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छठ आते ही गूंजने लगते हैं शारदा सिन्हा के गीत, ‘बिहार कोकिला’ के गानों के बिना यह पर्व अधूरा

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छठ पूजा का महत्व काफी ज्यादा है. यह व्रत सूर्य भगवान, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित है. खासकर इसे बिहार में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. एक तरफ जितनी श्रद्धा से लोग इस त्योहार को मनाते हैं उतने ही प्यार से इसके गीत को भी सुनते हैं. हर साल नए गीत आते हैं लेकिन लोग आज भी लोग छठ गीत के लिए शारदा सिन्हा को ही जानते हैं. शारदा सिन्हा का नाम आते ही मन में सीधे छठ के गीतों की धुन बजने लगती है. या ऐसे समझ लें कि इनके गीतों के बिना यह पर्व अधूरा सा होता है.

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बिहार कोकिला, पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित

सबसे पहले जान लें कि आखिर कौन है शारदा सिन्हा. ये बिहार की लोकप्रिय गायिका हैं. एक अक्टूबर 1952 को जन्मीं शारदा सिन्हा को बिहार-कोकिला, पद्म श्री और पद्म भूषण सम्मान से विभूषित किया जा चुका है. शारदा सिन्हा ने मैथिली, बज्जिका, भोजपुरी के अलावे हिंदी गीत गाए हैं. उनके पति ब्रजकिशोर सिन्हा शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. इतना ही नहीं बल्कि शारदा सिन्हा ने हिंदी फिल्मों में भी गाने गाए हैं. मैंने प्यार किया और हम आपके हैं कौन में इनके गाने को लोगों ने खूब पसंद किया था.

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शारदा सिन्हा के हर साल बजने वाले छठ गीत

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  • केलवा के पात पर
  • हो दीनानाथ
  • ऊगिहें सूरज गोसाइयां है
  • हे छठी मैया
  • हे गंगा मैया
  • छठी मैया आई ना दुआरी

कब से कब तक है छठ पूजा

छठ पूजा की शुरुआत नहाए खाए से होती है. इस बार यह दिन 8 नवंबर 2021 को है. छठ पूजा का दूसरा दिन यानी खरना 9 नवंबर को है. इस दिन छठ व्रति निर्जला रहकर व्रत करते हैं और रात में प्रसाद के तौर पर खीर खाते हैं. वहीं छठ पूजा का तीसरा दिन संध्या अर्घ्य है. इस बार संध्या अर्घ्य 10 नवंबर को है. 11 नवंबर की सुबह 8.25 बजे यह त्योहार समाप्त हो जाएगा.

Source : ABP News

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बिहार में मैट्रिक पास 115 सिपाही तीन दिनों के लिए बनाए गए दारोगा, भागलपुर की लेडी सिंघम ने विशेष शक्ति से की तदर्थ प्रोन्नति

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पंचायत चुनाव को लेकर नक्सल प्रभावित बांका के दो प्रखंडों चांदन और फुल्लीडुमर में नवम चरण को 29 नवंबर को होने वाले मतदान में पुलिस पदाधिकारियों की भारी कमी को देखते हुए 115 सिपाहियों को तीन दिनों के लिए दारोगा बना दिया गया है। प्रभारी रेंज डीआईजी निताशा गुड़िया ने विधि-व्यवस्था की बेहतरी के लिए 27 से 29 नवबंर 2021 तक तीन दिनों के लिए 115 सिपाहियों को तदर्थ प्रोन्नति देते हुए सहायक अवर निरीक्षक बना दिया है। अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए डीआईजी ने मैट्रिक पास इन सिपाहियों को तीन दिनों के लिए तदर्थ प्रोन्नति दे पंचायत चुनाव में लगाने का आदेश बांका एसपी अरविंद कुमार गुप्ता को दे दिया है। बांका एसपी ने पुलिस पदाधिकारियों की भारी कमी को देखते हुए नक्सल प्रभावित दोनों प्रखंडों में मतदान कराने में होने वाली व्यवस्थागत परेशानी से अवगत कराया था।

Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

तीन दिनों तक छोटे साहब की हनक में रहेंगे ये जवान

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राइफल और डंडा थाम परंपरागत सुरक्षा ड्यूटी निभाने वाले 115 चयनित जवान तीन दिनों तक दारोगा की शक्ति लिए छोटे साहब की हनक में दिखेंगे। बांका के दोनों नक्सल प्रभावित प्रखंडों में उन्हें दारोगा के रूप में काम करने का नया अनुभव होगा। चयनित सिपाहियों के चेहरे तदर्थ प्रोन्नति को लेकर प्रसन्न नजर आने लगे हैं।

Due to her ability Bhagalpur SSP Nitasha Gudiya did a subtle investigation  and recovered the youth declared dead will be honored

  • – नक्सल प्रभावित चांदन और फुल्लीडुमर में शांतिपूर्ण मतदान के लिए प्रभारी रेंज डीआइजी ने उठाया फौरी कदम
  • – पुलिस पदाधिकारियों की भारी कमी को देखते हुए एसपी बांका की अर्जी पर की कवायद

मैट्रिक पास सिपाही हैं शामिल

बांका जिला बल में तैनात मैट्रिक पास सिपाही कन्हैया पांडेय, अर्जुन उरांव, साहेब हांसदा, वैद्यनाथ सिंह, हरेंद्र राम, बोनिफास कुजूर, मुहम्मद करनैन, सेराजुल हक,ओमकार नाथ ठाकुर, नरेंद्र यादव, यगु सिंह, राजकिशोर उपाध्याय, गुप्तेश्वर मिश्रा, सुनीता देवी, राम परीखा सिंह, रविरंजन कुमार, संतोष कुमार दास, रोशन कुमार, कुमार अजय नारायण सिंह वर्मा, जितेंद्र कुमार, ओमप्रकाश साह, राकेश बिहारी, देवेंद्र प्रसाद या दव, अनिता कुमारी, मुहम्मद तसलीम, पंकज कुमार, संजय कुमार, चंदन कुमार, राजेश कुमार, कन्हैया लाल सिंह, शैलेंद्र कुमार, राजकुमार ठाकुर, संदीप कुमार, गौतम कुमार, गुणाकर कुमार, संजय सिंधवाल, अमित कुमार, ऋषिकेश कुुमार, रंजीत कुमार, नीतीश कुमार, राहुल कुमार, विशेश्वर कुमार, लोकेश कुमार अली राजा नैयर, सतीश कुमार, रीतेश पांडेय, विकास कुमार झा, प्रेमद्त कुमार, प्रवीण कुमार, इंद्र कुमार, प्रभाकर कुमार, लवकुश कुमार, नम्रता देवी, निरंजन कुमार मंडल, संगीता कुमारी, अमित कुमार, ओमप्रकाश कुमार, सनाउल्लाह खान, राजीव कुमार पंडित, मनोज पासवान, नितेश कुमार, अनिल कुमार तांती, आशुतोष् कुमार, अशोक कुमार ङ्क्षसह, नितेश कुमार तिवारी, सुमन कुमार चौधरी समेत 115 मैट्रिक पास सिपाही शामिल हैं। इन्होंने नई जिम्मेदारी को चुनाव ड्यूटी के दौरान बखूबी निभाने की बात कही है।

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Source : Dainik Jagran

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बिहार के हर मंदिर को देना होगा चार प्रतिशत टैक्‍स, सार्वजनिक देवस्‍थलों के निबंधन के लिए चलेगा अभियान

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बिहार के सभी मंदिरों को अब टैक्‍स देना होगा। राज्‍य के सार्वजनिक मंदिरों के निबंधन के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड व्यापक अभियान चला रहा है। एक दिसंबर से इसे तेज किया जाएगा। इसमें बोर्ड के अलावा आम लोग भी हिस्सा ले सकते हैं। आपके आसपास कोई सार्वजनिक मंदिर है तो उसके बारे में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर या डाक के माध्यम से सूचना दे सकते हैं। मंदिरों के निबंधन के लिए सूचना के साथ संबंधित कागजात भी मुहैया कराना होगा। धार्मिक न्यास बोर्ड उक्त कागजातों की जांच कर उसका निबंधन करेगा।

Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

4,600 मंदिरों का अब तक है निबंधन

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बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष एके जैन का कहना है कि बोर्ड की ओर से कुल 4,600 मंदिरों का निबंधन हुआ है। अभी भी राज्य के कई प्रमुख मंदिर हैं, जिनका निबंधन नहीं है। कुछ बड़े मंदिर निबंधन के बावजूद नियमित बोर्ड को टैक्स नहीं दे रहे हैं। पूर्व में निबंधित मंदिरों की जमीन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारियों को विधि मंत्रालय की ओर से पत्र लिखा गया है। अब तक मात्र भोजपुर के लिए जिलाधिकारी ने कुछ मंदिरों की जमीन के बारे में जानकारी मुहैया कराई है। अन्य जिलों के डीएम को भी निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द मंदिरों की जमीन के बारे में जानकारी मुहैया कराएं।

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सार्वजनिक एवं निजी मंदिरों में है अंतर

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धार्मिक न्यास बोर्ड के नियमों के अनुसार, अगर कोई मंदिर किसी व्यक्ति के घर की चारदीवारी के अंदर स्थित है और उसमें उसी घर या परिवार के लोग पूजा करते हैं तो उसको निजी या व्यक्तिगत माना जाएगा। कोई मंदिर किसी घर या मकान के चारदीवारी के बाहर है और उसमें एक से अधिक परिवार की पूजा करते हैं और चढ़ावा देते हैं तो उसे सार्वजनिक माना जाएगा। प्रत्येक सार्वजनिक मंदिर को धार्मिक न्यास बोर्ड में पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के उपरांत बोर्ड को कुल आय का चार प्रतिशत टैक्स देना होता है।

Source : Dainik Jagran

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लिट्टी-चोखा का वर्ल्‍ड रिकार्ड! बिहार का ये पूरा शहर आज खाएगा केवल एक ही चीज

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बिहार का बक्‍सर शहर आज अनोखा रिकार्ड बना रहा है। शहर के प्राय: हर घर में आज अपने राज्‍य का मशहूर व्‍यंजन लिट्टी-चोखा जरूर बनेगा। शहर में लिट्टी-चोखा बनाने और खाने का क्रम रविवार की अल सुबह पौ फटने के साथ ही शुरू हो गया है, जो देर रात तक चलेगा। दरअसल, बक्‍सर में पिछले पांच दिनों से चल रहे पंचकोसी मेले का आज आखिरी दिन है। इस दिन लोग बक्‍सर शहर के चरित्रवन में लिट्टी-चोखा खाते हैं। कुछ लोगों के लिए यह पिकनिक है तो कई लोग इसे एक देसी अंदाज वाला एक फूड फेस्टिवल मानते हैं। लोक कथाओं के अनुसार इस मेले का अतीत भगवान श्रीराम से जुड़ा है। पंचकोसी मेले का असल अंदाज भी धार्मिक ही है। इसके जरिए बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान और खाने की देसी डिशेज की ब्रांडिंग भी होती है। हालांकि, इतने बड़े आयोजन को बड़ी पहचान दिलाने के लिए सरकार और प्रशासन के स्‍तर से कोई प्रयास नहीं हाेने पर स्‍थानीय लोगों में अफसोस भी है।

बक्‍सर के पंचकोशी मेले का आज आखिरी दिन। जागरण

दिल्‍ली से कोलकाता के लिए रेल के रास्‍ते चलने पर पटना से पहले बिहार का पहला बड़ा शहर बक्‍सर पड़ता है। आज बक्‍सर का नजारा बेहद अलग है। बक्‍सर में आज अनोखा लिट्टी-चोखा मेला लगा है। वस्‍तुत: इस मेले का नाम पंचकोशी मेला है, जिसका आज बक्‍सर में लिट्टी-चाेखा खाकर समापन होगा। मेले का आज पांचवां और आखिरी दिन है। मेले के आखिरी पड़ाव पर बक्‍सर में गंगा नदी में स्‍नान करने के बाद लोग लिट्टी-चाेखा बनाकर खाएंगे। लिट्टी-चोखा बनाने के लिए गोबर के उपले का इस्‍तेमाल होता है, जिसके धुएं से पूरे शहर का आसमान भर गया है। सुबह होने के साथ ही शहर के किला मैदान और चरित्रवन आदि इलाकों में लिट्टी-चोखा बनाने का क्रम शुरू हुआ, जो रात तक चलता रहेगा। वैसे तो आज इस शहर के लगभग हर घर में लिट्टी-चोखा बनाया और खाया जाएगा।

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भगवान राम से जुड़ी है कथा

पंचकोशी मेले की लोककथा भगवान राम से जुड़ी है। लोक मान्‍यता के अनुसार भगवान राम ने बक्‍सर और इर्द-गिर्द के चार गांवों में पांच दिनों तक घूमते हुए अलग-अलग व्‍यंजन खाए थे। बसांव मठ के महंत अच्‍युत प्रपन्‍नाचार्यजी ने बताया कि मुनि विश्‍वामित्र बक्‍सर में डेरा जमाए राक्षसों के संहार के लिए भगवान राम और उनके भाई लक्ष्‍मण को अयोध्‍या से अपने साथ लेकर बक्‍सर आए थे। बक्‍सर में ही ताड़का का वध हुआ था। उन्‍होंने बताया कि मेले में आए साधु-संतों को आज पंचकोशी परिक्रमा समिति की ओर से विदाई दी जाएगी।

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पांच दिनों में पांच तरह के व्‍यंजन

पंचकोशी मेले की शुरुआत बक्‍सर से सटे गांव अहिरौली में पुआ खाकर होती है। इसके बाद अगले दिन नदांव में खिचड़ी, भभुअर में चूड़ा-दही और नुआंव में सत्तू-मूली का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। कई श्रद्धालु तो इन पांच दिनों तक अपने घर नहीं लौटते। मेले के आखिरी दिन बक्‍सर के चरित्रवन में लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण कर लोग धन्‍य होते हैं।

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Haldiram Bhujiawala, Muzaffarpur - Restaurant

उपलों का कारोबार एक करोड़ तक जाने की उम्‍मीद

इस मेले में करीब एक करोड़ रुपए के उपलों का कारोबार होने की उम्‍मीद है। लिट्टी-चोखा तैयार करने के लिए लोग गोबर के उपलों का इस्‍तेमाल करते हैं। उपले बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि कोरोना काल से पहले 50 से 60 लाख रुपए तक उपले पंचकोशी मेले में बिक जाते थे। पिछले साल मेले में रौनक नहीं थी। इस बार भीड़ अच्छी दिख रही है, इसलिए कारोबार भी अधिक होने की उम्‍मीद है। इसके अलावा टमाटर, आलू, बैगन, मूली, हरी मिर्च, लहसून, प्‍याज और अदरक की खपत भी बढ़ गई है।

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In buxar devotees bath in ganga and makes prasad of litti chokha

हनुमान जी के ननिहाल में अंजनी सरोवर की श्रद्धालुओं ने की परिक्रमा

पंचकोसी परिक्रमा में शनिवार को श्रद्धालुओं ने भभुअर से चलकर उन्नाव स्थित उद्दालक आश्रम में सत्‍तू-मूली का प्रसाद ग्रहण किया। स्‍थानीय लोग इस गांव को हनुमान जी की ननिहाल मानते हैं। यहां अंजनी सरोवर में स्नान व पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। पौराणिक मान्यता के अनुसार पंचकोसी परिक्रमा के चौथे दिन भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण को सत्तू-मूली खिलाकर महर्षि उद्दालक ने उनकी आवभगत की थी। जिसके उपलक्ष्य में पंचकोसी के चौथे पड़ाव उन्नाव में सत्तू एवं मूली प्रसाद के रूप में खाया जाता है। इससे पहले भभुअर में रात्रि विश्राम के बाद सुबह श्रद्धालु एवं संत-महात्मा उन्नाव पहुंचे। यहां अंजनी सरोवर में स्नान कर हनुमानजी तथा माता अंजनी के मंदिर में जाकर उन्हें मत्था टेके। फिर, सत्तू-मूली का प्रसाद खाकर रात्रि विश्राम किए।

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अनूठी परंपरा है बक्सर की पंचकोस परिक्रमा, लिट्टी-चोखा का बनता है प्रसाद,  जुटते हैं हजारों लोग

पंचकोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष सह बसांव पीठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्यजी महाराज के सान्निध्य में बसांव मठ के संतों द्वारा सत्तू-मूली प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर वहां कथा-प्रवचन का आयोजन भी हुआ। जिसमें दामोदराचार्य जी, सुदर्शनाचार्य जी, छविनाथ त्रिपाठी, अहिरौली मठ के मधुसूदनाचार्य जी काली बाबा, आदि ने कथा के माध्यम से महर्षि उद्दालक एवं बाल हनुमान तथा माता अंजनी के जीवन चरित्र का वर्णन किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा, सुरेश राय, सुबेदार पांडेय, टुनटुन वर्मा, रोहतास गोयल, आदि मठिया के अन्य परिकरों का सहयोग रहा।

अंजनी सरोवर के नाम से विख्यात है तालाब

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मान्यता के अनुसार नुआंव स्थित उद्दालक आश्रम के समीप राम भक्त हनुमान की माता अंजनी अपने पुत्र के साथ रहती थीं। जहां बचपन में हनुमानजी खेला करते थे। अंजनी के निवास के चलते ही यहां का मौजूद सरोवर अंजनी के नाम से विख्यात हो गया। उन गाथाओं को याद दिलाते हुए वहां एक मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिसमें माता अंजनी के साथ हनुमान जी विराजमान हैं। इसकी चर्चा साकेतवासी पूज्य संत श्रीनारायणदास जी भक्तमाली उपाख्य मामाजी द्वारा रचित पुस्तक में भी की गई है। जिसका उल्लेख करते हुए पंचकोसी समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा ने बताया कि पौराणिक काल में यहां माता अंजनी निवास कर उक्त तालाब में स्नान करती थीं। जिससे यह तालाब अंजनी सरोवर के नाम से विख्यात हो गया।

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लिट्टी-चोखा के मेला को एक दिन पूर्व किला मैदान पहुंचे श्रद्धालु

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पंचकोसी परिक्रमा के पांचवें दिन लिट्टी-चोखा के मेला को लेकर एक दिन पूर्व शनिवार से ही श्रद्धालु चरित्रवन पहुंचने लगे थे। पंचकोसी के अवसर पर लिट्टी-चोखा का प्रसाद बनाने व खाने के लिए एक दिन पूर्व ही दूर-दराज से लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी हो गया था। इस दौरान गाजीपुर, मोहनिया, कुदरा, कथुआ (पिरो), जगदीशपुर (आरा) आदि से उमड़े श्रद्धालुओं ने मां गंगा के पवित्र जल से आटा गूंथकर लिट्टी-चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में भी ग्रहण किए। मौके पर मेनका देवी, शकुंतला देवी, शांता देवी, मीना देवी आदि ने कहा की शनिवार का दिन होने से आज भी बना लिए हैं, रविवार को भी बनाकर खाएंगे। जबकि, कुछ का कहना था की रविवार को भीड़ ज्यादा रहेगी इस कारण आज ही खाकर चले जाएंगे।

नुआंव की परिक्रमा भगाती है दरिद्रता

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पंचकोसी परिक्रमा के दौरान उन्नाव स्थित उद्दालक आश्रम की परिक्रमा व रात्रि विश्राम करने से श्रद्धालुओं की दरिद्रता समाप्त हो जाती है। पौराणिक गाथाओं का उल्लेख करते हुए कथा वाचकों ने कहा कि माता लक्ष्मी की बड़ी बहन का नाम दरिद्रा है। उसके दरिद्रता एवं निर्धनता के भय के चलते दरिद्रा से कोई विवाह करना नहीं चाहता था। परंतु भगवान विष्णु की इच्छा पर उनके परम भक्त महर्षि उद्दालक, माता लक्ष्मी की बड़ी बहन दरिद्रा से शादी करने पर राजी हो गए। समझने की बात यह है कि इससे पहले महर्षि ने अहंकार को श्री नारायण के चरणों में समर्पित कर दिया था। जिसके चलते उनके साथ दरिद्रा के रहने पर भी दरिद्रता फटक नहीं पाती थी और अंतत: दरिद्रा को उद्दालक ऋषि को छोड़कर भगवान के पास जाना पड़ गया।

संकट में उन्नाव मेला का अस्तित्व

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पंचकोसी परिक्रमा के चौथे विश्राम स्थल उन्नाव में आयोजित होने वाले मेला के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। समय रहते यदि प्रशासन सचेत नही हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब उन्नाव पंचकोसी मेला केवल यादों में सिमटकर रह जाएगा। इसका कारण अंजनी सरोवर का अतिक्रमण बताया जाता है। अतिक्रमण के चलते न केवल इस पौराणिक धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है बल्कि, प्रति वर्ष होने वाला सरोवर का परिक्रमा भी संचालित नहीं हो सका। इस संबंध में पंचकोसी परिक्रमा समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा व सुरेश राय ने बताया कि रास्ते के अतिक्रमण के कारण मेलार्थी एवं संत समाज परिक्रमा की रस्मअदायगी नहीं कर सके। जबकि इस समस्या से प्रशासन को पूर्व में ही अवगत करा दिया गया था। अतिक्रमण का सिलसिला अगर इसी प्रकार जारी रहा तो वह दिन दूर नही जब पंचकोसी यात्रा मेला के चौथे पड़ाव का अस्तित्व ही मिट जाएगा।

panchkoshi mela buxar 2020 litti chokha mela in chartiravan bihar news :  कभी देखा है बिहारी व्यंजन लिट्टी-चोखा का मेला... ये तस्वीर और जानकारी आपको  हैरान न कर दे तो कहिएगा -

मेले को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दिलाई जानी चाहिए पहचान

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बक्‍सर के जाने-माने अधिवक्‍ता और समाजसेवी रामेश्‍वर प्रसाद वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम से जुड़ा यह मेला बिहार की सांस्‍कृतिक पहचान और धार्मिक परंपरा को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहचान बना सकता है। उन्‍होंने कहा कि स्‍थानीय सामाजिक संगठनों के साथ ही प्रशासन और सरकार को भी इसके लिए पहल करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रशासन चाहे तो इस मेले की बदौलत बक्‍सर का नाम विश्‍व रिकार्ड की सूची में दर्ज हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि एक साथ ऐसा आयोजन शायद ही कही होता हो, जहां लाखों लोग केवल लिट्टी-चोखा ही खाते हैं। अधिवक्‍ता विनय सिन्‍हा ने कहा कि‍ मेले में हिस्‍सा लेने के लिए अगल-बगल के कई जिलों के लोग आते हैं। दूसरी तरफ, शहर के लोग मेले में जाएं न जाएं, अपने घर में ही सही, इस दिन लिट्टी-चोखा ही खाते हैं। बक्‍सर से सटे गांवों में भी लोग आज के दिन लिट्टी-चोखा जरूर बनाते और खाते हैं। यहां तक कि दूसरे जिलों, प्रदेशों, यहां तक कि विदेश में रहने वाले बक्‍सर के लोग भी आज के दिन लिट्टी-चोखा खाना नहीं भूलते हैं।

Source : Dainik Jagran

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