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शवों के अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग, सड़क किनारे फुटपाथ पर पड़ीं लाशें

Ravi Pratap

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देश और उत्तर प्रदेश में जारी कोरोना के कोहराम के बीच कोरोना संक्रमण और सामान्य मौतों से गाजियाबाद का हिंडन श्मशान घाट भी अब फुल हो गया है। यहां आने वाले लोगों को अपने परिजनों के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हालात इस कद्र खराब हो गए हैं कि शुक्रवार को अंतिम संस्कार के लिए यहां लगाए गए शव अपनी बारी के इंतजार में सड़क किनारे फुटपाथ पर रखे दिखे। इसके साथ ही 14 एंबुलेंस कोविड संक्रमित मरीजों के शवों को लेकर श्मशान घाट के बाहर खड़ी हैं।

ऐसे ही दृश्य गुरुवार को भी देखे गए थे, जब लोगों को अर्थी को प्लैटफॉर्म से दूर रखकर घंटों तक अंतिम संस्कार के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। उन परिजनों की हालत तब और खराब हो गई, जिन्हें तीन बजे के बाद अंतिम संस्कार के लिए मना कर दिया गया।

वहीं, क्षमता से अधिक शवों के आज जाने से श्मशान घाट प्रबंधन भी परेशान है। यहां पर मृतकों के परिजनों को नंबर देकर शेड के लिए इंतजार कराने को कहा जा रहा है। गुरुवार को शाम से पहले सभी शेड भर चुके थे। इसके बाद शेष शवों को लौटाना पड़ा। विद्युत शवदाह गृह के संचालक विकास ने बताया कि इसमें एक शव की क्रिया में कम से कम दो घंटे लगता है। उन्होंने कहा कि एक ही शेड होने से परिजनों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

एक दिन में रिकॉर्ड 538 संक्रमित मिले

गाजियाबाद जिले में गुरुवार को अभी तक के सबसे ज्यादा एक दिन में 538 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। ये जिले का एक दिन में सर्वाधिक मरीज मिलने का रिकॉर्ड है। इससे पहले सितंबर 2020 माह को 377 संक्रमित मिलने का रिकॉर्ड था। जिले में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 29,375 पहुंच गई है, जिसमें से 27,548 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और 104 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वहीं वर्तमान में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 1723 पहुंच गई है। 15 अप्रैल 2020 को जिले में केवल एक संक्रमित मिला और कुल केस 32 थे। इस महीने में संक्रमण दर तीन फीसद के करीब पहुंच गई है। अप्रैल 2021 के 15 दिनों में अब तक 2078 कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। 15 दिन के भीतर ही संक्रमण दर 0.69 से सीधे 2.80 फीसद पर पहुंच गई है। स्वस्थता दर में कमी आ रही है। वहीं, रजापुर ब्लॉक के लिए नामित किए गए नर्विाचन अधिकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्रा भी कोरोना पॉजिटिव हो गए।

नाइट कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई

गाजियाबाद में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू नाइट कर्फ्यू के समय में बदलाव किया गया है। अब नाइट कर्फ्यू रात आठ बजे से सुबह सात बजे तक लागू रहेगा। उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पिछले सप्ताह रात दस बजे से सुबह छह बजे तक नाइट कर्फ्यू घोषित किया गया था, यह व्यवस्था लगातार जारी थी। पुलिस बाजारों में सक्रिय होकर दुकानदारों को दुकानें बंद करने के निर्देश दे रही थी। वहीं, व्यापार संघ के पदाधिकारी भी लगातार दुकानदारों से दस बजे से पहले अपने सभी प्रतिष्ठान बंद करने के आह्वान कर रहे थे। अब अचानक मामले बढ़ने के साथ ही कर्फ्यू का समय भी बढ़ा दिया गया है। शासन के आदेश पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने जिले में नाइट कर्फ्यू का समय रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। नाइट कर्फ्यू के नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। समय बढ़ाने के साथ ही पूर्व में जिन लोगों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया था, वह व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी। नगर निगम को साफ-सफाई के साथ सैनिटाइजेशन करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

Input: Live Hindustan

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कोरोना से जंग जीतने वाले मरीजों की नई मुसीबत, अब अचानक जा रही आंखों की रोशनी

Ravi Pratap

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कोविड-19 को मात देने के बाद कवक (फंगल) संक्रमण ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ की वजह से आंखों की रोशनी गंवाने के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। कवक संक्रमण (म्यूकोरमाइकोसिस) गंभीर है लेकिन दुर्लभ है। हालांकि, महाराष्ट्र और गुजरात के स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इस संक्रमण के मामले कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों में बढ़ रहे हैं और जिसकी वजह से उनमें आंखों की रोशनी चले जाना और अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो रही है।

सूरत स्थित किरण सुपर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के अध्यक्ष माथुर सवानी ने बताया कि कोविड-19 से तीन हफ्ते पहले ठीक हुए मरीज में म्यूकोरमाइकोसिस का पता चला है। सवानी ने बताया कि फंगल इंफेक्शन के लिए 50 रोगियों का इलाज चल रहा है जबकि 60 और मरीज इसके इलाज का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अबतक सात मरीज अपनी आंखों की रोशनी गंवा चुके हैं। रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर प्रभारी डॉ.केतन नाइक ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस के बढ़ते मरीजों को देखते हुए सूरत सिविल अस्पताल में उनका इलाज करने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। अहमदाबाद के आरवा सिविल अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि रोजाना कम से कम पांच म्योकोरमाइकोसिस मरीजों का ऑपरेशन हो रहा है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में आंख-कान-नाक के डॉक्टर देवांग गुप्ता ने बताया कि यहां हमारे पास रोज पांच से 10 मरीज म्यूकोरमाइकोसिस के आ रहे हैं।

महाराष्ट्र में 200 मरीज: महाराष्ट्र में म्यूकोरमाइकोसिस (कवक संक्रमण) से कम से कम आठ लोग अपनी दृष्टि खो चुके हैं। ये लोग कोविड-19 को मात दे चुके थे, लेकिन काले कवक की चपेट में आ गए। राज्य में ऐसे लगभग 200 मरीजों का उपचार चल रहा है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) के प्रमुख, डॉक्टर तात्याराव लहाने ने यह जानकारी दी। डॉ.लहाने ने पहले कहा था कि आठ कोविड-19 मरीजों की मौत हुई है लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि अनजाने में उन्होंने ऐसा कहा। डॉक्टर लहाने ने कहा कि कवक संक्रमण की बीमारी के बारे में पहले से ही पता है, लेकिन इसके मामले कोविड-19 संबंधी जटिलताओं की वजह से बढ़ रहे हैं जिसमें स्टेरॉइड दवाओं का इस्तेमाल कई बार रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा देता है और कुछ दवाओं का परिणाम रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के रूप में निकलता है।

लक्षण: डॉ.लहाने ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस का लक्षण सिरदर्द, बुखार, आंखों के नीचे दर्द, नाक या साइनस में जकड़न और आंशिक रूप से दृष्टि बाधित होना है। उन्होंने बताया कि इसके इलाज के लिए 21 दिनों तक इंजेक्शन लगाना पड़ता है और एक दिन के इंजेक्शन का खर्च करीब नौ हजार रुपये है।

Input: Live Hindustan

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कोरोना को चारों खाने चित्त कर देगी DRDO की ‘रामबाण’ दवाई, ऑक्सीजन की कमी भी होगी दूर

Muzaffarpur Now

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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से मचे हाहाकार के बीच शनिवार को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के इलाज के लिए एक दवा के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। इस दवा का नाम 2- डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG) नाम दिया गया है। ये दवा डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) ने साथ मिलकर बनाया है।

Oxygen System Planning Tool | UNICEF Office of Innovation

दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते केस में यह रामबाढ़ साबित हो सकता है। डीसीजीआई के मंजूरी से पहले यह दवा क्लीनिकल ट्रायल्स में सफल साबित हुई है। जिन मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया था वो बाकी मरीजों की तुलना में जल्दी रिकवर हुए और इलाज के दौरान ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता भी कम रही।

देश में कोरोना वायरस की पहली लहर सामने आने के बाद ही डीआरडीओ इस दवा पर काम करना शुरू कर दिया था। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 में लैब में इस दवा पर रिसर्च किए थे। रिसर्च में पता चला कि यह दवा कोरोना वायरस के मरीजों के लिए मददगार साबित हो सकती है। जिसके बाद डीसीजीआई ने मई 2020 में दवा के दूसरे फेज के ट्रायल की मंजूरी दी।

ट्रायल के दौरान क्या सामने आया?
डीसीजीआई से दूसरे फेज के ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद अलग-अलग हिस्सों में कुल 11 अस्पतालों में ट्रायल किया गया। मई से अक्टूबर तक चलने वाले इस ट्रायल में 110 मरीजों को शामिल किया गया। ट्रायल के दौरान यह बात सामने आई कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई वो बाकी मरीजों की तुलना में कोरोना वायरस से जल्दी रिकवर हो गए। आम मरीजों की तुलना में ट्रायल में शामिल मरीज लगभग 2.5 दिन पहले ठीक हो गए।

तीसरे फेज का ट्रायल
वहीं, तीसरे फेज का ट्रायल दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच देशभर के 27 अस्पताल में किया गया। इस बार के ट्रायल में मरीजों की संख्या दोगुनी कर दी गई और दिल्ली, यूपी, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के मरीजों को शामिल किया। तीसरे फेज के ट्रायल के दौरान जिन लोगों को यह दवा दी गई उनमें से 42 फीसदी मरीजों की ऑक्सीजन की निर्भरता तीसरे दिन ही खत्म हो गई। दूसरी जिनको यह दवा नहीं दी उनमें 31 फीसदी मरीज ऐसे रहे जिनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता खत्म हुई। मतलब साफ है कि दवा ने मरीज की ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम किया।

कैसे ली जाती है यह दवा?
यह दवा न तो टैबलेट के रूप में है और नहीं इंजेक्शन के रूप में। यह पाउडर के रूप में आती है। पाउडर को पानी में घोलकर लिया जाता है। दवा लेने के बाद जब ये शरीर में पहुंचता है तो कोरोना संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस को बढ़ने से रोकती है। डीआरडीओर की माने तो यह दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है फिर अपना काम शुरू करती है। दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा कोरोना मरीजों के लिए रामबाढ़ साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब मरीजों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

क्या है दवा का बेसिक प्रिंसिपल?
दवा बनाने वाले डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. एके मिश्रा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए बताया कि किसी भी वायरस की ग्रोथ होने के लिए ग्लूकोज का होना बहुत जरूरी है। जब वायरस को ग्लूकोज नहीं मिलेगा, तब उसके मरने की चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। इस वजह से वैज्ञानिकों ने लैब ने ग्लूकोज का एनालॉग बनाया, जिसे 2डीआरसी ग्लूकोज कहते हैं। इसे वायरस ग्लूकोज खाने की कोशिश करेगा, लेकिन यह ग्लूकोज होगा नहीं। इस वजह से उसकी तुरंत ही वहीं मौत हो जाती है। यही दवा का बेसिक प्रिंसिपल है।

Source : Hindustan

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INDIA

अस्पतालों में भर्ती होने को नहीं होगी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत, सरकार की नई गाइडलाइंस

Muzaffarpur Now

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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोगियों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है. नई नीति के मुताबिक कोविड वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पॉजिटिव सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. यानी कि अब मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के लिए कोविड-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी. पहले अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट या फिर सीटी-स्कैन की जरूरत होती थी.

कोविड-19 के संदिग्ध मामले वाले मरीज को केस की गंभीरता के मुताबिक संदिग्ध वॉर्ड सीसीसी, डीसीएचसी और डीएचसी में भर्ती किया जाएगा. किसी भी मरीज को किसी भी वजह से सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा. इसमें ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल हैं, भले ही रोगी किसी अलग शहर का रहने वाला हो.

नई नीति के मुताबिक किसी भी मरीज को उस शहर में, जहां अस्पताल स्थित है वैध पहचान पत्र न उपलब्ध करा पाने में सक्षम न होने पर प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा. अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर दिया जाएगा. गौरतलब है कि देश में एक दिन में कोविड-19 से रिकॉर्ड 4,187 मरीजों की मौत होने के बाद मृतक संख्या 2,38,270 पर पहुंच गई है जबकि 4,01,078 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 2,18,92,676 हो गए हैं.

रिकवरी रेट घटकर हुआ 81.90 प्रतिशत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक 37,23,446 मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है जो कुल मामलों का 17.01 प्रतिशत है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर घटकर 81.90 प्रतिशत हो गई है.

आंकड़ों के मुताबिक बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या 1,79,30,960 हो गई है जबकि संक्रमण से मृत्यु दर 1.09 फीसदी दर्ज की गई है.

देश में कोविड-19 के मरीजों की संख्या पिछले साल सात अगस्त को 20 लाख को पार कर गई थी. वहीं कोविड-19 मरीजों की संख्या 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी.

इसके बाद 28 सितंबर को कोविड-19 के मामले 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख, 19 दिसंबर को एक करोड़ के पार हो गए थे. भारत ने चार मई को गंभीर स्थिति में पहुंचते हुए दो करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक सात मई तक 30,04,10,043 नमूनों की जांच की गई है जिनमें से 18,08,344 नमूनों की शुक्रवार को जांच की गई.

मौत के नये मामलों में, सर्वाधिक 898 मौत महाराष्ट्र में, कर्नाटक में 592, उत्तर प्रदेश में 372, दिल्ली में 341, छत्तीसगढ़ में 208, तमिलनाडु में 197, पंजाब में 165, राजस्थान में 164, हरियाणा में 162, उत्तराखंड में 137, झारखंड में 136, गुजरात में 119 और पश्चिम बंगाल में 112 लोगों की मौत हो गई.

देश में अबतक हुई कुल 2,38,270 मौत में से 74,413 महाराष्ट्र में, 18,739 दिल्ली में, 17,804 लोगों की कर्नाटक में, 15,171 की तमिलनाडु में, 14,873 उत्तर प्रदेश में, 12,076 लोगों की पश्चिम बंगाल में, 10,158 की पंजाब में, 10,158 की छत्तीसगढ़ में और 10,144 लोगों की पंजाब में मौत हुई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों की मौत अन्य गंभीर बीमारियों के कारण हुई है.

Source : News18

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