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क्या आपने भी मोरेटोरियम पीरियड में भरी थी EMI? अब बैंक आपके खाते में डालेंगे इतने पैसे!

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च में कोरोना वायरस (Coronavirus) के बढ़ते प्रकोप के चलते आम आदमी को राहत देने के लिए लोन मोरेटोरियम की सुविधा का ऐलान किया था, लेकिन अगर आपने मोरेटोरियम पीरियड (loan moratorium) में भी अपने लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI दी थी तो अब सरकार इन लोगों को बड़ा फायदा देने वाली है. जी हां… अगर आपने भी समय पर सभी ईएमआई दी थी तो अब सरकार की ओर से आपके खाते में पैसे आने वाले हैं. यानी आपको सरकार की ओर से कैशबैक की सुविधा दी जाएगी. आपको बता दें यह केवल व्यक्तिगत उधारकर्ताओं और 2 करोड़ रुपये तक के लोन लेने वाले छोटे व्यवसायों के लिए लागू होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने लिया यह फैसला
आपको बता दें सरकार ने जब लोन मोरेटोरियम पीरियड को बढ़ाया था तो लोगों के दिमाग में इस बात पर भ्रम था कि क्या इस अवधि में ब्याज पर ब्याज लगाया जाएगा या नहीं. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक याचिका दायर की गई थी. याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरबीआई की मोरेटोरियम योजना के तहत 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज माफी को केंद्र सरकार को जल्द से जल्द लागू करने का निर्देश दिया.

कौन-कौन से Loan लेने वालों को मिला फायदा- इस योजना के तहत होम लोन, एजुकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड का बकाया, वीइकल लोन, MSME लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन के धारकों को लाभ मिलेगा.इसके लिए 29 फरवरी तक के ब्याज दर के आधार पर गणना की जाएगी. सरकार यह रकम एकमुश्त तरीके से वापस करेगी और एक अनुमान के अनुसार इस पर केंद्र सरकार के करीब 6,500 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं.

हाउसिंग लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन, एमएसएमई, एजुकेशन, क्रेडिट कार्ड बकाया, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और कंजम्पशन लोन जैसे कुल आठ तरह के 2 करोड़ रुपये तक के लोनधारकों को इसका फायदा मिलेगा.

खाते में आएंगे पैसे- इस स्कीम के तहत बैंक पात्र कर्जदारों को कैशबैक देंगे और वह पैसा सरकार बैंकों को देगी. यानी सरकार भुगतान करेगी. माना जा रहा है कि इसमें से करीब 30-40 लाख करोड़ का लोन इस स्कीम के दायरे में आएगा. एक अनुमान के मुताबिक 8 फीसदी सालाना ब्याज दर के हिसाब से करीब 5000-6500 करोड़ रुपये ब्याज पर ब्याज के रूप में होंगे.

उदाहरण के तौर पर अगर आपने मोरेटोरियम के 6 महीने के दौरान 20 हजार रुपये महीने के हिसाब 1.20 लाख रुपये की EMI भरी है. मान लीजिए इस 1.20 लाख रुपये में 20 हजार रुपये का ब्याज है. इस ब्याज पर करीब 8 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से एक साल में ब्याज 1600 रुपये बनता है. ऐसे में ग्राहकों को ब्याज पर ब्याज के रूप में 6 महीने की EMI भुगतान पर करीब 800 रुपये का कैशबैक मिलेगा. हालांकि अलग-अलग लोन पर अलग-अलग तरह की ब्याज दरें निर्धारित होती हैं. इसके लिए शर्त यह रखी गई है लोन स्टैंडर्ड वर्ग के तहत वर्गीकृत होना चाहिए और वह गैर निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित नहीं होना चाहिए. इसके तहत गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लोन पर भी यह लाभ मिलेगा.

RBI ने दी थी 6 महीने के लिए लोन मोरेटोरियम की सुविधा
आपको बता दें कोरोना महामारी के बीच RBI ने ग्राहकों को 6 महीने के लिए लोन मोरेटोरियम की सुविधा दी थी. महामारी के समय में जो भी लोग EMI का पेमेंट करने में असमर्थ थे उन सभी ने इस सुविधा का लाभ लिया था.

31 अगस्त तक ग्राहकों को मिली थी ये सुविधा
बता दें ग्राहकों को 1 मार्च से लेकर 31 अगस्त तक के लिए यह सुविधा दी गई थी. इस सुविधा के बाद में मोराटोरियम पीरियड के दौरान ब्याज पर ब्याज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सरकार ने कहा कि कर्जदारों को ब्याज पर ब्याज नहीं भरना होगा. इससे सरकारी खजाने पर करीब 7000 करोड़ का असर होगा.

क्या है मोरेटोरियम?
मोरेटोरियम एक ऐसी अवधि है जिसमें कर्ज पर ईएमआई के भुगतान पर छूट होती है. यानि इस अवधि में कर्जदार पर ईएमआई भरने का दवाब नहीं होता है. यह अवधि ईएमआई हॉलीडे के नाम से भी जानी जाती है. आमतौर इस अवधि की पेशकश अस्थायी वित्तिय कठिनाईयों का सामना करने वाले लोगों को इससे उबरने के लिए की जाती है.

Source : News18

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तृणमूल में लगातार तेज हो रहे बगावती स्वर, प्रशांत किशोर के खिलाफ नाराजगी

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बंगाल में कुछ माह बाद ही विधानसभा चुनाव होना है, लेकिन तृणमूल के भीतर बगावती स्वर तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में जिस तरह से एक बाद एक विधायक व मंत्री अपनी नाराजगी जता रहे हैं यह शुभ संकेत नहीं है। तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मंत्री धीरे-धीरे बगावत पर उतर रहे हैं, लेकिन ममता के लिए सबसे तगड़ा झटका उनके भरोसेमंद और आंदोलन के दिनों के सहयोगी शुभेंदु अधिकारी का इस्तीफा है। सिर्फ अधिकारी ही नहीं उनके अलावे कई और ऐसे नेता व विधायक हैं जो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के पार्टी के भीतर हस्तक्षेप को लेकर मुखर हो रहे हैं। यही नहीं सत्तारूढ़ दल में मची उठापटक के पीछे सिर्फ पीके ही नहीं बल्कि तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को वजह माना जा रहा है।

पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं तृणमूल के कई नेता

तृणमूल के कई नेता पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं। बता दें कि दिल्ली विधानसभा और आंध्र प्रदेश समेत कई चुनाव में जीत के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले पीके को ममता व अभिषेक ने पिछले साल ही बंगाल चुनाव में तृणमूल का कामकाज देखने के लिए हायर किया है। प्रशांत किशोर की एजेंसी आई-पैक पिछले वर्ष जुलाई से तृणमूल के लिए काम कर रही है लेकिन अब जो खबरें आ रही हैं उससे पीके ममता की उम्मीदों को ठेस पहुंचने की आशंका है। क्योंकि, पीके की रणनीति के तहत इस वर्ष जुलाई में ममता ने संगठन में भारी फेरबदल किया था। इसके बाद से ही नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कई विधायक जता चुके हैं अपनी नाराजगी

पिछले दिनों मुर्शिदाबाद से तृणमूल विधायक नियामत शेख ने एक जनसभा में प्रशांत किशोर का खुलेआम विरोध करते हुए कहा था, क्या हमें उनसे (पीके) राजनीति समझने की जरूरत है? कौन है वह? अगर बंगाल में तृणमूल को नुकसान पहुंचा तो पीके उसकी वजह होंगे। यही नहीं कूचबिहार से तृणमूल विधायक मिहिर गोस्वामी ने भी प्रशांत किशोर पर आपत्ति जताते हुए फेसबुक पर कई पोस्ट किए। उन्होंने पीके पर निशाना साधते हुए लिखा, क्या तृणमूल अभी भी वाकई ममता बनर्जी की पार्टी है? ऐसा लगता है कि पार्टी को किसी ठेकेदार को दे दिया गया है। शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया तथा नई दिल्ली जाकर भाजपा का दामन थाम लिया।

पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं तृणमूल के कई नेता

बैरकपुर विधानसभा से तृणमूल विधायक शीलभद्र दत्त ने पीके की एजेंसी पर हमला बोलते हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है। दत्ता ने कहा है कि एक बाहरी एजेंसी उन्हें सिखा रही है कि राजनीति कैसे करें। यही नहीं मंत्री रबींद्रनाथ भट्टाचार्य ने हुगली के सिंगुर के विधायक बेचाराम मन्ना से नाराज होकर इस्तीफा देने की बात कह दी थी। वहीं मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी भी तृणमूल नेता अनुव्रत मंडल से नाराज हैंं।

Source : Dainik Jagran

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दिसंबर में लग सकता है झटका, बढ़ सकते हैं LPG सिलेंडर के दाम

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अगले महीने (दिसंबर) की पहली तारीख को आम जनता को झटका मिलने की आशंका है. ये झटका एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी के रूप में हो सकता है. दरअसल, तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को संशोधित करती हैं और ये अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की दरों पर निर्भर करता है.

देश में एलपीजी की कीमत सरकारी तेल कंपनियां निर्धारित करती हैं और हर महीने की पहली तारीख को ये संशोधित की जाती हैं. तेल विपणन कंपनियां दिसंबर की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन पर एक घोषणा कर सकती हैं. यानी 1 दिसंबर, 2020 से देशभर में रसोई गैस की कीमत में बदलाव होना तय है.

हालांकि, कोरोना संकट के दौरान लोगों को राहत देने के लिए घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा गया है. उम्मीद कि जा रही है कि आगे भी राहत मिलेगी, लेकिन इसके लिए हमें 1 दिसंबर तक का इंतजार करना होगा. देश में लगभग सभी घरों में एलपीजी कनेक्शन है और इसका उपयोग मुख्य रूप से खाना बनाने के लिए किया जाता है.

एलपीजी की कीमतों में वृद्धि आम आदमी की जेब पर असर डालती है. हालांकि, एक अच्छी बात ये भी है कि भारत सरकार उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी प्रदान कर रही है. सिलेंडर खरीदने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे व्यक्ति के बैंक खाते में जमा हो जाती है और ये हर महीने बदलती है.

उधर, बीपीसीएल एलपीजी गैस का इस्तेमाल कर रहे 7 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के मन में सब्सिडी को लेकर सवाल चल रहे थे. इस सवाल को लेकर केंद्र सरकार की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद भी उसके उपभोक्ताओं को रसोई गैस सब्सिडी मिलती रहेगी. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘‘एलपीजी पर सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं को दी जाती है और किसी कंपनी को नहीं. इसलिए एलपीजी बेचने वाली कंपनी के स्वामित्व का सब्सिडी पर कोई असर नहीं होगा.’’

बता दें कि सरकार प्रत्येक कनेक्शन पर हर वर्ष अधिकतम 12 रसोई गैस सिलेंडर(14.2 किलो गैस वाले) सब्सिडी वाली दर पर देती है. यह सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में दी जाती है. उपभोक्ता डीलर से बाजार मूल्य पर एलपीजी खरीदते हैं और बाद में सब्सिडी उनके खाते में आती है.

बढ़ सकते हैं LPG सिलेंडर के दाम

सरकार तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के उपभोक्ताओं को सब्सिडी देती है.

Source : Aaj Tak

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किसानों के समर्थन में हरभजन, कहा- बिना भिड़ंत के हम अन्नदाता की बात नहीं सुन सकते क्या

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कृषि कानूनों के खिलाफ सड़क पर उतरे किसानों को टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह का साथ मिला है. उन्होंने किसानों को सुनने की अपील की है. हरभजन सिंह ने ट्वीट किया कि किसान हमारा अन्नदाता है. हमको अन्नदाता को थोड़ा समय देना चाहिए.

Harbhajan Singh condemns Bandra incident, says 'what happened today is  unacceptable' | Cricket News – India TV

टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज ने कहा कि क्या यह वाजिब नहीं होगा. बिना पुलिस भिड़ंत के क्या हम किसानों की बात नहीं सुन सकते. कृपया किसान की भी सुनिए. जय हिंद. बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे हैं. वो सरकार से कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

Delhi Chalo' protest: Farmers brave water cannons, tear gas as they inch  towards national capital | India News – India TV

प्रदर्शनकारी किसानों के दिल्ली में प्रवेश करने को लेकर पुलिस से झड़प भी हुई. एक ओर जहां किसान दिल्ली में दाखिल होने पर अड़े रहे तो वहीं पुलिस उन्हें बॉर्डर पार करने से रोकती रही. पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े. इन सबके के बावजूद किसान अड़े रहे. आखिरी में प्रशासन को उनके आगे झुकना पड़ा और दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत देनी पड़ी.

Delhi Chalo' against farm laws: Farmers cross barricades, water jets;  Tomar, Rajnath offer talks | Cities News,The Indian Express

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