छोटे से बीज में छिपी सेहत अपार, ठंड के दिनों में इसका सेवन बेहद फायदेमंद
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छोटे से बीज में छिपी सेहत अपार, ठंड के दिनों में इसका सेवन बेहद फायदेमंद

Santosh Chaudhary

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Health Benefits Of Pine Nuts Seeds चिलगोजा यानी पाइन नट्स पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो त्वरित ऊर्जा दिलाने में सहायक होते हैं। ठंड के दिनों में चिलगोजे का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें फॉलेट और आयरन प्रचुर मात्रा में होने की वजह से यह महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम और पौटेशियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसे सादा खाइए या भूनकर या फिर किसी भी व्यंजन में डालकर इसका स्वाद आपको पसंद जरूर आएगा…

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चिलगोजा भजिए

सामग्री:

100 ग्राम चिलगोजा

गिरी, 1 कप बेसन, 1

बड़ा चम्मच बारीक

कटा धनिया, 1

छोटा चम्मच चाट

मसाला, 1/4चम्मच

अमचूर पाउडर,

1/4चम्मच पिसी लाल

मिर्च, चुटकी भर बेकिंग सोडा, 1/2छोटा

चम्मच नमक, तलने के लिए तेल

विधि: एक कटोरी में बेसन, चाट मसाला, लाल मिर्च, नमक, अमचूर पाउडर और बेकिंग सोडा मिला लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए गाढ़ा घोल बना लें। बारीक कटा धनिया और चिलगोजा गिरी भी मिला लें। कड़ाही में तेल गर्म करें और भजिए डालें। धीमी आंच पर गोल्डन ब्राउन होने तक तलें। हरी चटनी के साथ चिलगोजे भजिए का आनंद उठाएं।

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चिलगोजा चॉप्स

सामग्री:

100 ग्राम चिलगोजा गिरी

200 ग्राम उबले मैश किए आल

1 चम्मच बारीक कटा अदरक

50 ग्राम ब्रेड क्रंब्स

2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया

2 चम्मच चाट मसाला

1/2 चम्मच गरम मसाला

1/2 चम्मच कुटी काली मिर्च

1/2 चम्मच अमचूर पाउडर

चुटकी भर हींग

नमक स्वादानुसार

सेंकने के लिए तेल।

विधि: 2 बड़े चम्मच चिलगोजा गिरी रखकर बाकी को मिक्सर में दरदरा पीस लें। तेल के अलावा पिसे चिलगोजे और बाकी सारी सामग्री एक कटोरी में डालकर अच्छी तरह मिलाएं। कुकीज कटर की सहायता से इस मिश्रण की हार्ट शेप्ड चॉप्स बना लें। एक प्लेट में चिलगोजे फैलाकर चॉप्स को इन पर दबा दें। पैन में तेल गर्म करें और इन्हे शैलो फ्राई करके हरी चटनी के साथ गरम-गरम खाएं और खिलाएं।

चिलगोजा चिक्की

सामग्री:

100 ग्राम भुना छिला चिलगोजा

100 ग्राम कुटा हुआ गुड़

1/4 चम्मच इलायची पाउडर

1 बड़ा चम्मच घी।

विधि: कड़ाही में घी गर्म करें। कुटा हुआ गुड़ डालकर चलाते हुए पकाएं। इसकी एक बूंद पानी में डालकर देख लें। गुड़ कड़क होना चाहिए। मुलायम है तो गुड़ को और पकाने की जरूरत है। गुड़ पक जाने पर इसमें भुने-छिले चिलगोजे और इलायची पाउडर मिला दें। एक प्लेट में चिकनाई लगाकर गुड़-चिलगोजे का मिश्रण फैला

दें। इसके बाद कुकी कटर की सहायता से हार्ट शेप्ड़ या मनचाहे आकार में काट लें। ऐसी स्वादिष्ट चिक्की आपने पहले कभी नहीं खाई होगी।

चिलगोजा खीर

सामग्री :

1 कप छिला हुआ चिलगोजा

1/2लीटर दूध

2 बड़े चम्मच कॉर्नफ्लोर,

4 बड़े चम्मच पिसी चीनी

1 छोटा चम्मच लाल पेठा चैरी

1 छोटा चम्मच हरी पेठा चैरी

1/2चम्मच इलायची पाउडर

8-10 केसर के धागे।

विधि: 2 चम्मच दूध में केसर के धागों को भिगोकर रख दें। अब कड़ाही में दूध डालकर उबालें और इसे धीमी आंच पर पकने दें। फिर इसमें कॉर्नफ्लोर डालकर चलाते हुए पकाएं। दूध आधा रह जाने पर पिसी चीनी और केसर मिलाकर चलाते हुए पकाएं। फिर चिलगोजे और इलायची पाउडर डालकर दो-तीन मिनट और पकाकर आंच बंद कर दें। स्वादिष्ट चिलगोजा खीर तैयार है। बाउल में डालें और लाल-हरी पेठा चैरी से गार्निश करके सर्व करें।

Input : Dainik Jagran

HEALTH

तेजी से लोकप्रिय हो रही घी कॉफी, जानिए इसके फायदे

Santosh Chaudhary

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इस साल ऑस्कर के विजेताओं को ट्रॉफी के साथ में एक बैग भी दिया गया था। क्या आप जानते हैं कि इस बैग में तमाम लक्झरी चीजों के साथ 250 ग्राम घी का एक जार भी था? घी के गुणों को देखते हुए हॉलीवुड सेलिब्रिटिज के बीच यह बांटा गया। अब घी का एक और अनूठा प्रयोग आजकल लोकप्रिय हो रहा है। यह है – घी कॉफी। जी हां। कॉफी दुनिया का सबसे लोकप्रिय पेय है। साथ ही कॉफी पर कई तरह से प्रयोग भी किए जाते हैं। मसलन- किटो डाइट वालों में बुलेट प्रूफ कॉफी बहुत लोकप्रिय है। कुछ ऐसा ही अब घी कॉफी के साथ हो रहा है।

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प्राचीन काल से घी का उपयोग भारतीय व्यंजनों और आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता है। कॉफी में घी डालने से इसके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं। जैसे – यह वजन घटाने में मदद करता हैं। बटर कॉफी की तुलना में घी कॉफी बहुत अधिक पौष्टिक और मीठी मानी जाती है।

जानिए घी कॉफी के फायदे

एसिडिटी से राहत: बहुत से लोगों को खाली पेट कॉफी पीना मुश्किल हो जाता है क्योंकि इससे एसिडिटी होती है, लेकिन इसमें थोड़ा-सा घी डालने से एसिडिटी और जलन से राहत मिलती है। घी मिलाने से कॉफी ब्यूटिरिक एसिड और ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर हो जाती है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं और हेल्दी मेटाबॉलिज्म में मदद करता है।

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वजन घटाने में सहायक: अगर आप कीटो डाइट पर हैं तो सुबह घी कॉफी पीने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है। यदि आपका शरीर कीटोसिस में नहीं है और आप घी कॉफी पी रहे हैं, तो वजन बढ़ेगा। यानी जो लोग वजन बढ़ाना चाहते हैं, वो इस तरह लाभ ले सकते हैं। कॉफी संतुष्टि प्रदान करती है और घी में शून्य कार्बोहाइड्रेट होता है। साथ हीओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड वजन कम करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

मूड में सुधार: घी में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड तंत्रिका ऊतक (नर्व टिश्यू) की वृद्धि और कार्य के लिए फायदेमंद होता है। यह हार्मोन उत्पादन में सुधार करती है, जिससे मूड स्थिर और खुश रहता है।

लैक्टोज का विकल्प: घी उन लोगों के लिए शानदार विकल्प है जो लैक्टोज का सेवन नहीं कर पाते हैं, क्योंकि घी में दूध के ठोस पदार्थ और प्रोटीन होता है। यह मक्खन की तुलना में आसानी से पचता है।

अधिक ऊर्जा : वैसे भी कॉफी ऊर्जा बढ़ाती है और फोकस (ध्यान) में मदद मिलती है। घी के कारण इसकी ऊर्जा बढ़ाने वाले गुण दोगुना हो जाते हैं। कॉफी में कैफीन होता है, जो ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।

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ऐसे बनती है घी कॉफी

घी कॉफी बनाना बहुत आसान है। आप जिस भी ब्रांड की और जैसे भी (लाइट या डार्क) कॉपी पीते हैं, उसमें एक या दो चम्मच शुद्ध घी मिलाएं। घी की यह मात्रा कॉफी की मात्रा पर निर्भर करती है। स्वस्थ आहार के साथ इसे पीएं।

एक चम्मच घी में क्या-क्या होता है

(यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रिकल्चर (यूएसडीए) के अनुसार एक चम्मच घी में निम्न  न्यूट्रिशन होते हैं।)

  • कैलोरी: 150
  • वसा: 17 ग्राम
  • संतृप्त वसा: 10 ग्राम
  • असंतृप्त वसा: 7 ग्राम
  • कार्बोहाइड्रेट: 0 ग्राम
  • सोडियम: 90 मिलीग्राम
  • चीनी: 0 ग्राम
  • फाइबर: 0 ग्राम
  • प्रोटीन: 0 ग्राम
  • कोलेस्ट्रॉल: 25 मिलीग्राम

डायटिशियन और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट कारा हर्बस्ट्रीन ने अपने एक लेख में लिखा है कि घी में अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में संतृप्त वसा अधिक होती है। इसलिए सुबह घी कॉफी का सेवन दिनभर की एनर्जी के लिए अच्छा होता है। इसके बाद यदि आप सुबह का नाश्ता नहीं ले पाते हैं तो भी एनर्जी बनी रहेगी। बटर की तुलना में घी सेहतमंद होता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि घी में कैलोरी ज्यादा होती हैं। सेवन करते समय इस लिहाज से भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/en/tips/cow-ghee-benefits-and-side-effects-in-hindi
स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

Input : Hindustan

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HEALTH

इलाहबाद हाईकोर्ट का फैसला: डेंगू से हुई मौ’त..पी’ड़ित परिवार को मिलेगा 25 लाख का मुआवजा

Himanshu Raj

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अदालत ने सभी जिलों के डीएम से डेंगू के मामलों की मानीटरिंग करते हुए बीमारी की रोकथाम व बचाव के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने के साथ ही पी’ड़ितों को बेहतर इलाज मुहैया कराए जाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने इसके साथ ही हाईकोर्ट के वकील के बेटे की डेंगू की बी’मारी से हुई मौ’त के मामले में पीड़ित परिवार को पचीस लाख रूपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए।

यह भी कहा है कि डेंगू से बचाव के लिए स्थापित स्पेशल हॉस्पिटल और ब्लड सिपरेशन यूनिट को पूरी तरीके से क्रियाशील रखा जाए ताकि डेंगू के मरीजों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी ना होने पाए।इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीपी मिश्रा की जनहित याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। अधिवक्ता बीपी मिश्रा के युवा पुत्र की 2016 में डेंगू से मौत हो गई थी। उन्होंने इलाज में लापरवाही बरतने की शिकायत करते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इस पत्र को अदालत ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की।कोर्ट का कहना था की युवक की मौ’त डॉक्टरों द्वारा बीमारी का सही कारण पता न लगा पाने के कारण हुई है। डाक्टर यह जान नहीं पाए कि उसे डेंगू है और उसे ऐसी दवाएं दी गई जो डेंगू के मरीज के लिए घा’तक होती है।डॉक्टरों द्वारा एंटीबायोटिक दिए जाने के कारण बाद में मरीज की स्थिति खराब हो गई और उसे बचाया नहीं जा सका। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

Input: Live Bihar

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HEALTH

आपका बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर या फिर बनेगा सामान्य इंसान, अब DNA से ही हो जाएगा क्लीयर

Santosh Chaudhary

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अपनी संतान के गुण-धर्मों को जानने के प्रति हर कोई चरम स्तर तक उत्सुक होता है। अपनी इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए अभी तक हम बेबस थे, अब विज्ञान के इस युग ने इस असंभव को भी संभव बना दिया है।

डिजायनर बेबी के इस युग में दुनिया में तमाम ऐसी कंपनियां सामने आई हैं जो बच्चे के डीएनए को जांचकर बता रही हैं कि यह आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, कलाकार या फिर सामान्य इंसान बनेगा। चीन सहित दुनिया भर में जेनेटिक टेस्टिंग नामक इस तकनीक का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। 2018 में इस उद्योग का कारोबार सिर्फ चीन में 4.1 करोड़ डॉलर से 2025 तक तीन गुना बढ़कर 13.5 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है।

असहमति भी कम नहीं

दुनिया के सबसे बड़े आबादी वाले देश चीन में हर साल औसतन 1.5 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। ऐसे में इन अभिभावकों का इस तकनीक के प्रति सहज रुझान समझा जा सकता है जब कंपनियां इन्हें बताती हैं कि इस तकनीक से बच्चे की सीखने की क्षमता, आंकड़ों की याद्दाश्त शक्ति, तनाव सहने की क्षमता जैसे गुणों का पता लगाया जा सकता है। लेकिन कुछ लोग कंपनियों के इन दावों को विज्ञान की जगह महज जन्मपत्री करार देते हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के आनुवंशिक विद और बिग डाटा इंस्टीट्यूट के निदेशक गिल मैक्वेन का मानना है कि बच्चों के डीएनए के आधार पर इन चीजों का आकलन इतनी निश्चितता के आधार पर नहीं किया जा सकता है।

आधुनिक भविष्यवक्ता

वैज्ञानिक इस तकनीक को आधुनिक युग के भविष्य बताने वाले की संज्ञा देते हैं। उन पंडितों की पोथी के रूप में डीएनए को देखते हैं। व्यक्ति का डीएनए उसके आनुवंशिक गुणों का वाहक होता है। जीन डिस्कवरी इस तकनीक की अग्रणी कंपनी है। दुनिया में इस कारोबार में कंपनियों की एक पूरी पौध शुमार हो चुकी है। ये कंपनियां अभिभावकों से उनके बच्चों के तार्किकता, गणित और खेल जैसे विषयों से लेकर उसकी जज्बाती क्षमताओं के सटीक आकलन का दावा कर रही हैं।

कंज्यूमर जेनेटिक्स में उछाल

ग्लोबल मार्केट इनसाइट के अनुसार बच्चों के डीएनए से उनके गुणधर्मों की पहचान करने वाले कारोबार का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। 2025 तक यह सिर्फ चीन में 13.5 करोड़ डॉलर होने का अनुमान जताता है। ईओ इंटेलीजेंस 2022 तक इस बाजार के 40 करोड़ डॉलर को पार कर जाने का अनुमान जताती है। उसके अनुसार 2022 तक छह करोड़ चीनी लोग डीएनए टेस्टिंग किट का इस्तेमाल करने लगेंगे जिनकी अभी संख्या 15 लाख है।

तकनीक का तकाजा

इस तकनीक में बच्चे की लार या अन्य तरीके से उसका डीएनए एकत्र किया जाता है। उसमें संभावित रोगों के साथ उसके जीन्स के आधार पर उसके गुणों का आकलन किया जाता है। जैसे एक प्रकार के ब्रेन प्रोटीन को तैयार करने के लिए निर्देशित करने वाला बीडीएनए जींस अगर किसी बच्चे में नदारद है तो उसमें अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टीविटी डिसऑर्डर की आशंका बलवती है। इसी तरह अगर की बच्चे में एससीटीएन 3 जींस का कोई संस्करण मिलता है तो उसके अच्छे धावक बनने की संभावना प्रबल होती है। अगर अभिभावकों को समय से पहले पता चल जाता है कि उनका बच्चा अमुक क्षेत्र में रुचि रखेगा तो वे शुरुआत से ही उसे वैसा माहौल देना सुनिश्चित कर देते हैं। हालांकि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इस तरीके के परीक्षण अलग-अलग शर्तों के साथ प्रतिबंधित हैं।

Input : Dainik Jagran

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