कोरोना (CoronaVirus) लॉकडाउन (Lockdown) में कोटा (Kota) में फंसे अपने करीब 5500 छात्रों को उत्तर प्रदेश (UP) की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Aditya Nath Government) बसें भेजकर वापस बुला रही है। इसके बाद अब बिहार की नीतीश सरकार (Nitish Government) पर भी वहां से अपने छात्रों को बुलाने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री (CM) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) इससे पहले ही इन्कार कर चुके हैं। अब ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (Shrawan Kumar) ने कहा है कि सरकार छात्रों को जहां फंसे हैं, वहीं सुविधाएं पहुंचाएगी। छात्र व उनके अभिभावक धैर्य बनाए रखें।

इस मसले पर मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि लॉकडाउन के दौरान बाहर से किसी को बुलाना संभव नहीं। इससे फिजिकल डिस्टेंसिंग (Physical Distancing) की अवहेलना होगी। उन्होंने कोटा से बिहारी छत्रों को बुलाने के यूपी सरकार के फैसले पर भी आपत्ति दर्ज की।
मंत्री बोले- वापस बुलाने से होगा फिजिकल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन
इसके बाद अब बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने भी कहा है कि छात्रों को उनके स्थान पर ही सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। आपदा की इस घड़ी में सभी लोग धैर्य से काम लें। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी कहा कि छात्रों को वापस बुलाने से फिजिकल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि यह मुश्किल फैसला है, लेकिन हालात को देखते हुए जरूरी है कि छात्र वहीं रहें, जहां हैं।
कोटा में फंसे देशभर के 30 हजार छात्रों में 6500 बिहारी
विदित हो कि लॉकडाउन के बाद कोटा में देश के विभिन्न भागों के करीब 30 हजार छात्र फंस गए हैं। वे यहां मेडिकल व इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं (Medical and Engineering Entrance Tests) की तैयारी करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक वहां बिहार के करीब 6500 छात्र फंसे हुए हैं। वहां कोरोना का संक्रमण फैलने के कारण इन छात्रों के अभिभावक चिंता में हैं। हालांकि, कोचिंग संस्थान वाले इलाके कोरोना संक्रमण से दूर हैं।
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