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कोरोना गांव की कहानी, ग्रामीणों ने बयां किया दर्द; बोले- गांव का नाम सुनते ही हमसे दूरी बना लेते हैं लोग

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जानलेवा कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में दहशत का माहौल है। राज्‍यों में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन कर दिया गया है। हर तरफ बंदी होने से जनता को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इन सबके बीच, उत्‍तर प्रदेश के सीतापुर में एक गांव अनोखी समस्‍या से परेशान है।

दरअसल इस गांव का नाम है कोरोना। गांव वालों का कहना है कि जब से कोरोना वायरस का प्रकोप फैला है, उन्‍हें लगातार भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोग तो उनका मजाक उड़ाने से भी पीछे हट नहीं रहे हैं।

राजधानी लखनऊ से करीब 100 किमी दूर स्थित कोरोना गांव के निवासियों के लिए यह समय काफी कठिन बीत रहा है। उन्‍होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि अपने गांव के नाम की वजह से कभी उपहास का पात्र बनना पड़ेगा। एक ग्रामीण राजन बताते हैं, ‘जब हम लोगों को बताते हैं कि हम कोरोना से हैं, तो वे हमसे बचते हैं और दूर रहने के लिए कहते हैं। वे यह नहीं समझते कि कोरोना एक गांव है ना कि जानलेवा वायरस से संक्रमित कोई शख्‍स।’

यूपी में कोरोना के 69, देश भर में 979 मामले

गौरतलब है कि उत्‍तर प्रदेश में कोरोना वायरस के अबतक 69 मामले सामने आ चुके हैं। राहत की बात यह है कि यहां अभी एक भी मौत का केस सामने नहीं आया है। वहीं, पूरे देश में कुल 979 मामले हैं, जिनमें 48 विदेशी शामिल हैं। इस बीमारी से 87 लोग ठीक हो गए हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। भारत सरकार की तरफ से लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए कई कदम भी उठाए गए हैं।

आपको बता दें कि लॉकडाउन का पालन कराने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने राज्‍यों को सख्‍त निर्देश दिए हैं। सभी राज्यों और जिलों की सीमाएं सील कर बाहर से आने वाले लोगों को सीमाओं पर स्थित कैंपों में रखने के लिए कहा गया है। ऐसा ना होने पाने पर डीएम और एसपी को जिम्‍मेदार माना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आदेश नहीं मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

Input : NBT Hindi

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वोटरों को सबसे अधिक याद रहा एमएस धौनी का संदेश, बिहार में बाकी आईकॉन पीछे

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चुनाव आयोग के कैप सर्वे में एक और रोचक बात सामने आयी है। गत आम चुनाव में आयोग ने सात राष्ट्रीय आईकॉन बनाये थे। लेकिन सर्वे में शामिल लोगों को एमएस धौनी का संदेश ही सबसे अधिक याद रहा। सबसे अधिक 34.4 फीसदी लोगों ने एमएस धौनी को सबसे लोकप्रिय आईकॉन बताया।

9.2 फीसदी लोगों ने मैरीकॉम, 11.5 फीसदी लोगों ने सानिया नेहवाल, 25.8 फीसदी ने आमिर खान, 1.5 फीसदी ने अमिताभ बच्चन, 0.3 फीसदी ने शारदा सिन्हा, 0.2 फीसदी ने विराट कोहली को प्रभावशाली बताया जबकि 0.4 फीसदी ने अन्य के नाम बताये।

24 फीसदी लोगों को वोटर रजिस्ट्रेशन में रुचि नहीं

सर्वे में 24 फीसदी लोग ऐसे मिले जिन्हें वोटर आईकार्ड बनवाने में कोई रुचि ही नहीं है। सर्वे में शामिल व वोटर आईकार्ड से वंचित 43 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें वोटर आईकार्ड बनाने की प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं है। 22.4 फीसदी ने कहा कि प्रक्रिया इतनी जटिल है कि वे नहीं बनवा पाये वहीं 9.8 फीसदी वोटर आईकार्ड से वंचित लोगों ने कहा कि उनके पास आवासीय प्रमाण पत्र नहीं है, जिसके कारण उनका वोटर आईकार्ड नहीं बन पाया।

आम चुनाव में 24 फीसदी वोटर थे शहर से बाहर

सर्वे में शामिल वोट न करने वाले 37.4 फीसदी वोटर ने बताया कि वोटरलिस्ट से उनका नाम ही गायब था, जिस कारण वे वोट नहीं कर पाये। वहीं 24.2 फीसदी लोगों ने बताया कि चुनाव के दौरान वे शहर से बाहर होने के कारण वोट देने से वंचित रह गए। दो फीसदी लोगों ने बताया कि उन्हें बूथ के बारे में जानकारी नहीं मिल पायी जबकि तीन फीसदी लोगों ने कहा कि बूथ अधिक दूर होने के कारण वे वोट करने नहीं गए। सात फीसदी लोगों ने कहा कि असुरक्षित महसूस करने के कारण वे बूथ पर वोट देने नहीं गए। वहीं 12 फीसदी लोगों ने इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया।

55 फीसदी वोटरों को नोटा की जानकारी नहीं

सर्वे में यह बात भी सामने आई की गत आमचुनाव में शामिल 55 फीसदी लोगों को नोटा विकल्प की जानकारी नहीं थी। 24.8 फीसदी लोगों ने बताया कि जब वे वोट कर रहे थे, उन्होंने नोटा विकल्प को देखा,वहीं 16 फीसदी लोगों ने कहा कि वे नोटा वोट के बारे में पढ़े हैं और उन्हें इसकी जानकारी है। वहीं वीवी पैट के बारे में भी नकारात्म जानकारी मतदाताओं ने दी। 49.3 फीसदी लोगों ने कहा कि वोट करने के बाद वे वीवी पैट देखने के लिए नहीं रुके, 36.8 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने वीवी पैट में देखा की वोट किसे पड़ा है। 13 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में कहीं पढ़ा व सुना है।

Input : Hindustan

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एक मैडम ने उठाया एक करोड़ वेतन, एकसाथ 25 स्कूलों में कर रही थी नौकरी, गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश : एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. दरअसल पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. एक शिक्षिका को अरेस्ट किया गया है, जो एकसाथ 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ा रही थी. इस महिला ने अब तक करोड़ रुपये वेतन उठाया है. पुलिस इस शिक्षिका को अरेस्ट कर पूछताछ कर रही है.

मामला बागपत जिले का है. जहां 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ा रही एक सरकारी टीचर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी मैडम की पहचान अनामिका शुक्ला के रूप में की गई है. यह महिला एकसाथ 25 स्कूलों में फर्जी तरीके से नौकरी करने के मामले में सुर्खियों में छाई हुई है. अनामिका शुक्ला जिले के कस्तूरबा विद्यालय फरीदपुर में विज्ञान की शिक्षिका के रूप में पढ़ा रही थी.

कासगंज पुलिस ने आरोपी शिक्षिका को अरेस्ट किया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. बताया जा रहा है कि बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर जिले में अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका की तलाश की गई तो कस्तूरबा विद्यालय में यह शिक्षिका पाई गई. एक दिन पहले ही शिक्षिका के वेतन आहरण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया गया था. यह नोटिस व्हाट्सएप पर भेजा गया था.

शुक्रवार की शाम शिक्षिका ने इस नोटिस को देखा तो शनिवार सुबह को वो अपना इस्तीफा देने बीएसए दफ्तर के बाहर पहुंची थी. उन्होंने एक लड़के के माध्यम से इस्तीफा को भेजा था. जब युवक से शिक्षिका के बारे में पूछताछ की तो उसने बताया कि अनामिका शुक्ला बाहर सड़क पर खड़ी हैं. इस पर बीएसए अंजली अग्रवाल ने सोरों पुलिस को मामले की जानकारी दी और कार्यालय के स्टाफ के माध्यम से घेराबंदी कर उसे अरेस्ट कर लिया गया.

कोतवाली प्रभारी रिपुदमन सिंह ने बताया कि शिक्षिका अनामिका शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है. बीएसए ने शिक्षिका के खिलाफ तहरीर दी है. आपको बता दें कि अनामिका को बीते 13 महीने में 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में करीब कुल एक करोड़ रुपये के मानदेय का भुगतान किया गया है. सभी 25 केजीबीवी से मानदेय एक ही बैंक खाते में गया है, या अलग-अलग खातों में भुगतान किया गया, इसकी जांच की जा रही है.

Input : First Bihar

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घर बैठे मोबाइल से बनाएं किसान क्रेडिट कार्ड, ये है पूरी प्रक्रिया

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कोरोना संकट काल में देश की अर्थव्यस्था का बहुत बुरा हाल है. व्यापारी,मजदूर,किसान हर कोई प्रभावित हुआ है. सरकार सभी प्रभावितों को किसी ना किसी तरह से सहायता प्रदान करने की कोशिश कर रही है. केंद्र और राज्य सरकारें इस संकट के समय पहले से चली आ रही योजनाओं के अंतर्गत सभी लोगों को सहायता प्रदान कर ही है. हमारे किसान भाईयों को भी किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत सस्ती दरों पर लोन मिल सकता है. खेती से जुड़ा कोई भी व्यक्ति किसान क्रेडिट कार्ड बनवा सकता है. यदि आपके पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है तो आप नीचे दिए गए सरल तरीके से आवेदन कर लाभ उठा सकते है.

घर बैठे-बैठे आप मोबाइल फोन से आवेदन कर सकते हैं

आप अपने मोबाइल में  इंटरनेट पर जाकर सर्च इंजन में  https://eseva.csccloud.in/KCC/Default.aspx टाइप करें. इस लिंक को टाइप करते ही कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट खुल जाएगी इसके बाद आप ‘Apply New KCC’ पर क्लिक करें. इतना करने के बाद आपसे CSC यानी कॉमन सर्विस सेंटर का ID और पासवर्ड पूछा जाएगा. सही ID और पासवर्ड डालने के बाद ‘Apply New KCC’ पर क्लिक करें. ऊपर दी गयी प्रक्रिया को पूरी करने के बाद  आपको अपना आधार नंबर भरना होगा साथ ही इस बात का ख्याल रखना होगा कि किसान का नाम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ा हो , केवल उसका ही आधार नंबर मान्य होगा. सही आधार नंबर डालने के बाद PM Kisan Financial Detail का फॉर्म खुलेगा. इसके बाद आपको ‘Issue of fresh KCC’ पर क्लिक करना होगा. इस के बाद लोन की रकम और लाभार्थी का मोबाइल नंबर के साथ पूरी जानकारी Submit कर दें. इतना करने के बाद आपको फी भुगतान करना होगा. फी भुगतान होते ही आपका किसान क्रेडिट कार्ड बनकर तैयार हो जाएगा.

खेती से जुड़ा कोई भी व्यक्ति चाहे वह अपने खेत में खेती करता हो या किसी और की जमीन पर काम कर रहा हो, वह किसान क्रेडिट कार्ड बनवा सकता है. किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा लोन प्राप्त करने वाले व्यक्ति की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 75 साल होना चाहिए. यदि आप की उम्र 60 साल से ज्यादा है तो आपको एक सह-आवेदक होना जरूरी होगा. सह-आवेदक कोई नजदीकी रिश्तेदार हो सकता है पर उसकी उम्र 60 साल से कम होना जरूरी है.

Input : First Bihar

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