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जिस तेजस विमान से रक्षा मंत्री ने रचा इतिहास उसे उड़ा रहा था बिहार का लाल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कर्नाटक के बेंगलुरु में स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में उड़ान भरी. राजनाथ सिंह ‘तेजस’ में उड़ान भरने वाले देश के पहले रक्षा मंत्री बने. इस उड़ान में एक खास बात हुई जो बिहार के लिए भी गर्व का क्षण बना. दरअसल रक्षा मंत्री (Defence minister) ने जिस जिस तेजस से उड़ान भरी उसे बिहार का लाल एयर वाइस मार्शल नर्वदेश्वर तिवारी उड़ा रहे थे.

बिहार में सीवान जिले के रहने वाले नर्वदेश्वर तिवारी ने जब टेक ऑफ किया तो इसके साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया. दैनिक जागरण के अनुसार गुठनी के श्रीकलपुर गांव निवासी एयर वाइस मार्शल नर्वदेश्वर तिवारी ने बोकारो से प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की है क्योंकि उनके पिता बोकारो में स्टील प्लांट में कार्यरत थे. एयरफोर्स ज्वाइन कर वहां से एमबीए किया. इसके बाद फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बने. वह एयर वाइस मार्शल के पद पर बेंगलुरु एयरफोर्स हेड क्वार्टर में तैनात हैं.

बता दें कि राजनाथ सिंह तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाले पहले रक्षा मंत्री बन गए. हवाई सफर के बाद उन्होंने कहा कि विमान में सफर का उनका अनुभव रोमांचक रहा. सिंह ने विमान से उतरने के बाद अपनी उड़ान को सहज और आरामदायक बताया.

Input: News18

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विश्व पर्यावरण दिवस: बिहार में इन तीन दुर्लभ पेड़ों को क्षति पहुंचाई तो रोज देना होगा एक लाख रुपये जुर्माना

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बिहार में पाए जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के तीन पेड़ों को यदि किसी ने नुकसान पहुंचाया तो उसकी खैर नहीं। राज्य सरकार इन्हें संरक्षित करने जा रही है। जल्द इनके पाए जाने वाले तीन स्थानों को जैव विविधता विरासतीय स्थल घोषित किया जाएगा। फिर इन पौधों का व्यावसायिक प्रयोग करने वालों पर प्रतिदिन एक लाख तक जुर्माना हो सकता है। इनमें बेतिया के रघिया और मंगुराहा के अलावा कैमूर जिले का कुछ चिह्नित हिस्से शामिल हैं। तीनों पौधों की यह विशिष्ट प्रजातियां प्राकृतिक रूप से वहीं पाई जाती हैं। इन प्रजातियों में कैमूर के अंजन, रघिया और मंगुराहा के साइकस पक्टीनाटा व पायनस रॉक्सबरगाई पौधे शामिल हैं। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस है। यह इत्तेफाक है या सुखद संयोग कि इस बार पर्यावरण दिवस की थीम जैव विविधता ही है। बिहार सरकार जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में जल्द महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रही है। वह अपनी जैव विविधता से जुड़ी विरासतों को सहेजेगी।

World Environment Day If these three trees Pinus Roxburghii Cycas ...

पाइनस रॉक्सबरगाई
इसका चर्चित नाम चीड़ का पेड़ है। इसकी औषधीय प्रयोग बहुत अधिक है। सूजन दूर करने वाले तमाम हर्बल उत्पादों के साथ ही दर्दनाशक दवाओं में भी इसका प्रयोग होता है। इसकी पहचान विलियम रॉक्सवर्ग के नाम पर है।

साइकस पेक्टीनाटा
यह साइकस की चौथी प्रजाति है जिसे स्कॉटलैंड के वनस्पति विज्ञानी फ्रांसिस बुचनन ने 1826 में परिभाषित किया था। यह विलुप्त होती प्रजाति देखने में सजावटी होने के साथ ही औषधीय दृष्टि से बेहद खास मानी जाती है।

ऐसे लगेगा जुर्माना
पेड़ों की तीन महत्वपूर्ण प्रजातियों के संरक्षण की योजना है। बिहार बायो डायवर्सिटी बोर्ड इस काम में जुटा है। इस प्रस्ताव को केंद्र ने हरी झंडी दे दी है। स्थानीय निकायों से सहमति लेकर राज्य सरकार इन्हें अधिसूचित कर देगी। फिर इनका व्यावसायिक प्रयोग करने वालों पर प्रतिदिन एक लाख तक दंड का प्रावधान है। पकड़े जाने के बाद जांच में जिस दिन से दुर्लभ पेड़ों के व्यावसायिक उपयोग की बात साबित होगी उस दिन से पकड़े जाने की तारीख तक प्रत्येक दिन एक लाख जुर्माना लगेगा।

पहली बार विरासत स्थल घोषित होंगे तीन स्थान 
पहली बार तीन स्थानों को विरासत स्थल घोषित करने की तैयारी हो रही है। दरअसल बायो डायवर्सिटी एक्ट-2002 के सेक्शन-37 में विलुप्त होती प्राकृतिक महत्व की चीजों को बचाने के लिए सरकार उन्हें जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में अधिसूचित कर सकती है। इसके लिए संबंधित निकाय से परामर्श लेना जरूरी है।

देश में 17 जैव विविधता विरासत स्थल हैं फिलहाल
असम का मजौली रिवर आइलैंड, गोवा का पुर्वातली राय, कर्नाटक में नल्लूर टर्र्मांरड ग्रोव्स, चिकमंगलूर का होग्रीकेन और बंगलूरू की यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज का चिह्नित हिस्सा शामिल है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की नारो हिल्स, सतना और्र ंछदवाड़ा का पातालकोट, महाराष्ट्र का गढ़ चिरौली स्थित ग्लोरी ऑफ अल्लापल्ली, मनीपुर का दियालांग विलेज, मेघालय का ख्लौ कुर सायम कमीइंग, ओडीसा का मंडासारू, तेलंगाना का अमीनपुर लेक, लखनऊ के कुकरैल स्थित घड़ियाल पुर्नवास केंद्र, पश्चिम बंगाल के दार्र्जींलग के टोंग्लू और धोत्रे तथा झाड़ग्राम स्थित चिल्कीगढ़ के चिन्हित हिस्से जैव विविधता विरासत स्थलों में शामिल हैं।

Input : Hindustan

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BIHAR

पूरे बिहार में स्मार्ट बिजली मीटर जल्द लगेंगे, इन जिलों से शुरू होगा प्री-पेड मीटर लगाने का ट्रायल

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बिहार में बिजली का स्मार्ट मीटर लगाने का काम अब विधिवत शुरू होगा। कुछेक शहरों में ट्रायल के तौर पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर को पूरे राज्य में लगाने के लिए बिजली कंपनी ने बिहार विद्युत विनियामक आयोग से अनुमति मांगी है। इस बाबत कंपनी की ओर से विनियामक आयोग में एक याचिका दायर की गई है।

बिजली कंपनी ने पहले डेढ़ साल में 18 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन याचिका में कंपनी ने पूर्व निर्धारित लक्ष्य से साढ़े पांच लाख अधिक 23 लाख 50 हजार स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति मांगी है। यह मीटर ग्रामीण, शहरी इलाकों के साथ ही किसानों और हर घर नल का जल कनेक्शन में भी लगाया जाएगा। इसमें सिंगल फेज के 19 लाख 8 हजार, थ्री फेज में 4 लाख 28 हजार तो बाकी 14 हजार स्मार्ट मीटर कृषि कनेक्शन, हर घर नल का जल आदि में लगाए जाएंगे।

याचिका के अनुसार, कंपनी र्को ंसगल फेज का स्मार्ट मीटर लगाने के एवज में 2503 रुपए, थ्री फेज में 3634 रुपए तो सीटीपीटी मीटर लगाने के एवज में 3424 रुपए खर्च होंगे। प्रति मीटर बॉक्स 231 रुपए खर्च आएगा। लगभग 1 हजार करोड़ की इस परियोजना की राशि बिजली कंपनी किश्तों में स्मार्ट मीटर लगाने वाली केंद्रीय एजेंसी इनर्जी इफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) को देगी। मीटर लगाने के साथ ही ईईएसएल कुल 78 महीने तक इसका देखरेख भी करेगी। बिहार में अब तक 20 हजार से अधिक स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जा चुके हैं। वैसे तो स्मार्ट मीटर देश के कई शहरों में लगाए गए हैं लेकिन बिहार पहला राज्य है जहां प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। ट्रायल के तौर पर अरवल और मुजफ्फरपुर में सबसे पहले प्री-पेड मीटर लगाए गए।

इसके बाद समस्तीपुर के दर्लंसहसराय में स्मार्ट मीटर लगाया गया है। लॉकडाउन के पहले पटना के छह डिविजन के अधीन 15 मोहल्लों के अलावा बेगूसराय, तेघरा, रोसड़ा, अरेराज, चकिया, मोतिहारी व बेतिया में भी स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जा रहे थे। चरणवार तरीके से राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर दिया जाएगा।

नि:शुल्क लग रहा है मीटर
प्री-पेड मीटर लगाने में उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना है। बिजली कंपनी के इंजीनियरों के निगरानी में ईडीएफ इंडिया प्राइवेट लि. के कर्मी घर-घर मीटर लगा रहे हैं। मीटर लगते समय पूर्व वाले मीटर की बकाया राशि 10 माह में वसूली जाएगी। कंपनी के र्बिंलग काउंटर या एप बिहार बिजली स्मार्ट मीटर, पेटीएम आदि से स्मार्ट मीटर को रिचार्ज कराया जा सकता है।

Input : Hindustan

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MUZAFFARPUR

इनसे सीखें : सिंचाई की नई तकनीक ने बदली मुजफ्फरपुर के किसान की किस्मत

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सिंचाई की नई तकनीक अपनाकर मुजफ्फरपुर के किसान लालबाबू सहनी ने न सिर्फ अपनी दुनिया बदली, बल्कि दूसरे के लिए भी नजीर बन गए हैं। नयी तकनीक अपनाकर उन्होंने खेती पर खर्च कम किया और मुनाफा बढ़ाया। अपनी इस उपलब्धि से पिलखी गांव के लालबाबू सहनी राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले 25 लाख रुपये के पुरस्कार की दौड़ में शामिल हो गए हैं। पहला राउंड पार कर वे दूसरे राउंड की तैयारी में जुट गए हैं। लालबाबू सहनी केंद्रीय कृषि विवि पूसा की बोट सिंचाई प्रणाली को अपनाकर ढाब इलाके में बेकार पड़ी जमीन को पट्टे पर लेकर सब्जी की खेती शुरू की। उनके इस प्रयास में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि के कुलपति डॉ. आरसी श्रीवास्तव तथा स्टार्टअप फैसिलिटी के परियोजना निदेशक डॉ. मृत्युंजय कुमार ने मार्गदर्शन किया। वीसी डॉ.आरसी श्रीवास्तव ने बताया कि इनोवेटिव आइडिया पुरस्कार के लिए लालबाबू सहनी का चयन राष्ट्रीय संस्थान मैनेज ने प्रथम राउंड में किया है। आगे के राउंड में भी चयन होने पर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

सिंचाई में डीजल के 40 हजार रुपये बचाए

कृषि विवि के परियोजना निदेशक डॉ. मृत्युंजय कुमार ने बताया कि पिछले साल कुलपति समेत कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डॉ.एसके जैन, डॉ.रवीश चंद्रा व उनकी टीम ने सोलर बोट सिस्टम से सिंचाई प्रणाली विकसित की थी। इसे नदी से जोड़कर प्रति सेकंड करीब साढ़े पांच लीटर पानी निकाल सिंचाई होती है। यह तकनीक सपोर्ट फाउंडेशन के माध्यम से किसान लालबाबू सहनी को इसी साल जनवरी 2020 दी गई। उसने विवि के तकनीक का उपयोग करते हुए दूसरे किसान से सस्ते में ढाब की बेकार पड़ी चार एकड़ जमीन लेकर भिंडी, नेनुआ, कद्दू, खीरा, बैगन आदि की खेती की। जमीन बूढ़ी गंडक नदी के किनारे ऊपरी हिस्से में है। बोट सिस्टम से बूढ़ी गंडक के पानी से उसने खेत में सिंचाई की। बीते चार महीनों में सब्जियों से उन्होंने अच्छा मुनाफा कमाया। किसान लालबाबू ने बताया की सोलर बोट प्रणाली से सिंचाई कर डीजल के करीब 40 हजार बच गए। इसके अलावा नए तथा पुराने खेत मिलाकर करीब दो लाख रुपये इस वर्ष सब्जी बेचकर कमाई हुई है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. सुधानन्द लाल ने बताया कि लालबाबू के काम को राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान हैदराबाद (मैनेज) की रफ्तार योजना में प्रस्तावित किया गया है। मैनेज ने किसान की ऑनलाइन काउंसलिंग की तथा उनकी फसल का अवलोकन किया गया। संतुष्ट होकर किसान को पहले राउंड में चुना गया है। एक और राउंड बचा है। लालबाबू का आवेदन बिहार का इकलौता आवेदन है। संस्थान किसान को दो महीने की ट्रेनिंग भी देगा। डॉ. सुधानंद लाल ने बताया कि संस्थान जल्द ही चयनित किसानों की सूची जारी करेगा। यह राशि किसान को इस परियोजना के विस्तार के लिए मिलेगा। यह बिहार के गौरव की बात है।

Input : Hindustan

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