एम्बुलेंस चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की लगातर मिल रही शिकायतों पर सख्त कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने इनके लिए किराया तय कर दिया है। इसके बावजूद राज्य में एम्बुलेंस के लिए अधिक किराया देने को लेकर कोरोना संक्रमित मरीज मजबूर रहे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सख्ती किये जाने के बावजूद निजी एम्बुलेंस चालकों की मनमानी गुरुवार को जारी रही। घर से अस्पताल और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक जाने को लेकर मरीज परेशान होते रहें।

राज्य में स्वास्थ्य विभाग द्वारा निजी एम्बुलेंस के किराये का दर निर्धारित किये जाने के बावजूद पहले ही दिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ। निजी एम्बुलेंस चालकों द्वारा मनमाना किराया लिए जाने की निगरानी की कोई व्यवस्था जिलों में नहीं की गई है। ज्यादा किराया वसूलने वाले निजी एम्बुलेंस चालकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को लेकर कोई टोल फ्री नंबर भी जिलों द्वारा जारी नहीं किया गया है। इस कारण कोरोना संक्रमितों के परिजन असहाय स्थिति में शोषण का शिकार होने को मजबूर हो गए।

एम्बुलेंस का निबंधन हो सकता है रद्द

सूत्रों ने बताया कि आपदा कानून के तहत जिला प्रशासन अधिक किराया मांगने पर निजी एम्बुलेंस का निबंधन जिला परिवहन कार्यालय को रद्द करने के निर्देश दे सकता है। एम्बुलेंस मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।

निजी एम्बुलेंस के अधिक किराया मांगने पर डीएम करेंगे कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि निजी एम्बुलेंस का किराया निर्धारित दर से अधिक लिए जाने पर जिलाधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिहार आपदा प्रबंधन कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्यालय स्तर से निगरानी की नहीं है कोई व्यवस्था
एम्बुलेंस चालकों की मनमानी रोकने को लेकर की गई कार्रवाई की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग में मुख्यालय स्तर पर व्यवस्था नही की गई है। हालांकि, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार द्वारा जिलों से आदेश को लेकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी जा सकती है।

जिलों में निजी एम्बुलेंस चालकों के खिलाफ मिली शिकायतें
पटना, भोजपुर, कैमूर, जहानाबाद, सारण सहित विभिन्न जिलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार निजी एम्बुलेंस चालकों की मनमानी जारी है। पटना के कंकड़बाग स्थित मलाही पकड़ी से निलय कौशिक ने 4 बजकर 24 मिनट पर एक एंबुलेंस वाले को उसके मोबाइल नंबर पर कॉल किया। मलाही पकड़ी से एनएमसीएच में कोविड मरीजों को ले जाना था। एंबुलेंस संचालक ने कहा कि मेरे पास बड़ी गाड़ी नहीं छोटी गाड़ी हैं। वो भी बिना ऑक्सीजन के। इसपर निलय ने कहा कि कोई बात नहीं अभी मरीज की हालत ठीक है। बस अस्पताल पहुंचा दो। निलय ने जब कीमत पूछी तो निजी संचलाक ने मलाही पकड़ी से एनएमसीएच जाने के लिए वो भी छोटी गाड़ी के लिए 4000 रुपये कीमत बतायी। जब निलय ने कहा कि निजी एंबुलेंस वालों के लिए सरकार ने कीमत तय कर दी है तो इतना ज्यादा पैसा क्यों ले रहे हैं। इसपर संचालक का कहना था कि जाकर सरकार से ही एंबुलेंस ले लीजिए। प्राइवेट वाले के पास क्यों फोन कर रहे हैं। जितना पैसा बताएं है उतना देना है तो दीजिए नहीं तो रहने दीजिए। इसके बाद निलय कौशिक ने फोन काट दिया।

Input: Live Hindustan

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