लाल बहादुर शास्त्री सादा जीवन, उच्च विचार में विश्वास रखते थे। यह उनके जीवन के सभी पक्षों से जुड़ा रहा। खान-पान से लेकर पहनावा तक पारंपरिक था। वे जब बिहार के दौरे पर आते तो उन्हें परोसे जानेवाले व्यंजनों में स्थानीय मेन्यू को तरजीह दिया जाता था। उन्हें उपले पर सेंकी गई लिट्टी के साथ आलू-बैंगन का सादा चोखा पसंद था।

उप्र के औड़िहार स्टेशन पर हुआ था स्वागत : वर्ष चार अगस्त, 1956 को रेल मंत्री के रूप में उनका बिहार दौरा था। वे विभिन्न स्टेशनों का मुआयना करते चल रहे थे। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के औड़िहार स्टेशन पर स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं के आग्रह पर स्टेशन के जलपान गृह पहुंचे। उस दौर में रेलवे स्टेशनों पर कैटरिंग का कारोबार मुजफ्फरपुर के अधिवक्ता और 1917 में चंपारण आंदोलन में गांधीजी के सहयोगी रहे गया प्रसाद सिंह और उनके बड़े भाई यदुनाथ प्रसाद सिंह का था। मुजफ्फरपुर की सिंह एंड संस कंपनी बिहार और उत्तर प्रदेश के 16 प्रमुख स्टेशनों पर सेवा दे रही थी। यदु बाबू के पुत्र शैलेश्वर प्रसाद सिंह इसके कर्ता-धर्ता थे। उनके पुत्र रमना निवासी और डा. (प्रो.) विधु शेखर सिंह बताते हैं कि पिताजी ने जलपान गृह में शास्त्रीजी का स्वागत किया था। उन्होंने विभागीय मंत्री की हैसियत से साफ-सफाई और यात्री सुविधाओं का मुआयना किया था।

Source : Dainik Jagran

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