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कोरोना से बचाव की गारंटी नहीं है वैक्सीन, तीव्रता होगी कम: एक्सपर्ट्स

Ravi Pratap

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देश के कुछ हिस्सों से कोरोना वायरस का टीका लगाए जाने के बावजूद संक्रमण के मामले सामने आने के बाद विशेषज्ञों ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण ”कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करता बल्कि इससे संक्रमण की तीव्रता कम होती है और मृत्यु दर में कमी आती है। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी क्लीनिकल स्टडी से टीकाकरण और इसके बाद बीमारी से ग्रसित होने के बीच अनौपचारिक संबंध का पता नहीं चला है। दिल्ली से चेन्नई तक और पटना जैसे टियर-2 शहरों में भी टीकाकारण के लाभार्थी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं।

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में मामलों में नवीनतम बढ़ोतरी के बाद 37 चिकित्सक संक्रमित हो गए, जिनमें से पांच को उपचार के लिए भर्ती किया गया। यह जानकारी पिछले हफ्ते अस्पताल के सूत्रों ने दी।सूत्रों ने बताया कि उनमें से कई ने कोविशील्ड टीके की दोनों खुराकें ली थीं। दिल्ली में 54 वर्षीय एक सफाई कर्मचारी की तबियत खराब होने से 22 फरवरी को मौत हो गई। उनके बेटे धीरज ने बताया था, ”मेरे पिता ने कोविशील्ड की पहली खुराक 17 फरवरी को ली थी। उस दिन जब वह घर लौटे तो असहज महसूस कर रहे थे और अगले दिन उनके शरीर का तापमान काफी बढ़ गया, जो दो-तीन दिन तक रहा।” उन्होंने कहा कि टीकाकरण के बाद कमजोरी होने के बावजूद उनके पिता काम पर जाते रहे और ड्यूटी के दौरान ही बेहोश हो गए। बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया।

इसी तरह से चेन्नई में भी एक व्यक्ति ने 15 मार्च को टीका लगवाया और 29 मार्च को फिर से कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए। उन्हें 30 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया और चार मार्च को उनकी मौत हो गई, जिससे परिजन टीके के असर को लेकर सशंकित हो गए। देश के कई हिस्से में टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव (एईएफआईएस) की मामूली घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर प्रतिकूल प्रभाव भी हुए जिस कारण मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बहरहाल, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों सुरक्षित हैं और लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। कई विशेषज्ञों ने कहा कि टीकाकरण से कोविड-19 के खिलाफ घातक वायरस से सुरक्षा नहीं होती, बल्कि इससे संक्रमण की तीव्रता में कमी आती है और मौत के मामले घटते हैं।

दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉ. अवधेश बंसल ने कहा, ”हम जानते हैं कि टीकाकरण के बाद भी संक्रमण के मामले आए हैं और दो खुराक लेने के बावजूद मामले सामने आए हैं। लेकिन ये मामले उन लाभार्थियों से जुड़े हुए हैं जिनमें बहुत ही हल्के लक्षण थे। टीका कम से कम संक्रमण की तीव्रता को कम करता है और मृत्यु दर में कमी लाता है।”

उन्होंने कहा कि दो खुराक के बाद ही टीका पूरी तरह प्रभावी होता है। फोर्टिस अस्पताल की डॉ. ऋचा सरीन ने बंसल से सहमति जताते हुए कहा, ”दोनों खुराक लेने के बाद ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बनती है। इसलिए पहली खुराक के बाद किसी के संक्रमित होने की संभावना हो सकती है।” दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि टीके से पूरी तरह सुरक्षा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मास्क पहनने से वायरस से लड़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि दो खुराक के बाद ही टीका पूरी तरह प्रभावी होता है। फोर्टिस अस्पताल की डॉ. ऋचा सरीन ने बंसल से सहमति जताते हुए कहा, ”दोनों खुराक लेने के बाद ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बनती है। इसलिए पहली खुराक के बाद किसी के संक्रमित होने की संभावना हो सकती है।” दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सक ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि टीके से पूरी तरह सुरक्षा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि मास्क पहनने से वायरस से लड़ा जा सकता है।

Input: Live Hindustan

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कोरोना को चारों खाने चित्त कर देगी DRDO की ‘रामबाण’ दवाई, ऑक्सीजन की कमी भी होगी दूर

Muzaffarpur Now

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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से मचे हाहाकार के बीच शनिवार को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के इलाज के लिए एक दवा के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। इस दवा का नाम 2- डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG) नाम दिया गया है। ये दवा डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) ने साथ मिलकर बनाया है।

Oxygen System Planning Tool | UNICEF Office of Innovation

दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते केस में यह रामबाढ़ साबित हो सकता है। डीसीजीआई के मंजूरी से पहले यह दवा क्लीनिकल ट्रायल्स में सफल साबित हुई है। जिन मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया था वो बाकी मरीजों की तुलना में जल्दी रिकवर हुए और इलाज के दौरान ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता भी कम रही।

देश में कोरोना वायरस की पहली लहर सामने आने के बाद ही डीआरडीओ इस दवा पर काम करना शुरू कर दिया था। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 में लैब में इस दवा पर रिसर्च किए थे। रिसर्च में पता चला कि यह दवा कोरोना वायरस के मरीजों के लिए मददगार साबित हो सकती है। जिसके बाद डीसीजीआई ने मई 2020 में दवा के दूसरे फेज के ट्रायल की मंजूरी दी।

ट्रायल के दौरान क्या सामने आया?
डीसीजीआई से दूसरे फेज के ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद अलग-अलग हिस्सों में कुल 11 अस्पतालों में ट्रायल किया गया। मई से अक्टूबर तक चलने वाले इस ट्रायल में 110 मरीजों को शामिल किया गया। ट्रायल के दौरान यह बात सामने आई कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई वो बाकी मरीजों की तुलना में कोरोना वायरस से जल्दी रिकवर हो गए। आम मरीजों की तुलना में ट्रायल में शामिल मरीज लगभग 2.5 दिन पहले ठीक हो गए।

तीसरे फेज का ट्रायल
वहीं, तीसरे फेज का ट्रायल दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच देशभर के 27 अस्पताल में किया गया। इस बार के ट्रायल में मरीजों की संख्या दोगुनी कर दी गई और दिल्ली, यूपी, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के मरीजों को शामिल किया। तीसरे फेज के ट्रायल के दौरान जिन लोगों को यह दवा दी गई उनमें से 42 फीसदी मरीजों की ऑक्सीजन की निर्भरता तीसरे दिन ही खत्म हो गई। दूसरी जिनको यह दवा नहीं दी उनमें 31 फीसदी मरीज ऐसे रहे जिनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता खत्म हुई। मतलब साफ है कि दवा ने मरीज की ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम किया।

कैसे ली जाती है यह दवा?
यह दवा न तो टैबलेट के रूप में है और नहीं इंजेक्शन के रूप में। यह पाउडर के रूप में आती है। पाउडर को पानी में घोलकर लिया जाता है। दवा लेने के बाद जब ये शरीर में पहुंचता है तो कोरोना संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस को बढ़ने से रोकती है। डीआरडीओर की माने तो यह दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है फिर अपना काम शुरू करती है। दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा कोरोना मरीजों के लिए रामबाढ़ साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब मरीजों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

क्या है दवा का बेसिक प्रिंसिपल?
दवा बनाने वाले डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. एके मिश्रा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए बताया कि किसी भी वायरस की ग्रोथ होने के लिए ग्लूकोज का होना बहुत जरूरी है। जब वायरस को ग्लूकोज नहीं मिलेगा, तब उसके मरने की चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। इस वजह से वैज्ञानिकों ने लैब ने ग्लूकोज का एनालॉग बनाया, जिसे 2डीआरसी ग्लूकोज कहते हैं। इसे वायरस ग्लूकोज खाने की कोशिश करेगा, लेकिन यह ग्लूकोज होगा नहीं। इस वजह से उसकी तुरंत ही वहीं मौत हो जाती है। यही दवा का बेसिक प्रिंसिपल है।

Source : Hindustan

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अस्पतालों में भर्ती होने को नहीं होगी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत, सरकार की नई गाइडलाइंस

Muzaffarpur Now

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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोगियों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है. नई नीति के मुताबिक कोविड वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पॉजिटिव सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. यानी कि अब मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के लिए कोविड-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी. पहले अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट या फिर सीटी-स्कैन की जरूरत होती थी.

कोविड-19 के संदिग्ध मामले वाले मरीज को केस की गंभीरता के मुताबिक संदिग्ध वॉर्ड सीसीसी, डीसीएचसी और डीएचसी में भर्ती किया जाएगा. किसी भी मरीज को किसी भी वजह से सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा. इसमें ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल हैं, भले ही रोगी किसी अलग शहर का रहने वाला हो.

नई नीति के मुताबिक किसी भी मरीज को उस शहर में, जहां अस्पताल स्थित है वैध पहचान पत्र न उपलब्ध करा पाने में सक्षम न होने पर प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा. अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर दिया जाएगा. गौरतलब है कि देश में एक दिन में कोविड-19 से रिकॉर्ड 4,187 मरीजों की मौत होने के बाद मृतक संख्या 2,38,270 पर पहुंच गई है जबकि 4,01,078 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 2,18,92,676 हो गए हैं.

रिकवरी रेट घटकर हुआ 81.90 प्रतिशत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक 37,23,446 मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है जो कुल मामलों का 17.01 प्रतिशत है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर घटकर 81.90 प्रतिशत हो गई है.

आंकड़ों के मुताबिक बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या 1,79,30,960 हो गई है जबकि संक्रमण से मृत्यु दर 1.09 फीसदी दर्ज की गई है.

देश में कोविड-19 के मरीजों की संख्या पिछले साल सात अगस्त को 20 लाख को पार कर गई थी. वहीं कोविड-19 मरीजों की संख्या 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी.

इसके बाद 28 सितंबर को कोविड-19 के मामले 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख, 19 दिसंबर को एक करोड़ के पार हो गए थे. भारत ने चार मई को गंभीर स्थिति में पहुंचते हुए दो करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक सात मई तक 30,04,10,043 नमूनों की जांच की गई है जिनमें से 18,08,344 नमूनों की शुक्रवार को जांच की गई.

मौत के नये मामलों में, सर्वाधिक 898 मौत महाराष्ट्र में, कर्नाटक में 592, उत्तर प्रदेश में 372, दिल्ली में 341, छत्तीसगढ़ में 208, तमिलनाडु में 197, पंजाब में 165, राजस्थान में 164, हरियाणा में 162, उत्तराखंड में 137, झारखंड में 136, गुजरात में 119 और पश्चिम बंगाल में 112 लोगों की मौत हो गई.

देश में अबतक हुई कुल 2,38,270 मौत में से 74,413 महाराष्ट्र में, 18,739 दिल्ली में, 17,804 लोगों की कर्नाटक में, 15,171 की तमिलनाडु में, 14,873 उत्तर प्रदेश में, 12,076 लोगों की पश्चिम बंगाल में, 10,158 की पंजाब में, 10,158 की छत्तीसगढ़ में और 10,144 लोगों की पंजाब में मौत हुई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों की मौत अन्य गंभीर बीमारियों के कारण हुई है.

Source : News18

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कंगना रनौत हुईं कोविड पॉजिटिव, खुद को घर में किया क्वारंटाइन

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कोरोना के कहर ने हाहाकार मचा रखा है. देश में लगातार बढ़ते मामले के बीच अब बॉलीवुड (Bollywood) की पंगा क्वीन यानी कंगना रनौत (Kangana Ranaut covid positive) भी कोरोना का शिकार हो गई हैं. उनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है. सोशल मीडिया पर उन्होंने अपने फैंस को ये जानकारी दी है. रिपोर्ट पॉजिटिव आने के साथ ही उन्होंने खुद को क्वारंटाइन कर लिया है. उन्होंने बताया कि वह डॉक्टर्स की सलाह ले रही हैं.

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कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फैंस के साथ ये जानकारी शेयर की बहैं. उन्होंने एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह ध्यान करती नजडर आ रही हैं. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- ‘पिछले कुछ दिनों से मैं थकान और कमजोरी महसूस कर रही थी और मेरी आंखों में हल्की जलन हो रही थी. हिमाचल जाने की उम्मीद में कल मैंने अपना टेस्ट कराया था और आज इसका रिजल्ट आया है. मैं कोविड पॉजिटिव हूं. मैंने खुद को क्वारंटाइन कर लिया है. मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि यह वायरस मेरे शरीर में है. अब मुझे पता है मैं इसे खत्म कर दूंगी.’

कंगना आगे लिखा‘अगर आप डर गए तो यह आपको और डराएगा. आइए इस कोविड 19 को खत्म करते हैं. यह कुछ भी नहीं है एक मामूली सा फ्लू है, जिसे बहुत अधिक दबाया गया था और अब ये कुछ लोगों पर है. हर हर महादेव. ‘

कोरोना के फैंस को जैसे ही उनके कोविड पॉजिटिव होने का जानकारी मिली. तब से वह लगातार उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआं कर रहे हैं.

आपको बता दें कि कंगना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और देश-विदेश के मुद्दों पर अपनी राय देती रहती हैं. हाल ही में बंगाल चुनाव के नतीजों को बाद उन्होंने बंगाल हिंसा के खिलाफ जमकर बयानबाजी की, जिसके बाद उनके ट्विटर अकाउंट को हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया है.

Source : News18

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