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कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में तो जमीन खरीद सकता है लेकिन लद्दाख में नहीं, जानिए वजह

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मंगलवार को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में बड़ा संशोधन करते हुए नए भूमि कानून (Land Laws for Jammu Kashmir) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया. इस नोटिफिकेशन के बाद कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में जमीन की खरीद-फरोख्त कर सकता है हालांकि अभी लद्धाख (Ladakh) में ऐसा संभव नहीं होगा.

12-Day Ladakh, India (5th Edition) - Angkor Travel Photography

11 राज्यों के लिए है विशेष प्रावधान

गृह मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून तत्काल प्रभाव से लागू होता है लेकिन लद्दाख में अभी यह लागू नहीं किया गया है. इसकी वजह है, लद्दाख के नता और सरकार के बीच पिछले महीने हुई बातचीत. इस दौरान LAC पर भारत-चीन टकराव को देखते हुए अनुच्छेद 371 या छठी अनुसूची की मांग की गई. अनुच्छेद 371 में छह पूर्वोत्तर राज्यों सहित कुल 11 राज्यों के लिए विशेष प्रावधान हैं, ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके. लद्दाखी नेताओं ने कहा है कि उनकी 90 प्रतिशत आबादी आदिवासी है इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा करनी होगी.

Images of Ladakh in Winter — India's ultimate landscape photography  experience! | by Arun Bhat | Medium

केंद्र ने दिया आश्वासन

इसी तरह के प्रावधान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले से लागू हैं. इन राज्यों में अन्य राज्यों के लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर प्रतिबंध हैं. इन मागों पर भाजपा नेताओं ने भी सहमति दी. साथ ही ऐसा न करने पर LAHDC चुनावों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी गई थी. दिल्ली में भाजपा नेताओं द्वारा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और जी किशन रेड्डी सहित वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद स्थानीय नेताओं को आश्वस्त किया गया कि उनकी मांगें मानीं जाएंगी. इसके बाद LAHDC में भाजपा की जीत हुई और 26 में से 15 सीटें हासिल कीं जबकि कांग्रेस ने केवल नौ सीटें जीतीं.

Source : Zee News

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पीएम मोदी की समीक्षा के तुरंत बाद SII प्रमुख ने दी खुशखबरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुणे में कोरोना वायरस की वैक्सीन की समीक्षा किए जाने के बाद सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के प्रमुख अदार पूनावाला ने कहा कि जुलाई तक केंद्र सरकार 30-40 करोड़ डोज खरीद सकती है। पूनावाला ने बताया कि पीएम मोदी को पहले से ही वैक्सीन की काफी जानकारी थी। उन्होंने कोरोना वैक्सीन को खुशखबरी देते हुए कहा कि सबसे पहले यह भारत के लिए उपलब्ध करवाई जाएगी।

एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा, ”अब तक, हमारे पास भारत सरकार की ओर से लिखित में कुछ भी नहीं है कि वे कितनी खुराक खरीदेंगे लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि जुलाई, 2021 तक सरकार 30-40 करोड़ डोज खरीद सकती है।” पूनावाला ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट आने वाले दो हफ्तों में कोविशील्ड के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में है।

पीएम मोदी के दौरे के बाद अदार पूनावाला ने कहा, ”वैक्सीन सबसे पहले भारत में उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके बाद, कोवैक्स देश जोकि मुख्य तौर पर अफ्रीका में हैं, वहां दी जाएगी। ब्रिटेन और यूरोपीय बाजार की देख-रेख एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड करेगा। हमारी प्राथमिकता भारत और कोवैक्स देश हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हमने पुणे में महामारी स्तर की सबसे बड़ी सुविधा केंद्र और मांडरी में अपने नए परिसर का निर्माण किया है। पीएम को इस यात्रा के दौरान इस बारे में भी जानकारी दी गई और विस्तृत रूप से चर्चाएं हुईं।

मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के टीके के विकास कार्य की समीक्षा के लिए शनिवार को अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा किया है। सबसे आखिरी में पीएम मोदी ने एसआईआई का दौरा किया। एक अधिकारी ने बताया कि मोदी के एसआईआई दौरे का उद्देश्य कोरोना वायरस के लिए टीके की प्रगति की समीक्षा करना है और इसके लॉन्च के समय, प्रोडक्शन और वितरण व्यवस्था का जायजा लेना था।


पीएम के दौरे के बाद क्या बोला PMO?

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा कि दिन भर के दौरे का उद्देश्य नागरिकों के टीकाकरण में भारत के प्रयासों में आने वाली चुनौतियों, तैयारियों और रोडमैप जैसे पहलुओं की जानकारी हासिल करना था। वहीं, पीएम मोदी ने जाइडस पार्क का दौरा करने के बाद ट्वीट किया, ”अहमदाबाद में जाइडस बायोटेक पार्क का दौरा किया और जाइडस कैडिला द्वारा विकसित किए जा रहे डीएनए आधारित स्वदेशी टीके के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। मैंने इस कार्य में लगी टीम के प्रयासों के लिए उसकी सराहना की। भारत सरकार इस यात्रा में उनका सहयोग करने के लिए उनके साथ सक्रियता से काम कर रही है।”

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ SII ने की पार्टनरशिप

कोरोना वैक्सीन के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैश्विक दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ पार्टनरशिप की है। कोविड-19 महामारी के टीके के तीसरे चरण के परीक्षण के अंतरिम परिणाम हाल ही में जारी किए गए हैं। शुरुआती संकेतों से लगता है कि यह टीका बिना लक्षण वाले संक्रमण के मामलों में वायरस के प्रसार को कम कर सकता है। दो ट्रायल के संयुक्त विश्लेषण के आधार पर टीका औसतन 70 फीसदी प्रभावी रहा है। भारत में इस टीके को कोविशील्ड नाम दिया गया है।

Source : Hindustan

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किसान आंदोलन पर बोले गृह मंत्री अमित शाह- ‘सरकार हर मांग पर विचार को तैयार’

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कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को गृह मंत्री अमित शाह ने संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि किसानों की हर समस्या और मांग पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार तैयार है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 3 दिसंबर को चर्चा करने के लिए बुलाया है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)

अमित शाह ने कहा कि पंजाब की सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर रोड पर अलग-अलग किसान यूनियन की अपील पर आज जो किसान भाई अपना आंदोलन कर रहे हैं, उन सभी से मैं अपील करना चाहता हूं कि भारत सरकार आपसे चर्चा के लिए तैयार है.

बता दें कि किसान सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. वे सड़क पर उतरे हैं. पंजाब की सीमा से लेकर दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर उनका आंदोलन जारी है. किसानों की मांग है कि उन्हें जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी जाए. लेकिन सरकार उन्हें दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी ग्राउंड पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी है. किसान इसपर राजी नहीं हैं. वे सिंधु बॉर्डर पर डटे हैं.

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तृणमूल में लगातार तेज हो रहे बगावती स्वर, प्रशांत किशोर के खिलाफ नाराजगी

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बंगाल में कुछ माह बाद ही विधानसभा चुनाव होना है, लेकिन तृणमूल के भीतर बगावती स्वर तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में जिस तरह से एक बाद एक विधायक व मंत्री अपनी नाराजगी जता रहे हैं यह शुभ संकेत नहीं है। तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मंत्री धीरे-धीरे बगावत पर उतर रहे हैं, लेकिन ममता के लिए सबसे तगड़ा झटका उनके भरोसेमंद और आंदोलन के दिनों के सहयोगी शुभेंदु अधिकारी का इस्तीफा है। सिर्फ अधिकारी ही नहीं उनके अलावे कई और ऐसे नेता व विधायक हैं जो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के पार्टी के भीतर हस्तक्षेप को लेकर मुखर हो रहे हैं। यही नहीं सत्तारूढ़ दल में मची उठापटक के पीछे सिर्फ पीके ही नहीं बल्कि तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को वजह माना जा रहा है।

पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं तृणमूल के कई नेता

तृणमूल के कई नेता पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं। बता दें कि दिल्ली विधानसभा और आंध्र प्रदेश समेत कई चुनाव में जीत के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले पीके को ममता व अभिषेक ने पिछले साल ही बंगाल चुनाव में तृणमूल का कामकाज देखने के लिए हायर किया है। प्रशांत किशोर की एजेंसी आई-पैक पिछले वर्ष जुलाई से तृणमूल के लिए काम कर रही है लेकिन अब जो खबरें आ रही हैं उससे पीके ममता की उम्मीदों को ठेस पहुंचने की आशंका है। क्योंकि, पीके की रणनीति के तहत इस वर्ष जुलाई में ममता ने संगठन में भारी फेरबदल किया था। इसके बाद से ही नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कई विधायक जता चुके हैं अपनी नाराजगी

पिछले दिनों मुर्शिदाबाद से तृणमूल विधायक नियामत शेख ने एक जनसभा में प्रशांत किशोर का खुलेआम विरोध करते हुए कहा था, क्या हमें उनसे (पीके) राजनीति समझने की जरूरत है? कौन है वह? अगर बंगाल में तृणमूल को नुकसान पहुंचा तो पीके उसकी वजह होंगे। यही नहीं कूचबिहार से तृणमूल विधायक मिहिर गोस्वामी ने भी प्रशांत किशोर पर आपत्ति जताते हुए फेसबुक पर कई पोस्ट किए। उन्होंने पीके पर निशाना साधते हुए लिखा, क्या तृणमूल अभी भी वाकई ममता बनर्जी की पार्टी है? ऐसा लगता है कि पार्टी को किसी ठेकेदार को दे दिया गया है। शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया तथा नई दिल्ली जाकर भाजपा का दामन थाम लिया।

पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं तृणमूल के कई नेता

बैरकपुर विधानसभा से तृणमूल विधायक शीलभद्र दत्त ने पीके की एजेंसी पर हमला बोलते हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है। दत्ता ने कहा है कि एक बाहरी एजेंसी उन्हें सिखा रही है कि राजनीति कैसे करें। यही नहीं मंत्री रबींद्रनाथ भट्टाचार्य ने हुगली के सिंगुर के विधायक बेचाराम मन्ना से नाराज होकर इस्तीफा देने की बात कह दी थी। वहीं मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी भी तृणमूल नेता अनुव्रत मंडल से नाराज हैंं।

Source : Dainik Jagran

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