है कि लखनऊ में कुछ माह पहले किसी की हत्या हुई थी और उसी संदर्भ में तीनों की संलिप्तता पाई गई है। इसमे दो सगे भाई भी शामिल हैं। यूपी पुलिस ने जिन तीन युवकों को उठाया है उसमें मंजर इकबाल, काशिफ हसन व सरफराज अहमद शामिल है।

यूपी एसआइटी टीम ने पहले मंजर को पकड़ा

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थानाध्यक्ष ने बताया कि फुटेज देखने से यह प्रतीत हो रहा था कि सभी यूपी की एसआइटी टीम के सदस्य थे। टीम ने पहले मंजर को पकड़ा इसके बाद सौ मीटर की दूरी पर मौजूद दोनों भाई काशिफ एवं सरफराज को पकड़ा लिया। दोनों भाई अलीगढ़ में हाफिज की पढ़ाई करते थे। लाकडाउन के समय से सिवान में थे। वहीं मंजर नोएडा में बीटेक करता है। चार दिन पूर्व सिवान आया था। बताया कि दोनों भाई पर अलीगढ़ में केस भी है। कहते हैं अधिकारी मामले में पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार सिन्हा बताया कि लखनऊ पुलिस आई थी। उन तीनों को लखनऊ के किसी मर्डर केस के सिलसिले में संलिप्तता पाए जाने पर अपने साथ लेकर गई है।

Source : Dainik Jagran

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INDIA

1 जुलाई से नहीं लागू हो रहे नए श्रम कानून, करना होगा और इंतजार

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अटकलों के उलट नए श्रम कानून 1 जुलाई से लागू नहीं हो रहे हैं. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा है कि नए कानूनों के 4 कोड, औद्योगिक विवाद, सामाजिक सुरक्षा, वेतन और पेशेवर सुरक्षा, पर अभी मंथन चल रहा है. बता दें कि केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को 4 कोड में समाहित कर दिया है.

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह ढांचागत बदलाव हैं और मंत्रालय श्रम कल्याण व व्यापार की सुगमता में संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय राज्यों, उद्योगों व अन्य हितधारकों के साथ बातचीत कर रहा है और अभी तक की वार्ता अच्छी रही है. बकौल अधिकारी, लेकिन 1 जुलाई को कोड नहीं लागू होने वाले हैं.

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मंत्रालय करेगा औपचारिक घोषणा

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि एक बार सारी चीजें तय होने के बाद मंत्रालय औपचारिक घोषणा करेगा, लेकिन निकट भविष्य में इससे आसार कम हैं. बता दें कि संसद ने वेतन संबंधी कोड को 2019 में और अन्य 3 कोड्स को 2020 में पारित कर दिया था, लेकिन अभी इनमें से किसी को भी लागू नहीं किया है.

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नए कोड्स से क्या बदलेगा

इनका नियोक्ता और कर्मचारी दोनों पर बड़ा प्रभाव होगा. कंपनियों के लोगों को भर्ती करना और निकालना और आसान हो जाएगा. इसके अलावा औद्योगिक हड़तालें करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. नया राष्ट्रीय वेतन नियम लागू होगा जिससे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सोशल सिक्योरिटी के घेरे में लाया जाएगा. साथ ही वेतन की परिभाषा बदलेगी और संभवत: आपके हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा. जबकि रिटारयमेंट के लिए बचाई जाने वाली सेविंग्स बच जाएंगी. इस बिंदु का उद्यमी व नियोक्ता विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है.

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इसके अलावा नए कोड्स में साप्ताहिक काम के घंटों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन डेली वर्किंग आवर्स में चेंज हो सकता है. अगर कर्मचारी और नियोक्ता चाहें तो एक दिन में 12 घंटे काम के साथ हफ्ते में 4 दिन वर्किंग रख सकते हैं और 3 दिन का वीक ऑफ दे सकते हैं.

क्या है उद्योगों का रुख

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एक सर्वे के अनुसार, 64 फीसदी कंपनियां मान रही हैं कि इन बदलावों से उनके मुनाफे-घाटे पर सीधा असर होगा. एडवाइजरी फर्म विलिस टावर्स वॉट्सन के इस सर्वे के मुताबिक, कम से कम 71 फीसदी कंपनियों ने इसके प्रभावों का आकलन करने के लिए कदम उठाए हैं. हालांकि, 34 फीसदी कंपनियां नए वेतन कोड के संदर्भ में किसी तरह के बदलाव को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. 53 फीसदी कंपनियां रिटायरमेंट की आयु और लंबी अवधि में दिए जाने वाले बेनेफिट्स की समीक्षा पर विचार कर रही हैं.

Source : News18

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पैगंबर पर टिप्पणी के लिए नूपुर शर्मा को टीवी पर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

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पैगंबर पर टिप्पणी मामले में बीजेपी से निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा को पूरे देश से माफी मांगने के लिए कहा है. साथ ही कोर्ट ने केस ट्रांसफर करने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट जाने के लिए कहा है.

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शुक्रवार को नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर को लेकर की गई टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की. नूपुर की ट्रांसफर अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी टिप्पणी ने देश भर में लोगो की भावनाओं को भड़का दिया है. आज जो कुछ देश में हो रहा है, उसके लिए वो जिम्मेदार हैं.

कोर्ट ने कहा कि हमने डिबेट को देखा है, उसको भड़काने की कोशिश की. लेकिन उसके बाद उन्होंने जो कुछ कहा, वो और ज्यादा शर्मनाक है.नूपुर शर्मा और उनकी हल्की जबान ने पूरे देश में आग लगा दी है. वो उदयपुर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए जिम्मेदार हैं.

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वकील ने जब उनकी क्षमायाचना और पैगंबर पर की गई टिप्पणियों को विनम्रता के साथ वापस लेने की दुहाई दी तो पीठ ने कहा कि वापस लेने में बहुत देर हो चुकी थी. SC ने कहा कि उनकी शिकायत पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. लेकिन कई FIR के बावजूद उन्हें अभी तक दिल्ली पुलिस ने उनको छुआ तक नहीं है.

बता दें कि नूपुर शर्मा बीजेपी की प्रवक्ता रही हैं. उन्होंने हाल ही में एक टीवी डिबेट में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की थी. इसका काफी विरोध हुआ था. यहां तक कि कुवैत, यूएई, कतर समेत तमाम मुस्लिम देशों ने उनके बयान की आलोचना की थी. इसके बाद बीजेपी ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था.

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नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद की टिप्पणी को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुआ था. इतना ही नहीं महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में उनके खिलाफ मामले भी दर्ज कराए गए हैं. वहीं, नूपुर शर्मा ने सभी मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट जाने के लिए है.

Source : Aaj Tak

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