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कोवैक्सीन, कोविशील्ड, स्पूतनिक-V: अब भारत के पास तीन हथियार, जानें कौन कितना असरदार

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भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-V (Sputnik-V) की भी एंट्री हो गई है. इस लिहाज से भारत में नागरिकों को मिलने के लिए तैयार वैक्सीन की संख्या तीन हो गई है. शुक्रवार को हैदराबाद में इस वैक्सीन के पहले डोज दिए गए. साथ ही इस दौरान स्पूतनिक-V कीमतों का भी ऐलान किया गया है. फिलहाल भारत में कोविशील्ड और कोवैक्सीन (Covaxin) का इस्तेमाल किया जा रहा है. नई वैक्सीन के शामिल होने के साथ ही सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन सा टीका सबसे ज्यादा असरदार होगा या इनके साइड इफेक्ट्स क्या होंगे?

भारत में नागरिकों को मिलने के लिए तैयार वैक्सीन की संख्या तीन हो गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

कोविशील्ड

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पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में तैयार हुई ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड का इस्तेमाल दुनिया के 62 से ज्यादा देश कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट् में जारी आंकड़े बताते हैं कि विश्व स्तर पर इस वैक्सीन की प्रभावकारिता दर यानि एफिकेसी रेट 70.4 फीसदी है. वहीं, हाल ही में सरकार ने इस वैक्सीन को और असरदार बनाने के लिए दो डोज के बीच अंतराल बढ़ा दिया है. नई जानकारी के मुताबिक, 14-16 हफ्ते के गैप से दिए जाने की सलाह दी गई है.

कोविशील्ड के इस्तेमाल के बाद लोगों में लालपन, बदन या बांह में दर्द, बुखार आना, थकान महसूस होना और मांसपेशियों के जकड़ने जैसे साइड इफेक्ट देखे गए हैं. हालांकि, कई देशों ने वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद खून के थक्के जमने की शिकायत की थी. साथ ही अस्थआई रोक भी लगा दी थी. हालांकि, कई स्टडीज और जानकार ने इस वैक्सीन को सुरक्षित बताया है.

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कोवैक्सीन

हैदराबाद स्थित फार्मा कंपनी में निर्मित कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और शनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ मिलकर तैयार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स में जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वैक्सीन का एफिकेसी रेट 81 प्रतिशत है. साथ ही कई जानकारों ने कोवैक्सीन को कोरोना वायरस के अलग-अलग वैरिएंट्स पर काफी असरदार बताया है. कहा जा रहा है कि कोवैक्सीन लेने के बाद लोग सूजन, दर्द, बुखार, पसीना आना या ठंड लगने, उल्टी, जुकाम, सिरदर्द और चकत्ते जैसे साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ सकता है.

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इस वैक्सीन के जरिए ऐसे पैथोजन्स जो खुद का गुणा नहीं कर सकते, उन्हें शरीर में इंजेक्ट किया जाएगा. फॉर्मेलीन जैसे कैमिकल्स की मदद से वैक्सीन इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाना सिखाएगी. इसमें निष्क्रिय वायरस को बहुत कम मात्रा में एल्युमीनियम आधारित कंपाउंड के साथ मिलाया गया है, जिसे एड्जुवेंट कहते हैं. यह इम्यून सिस्टम को वैक्सीन के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित करता है.

स्पूतनिक-V

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स्पूतनिक-V कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया में शुरू हुए वैक्सीन अभियान में मंजूरी पाने वाली शुरुआती वैक्सीन में से एक है. मीडिया रिपोर्ट्स में जारी जानकारी के अनुसार, इस वैक्सीन का प्रभावकारी दर 91.6 प्रतिशत है. एक स्टडी के अनुसार, स्पूतनिक-V को लेने के बाद लोगों को दर्द या फ्लू जैसे साइड इफेक्टर का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल इस वैक्सीन से जुड़ा कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है.

Source : News18

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गांव में हर आंख में आंसू के साथ शहीद मनोज पीछे छोड़ गए नौ माह की गर्भवती पत्नी

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फरीदाबाद. राजपूताना राइफल्स के 26 वर्षीय राइफलमैन मनोज कुमार भाटी उन चार सैनिकों में शामिल थे, जो गुरुवार तड़के जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सेना के एक शिविर पर आतंकवादी हमले में शहीद हो गए थे. फरीदाबाद के शाहजहांपुर गांव के मनोज कुमार भाटी के पिता बाबूलाल कुमार ने कहा कि ‘दुख तो है पर गर्व भी है कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ. उन्होंने और उनके साथी शहीदों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया और यूनिट को बचाया… बचपन से ही सेना में शामिल होने का उनका सपना था. वह बहादुर था … शेर की तरह. उसने आमतौर पर उग्रवाद के बारे में कुछ भी नहीं बताया. वह हमसे रोजाना के जीवन के बारे में बात करता था.’

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक परिवार में चार भाई-बहनों में सबसे छोटे मनोज 27 मार्च, 2017 को सेना में शामिल हुए. उनकी नवंबर 2021 में शादी हुई थी और उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती है. उनके बड़े भाई सुनील कुमार भाटी (34) भी सेना में हैं और पटियाला में 77 आर्मर्ड कॉर्प्स में नायक के रूप में तैनात हैं. सुनील ने कहा कि उसकी पत्नी का जीवन तबाह हो गया है. वह कुश्ती का शौकीन था और खाली समय में अपनी यूनिट में इसका रियाज करता था.’

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सुनील ने बताया कि उनके ‘गांव के 100 से अधिक युवा सेना में हैं. हर घर में फौजी है यहां. इसके कई कारण हैं. जिनमें आंशिक रूप से नौकरियों की कमी और राष्ट्र सेवा की भावना एक बड़ा कारण है. इन गांवों की सड़कों पर सुबह के समय युवाओं को दौड़ते और सेना की नौकरी की तैयारी करते देखा जा सकता है. लेकिन यह पहली बार है, जब गांव का कोई जवान शहीद हुआ है.’ शहीद मनोज कुमार भाटी का परिवार कुछ सहायता की उम्मीद कर रहा है, ताकि उनकी विधवा और उनके अजन्मे बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो सके.

Source : News18

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पिता ने की डेढ़ साल के मासूम को गला दबाकर मार डाला, नींद में डाल रहा था खलल

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हरियाणा के फरीदाबाद में एक कलयुगी बाप ने डेढ़ महीने के मासूम बेटे को मौत के घाट उतार दिया। आरोपी ने उसकी गला दबाकर हत्या की और फरार हो गया। पुलिस ने पत्नी की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है।

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डेढ़ साल पहले हुई थी शादी

मिली जानकारी के अनुसार, ओल्ड थाना क्षेत्र के खेड़ी पुल स्थित राजीव नगर में रहने वाला सुंदर मूलरुप से झाड़सेतली के रहने वाला है। सुंदर फरीदाबाद की किसी कंपनी में लेबर का काम करता है। करीब डेढ़ साल पहले ही उसकी शादी बसेलवा कॉलोनी निवासी प्रिया से हुई थी। पत्नी ने डेढ़ महीने पहले जुड़वा बेटे को जन्म दिया है।

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दूसरी जगह शादी के आरोप

सूत्रों का कहना है कि आरोपी पिता सुंदर ने कहीं दूसरी जगह भी शादी कर रखी है। इसी बात को लेकर पति पत्नी में विवाद रहता था। शुक्रवार को भी दोनों इसी बात को लेकर विवाद हो गया और उसने क्रोध में आकर डेढ़ माह के बेटे नवीस को गला दबाकर मार डाला। ओल्ड थाना प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। हत्यारोपी पिता अभी फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।

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Source : Dainik Bhaskar

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हर घर तिरंगा अभियान: राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में 50 गुना उछाल, मांग पूरी करना हुआ मुश्किल

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केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लिए उत्सव का दिन नजदीक आने के साथ ही दिल्ली में तिरंगे की बिक्री कई गुना बढ़ गई है. हालात यह है कि राष्ट्रीय ध्वज की भारी मांग के अनुरूप आपूर्ति कर पाना कारोबारियों और विनिर्माताओं के लिए कठिन हो गया है. व्यापारियों ने दावा किया है कि 22 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अभियान की घोषणा किए जाने के बाद से सभी प्रकार के तिरंगे की बिक्री 50 गुना बढ़ गई है. हालांकि, मध्यम आकार के राष्ट्रीय ध्वज की मांग हमेशा बनी रहती है.

दिल्ली के सदर बाजार के थोक व्यापारी गुलशन खुराना 50 साल से अधिक समय से राष्ट्रीय ध्वज की आपूर्ति करने के व्यवसाय में हैं, लेकिन पहले उन्होंने तिरंगे की इतनी भारी मांग कभी नहीं देखी. अभियान के तहत, केंद्र सरकार का लक्ष्य भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर 13 से 15 अगस्त तक घरों के ऊपर कम से कम 20 करोड़ झंडे लगाने का है.

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खुराना उस समय छुट्टी मनाने अमेरिका गए हुए थे जब उन्हें झंडों के बड़े ऑर्डर के लिए खरीदारों से लगातार फोन आने लगा. उन्होंने कहा, मैं इस व्यवसाय में 50 से अधिक वर्षों से हूं, आप बचपन से कह सकते हैं. लेकिन मैंने कभी भी भारतीय झंडे की इतनी मांग नहीं देखी. मेरा फोन बजना बंद नहीं होता है. उन्होंने कहा कि उनको मांग की पूर्ति करने के लिए स्वदेश वापस आना पड़ा.

मांग को पूरा करने के लिए खुराना केवल दो आकार- 16 गुणा 24 और 18 गुणा 27 आकार के ‘तिरंगा’ का निर्माण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, हर दिन हम लगभग 15 लाख झंडे तैयार कर रहे हैं, लेकिन मांग और भी अधिक है. पूरे भारत से ऑर्डर आ रहे हैं, क्योंकि देश में झंडे की कमी है. इसलिए लोग जहां से हासिल कर सकते हैं, वहां से झंडे प्राप्त कर रहे हैं. अभी-अभी गोवा के लिए एक लाख झंडों का ऑर्डर मिला है. इस बीच, ध्वज निर्माता-सह-व्यापारी अनिल ने कहा कि उन्होंने अपनी अन्य विनिर्माण इकाइयों के श्रमिकों को ध्वज निर्माण में लगा दिया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की मांग में अचानक उछाल आने से इसकी बिक्री 50 गुना बढ़ गई है.

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Source : News18

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