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RELIGION

ज्वाला देवी : यहां गिरी थी सती की जी’भ, बिना घी और तेल डाले जलती हैं 9 ज्वालाएं

Himanshu Raj

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इस जगह के बारे में एक कथा अकबर और माता के परम भक्त ध्यानु भगत से जुडी है। जिन दिनों भारत में मुगल सम्राट अकबर का शासन था,उन्हीं दिनों की यह घटना है। हिमाचल के नादौन ग्राम निवासी माता का एक सेवक धयानू भक्त एक हजार यात्रियों सहित माता के दर्शन के लिए जा रहा था। इतना बड़ा दल देखकर बादशाह के सिपाहियों ने चांदनी चौक दिल्ली मे उन्हें रोक लिया और अकबर के दरबार में ले जाकर ध्यानु भक्त को पेश किया। बादशाह ने पूछा तुम इतने आदमियों को साथ लेकर कहां जा रहे हो। ध्यानू ने हाथ जोड़ कर उत्तर दिया मैं ज्वालामाई के दर्शन के लिए जा रहा हूं मेरे साथ जो लोग हैं, वह भी माता जी के भक्त हैं, और यात्रा पर जा रहे हैं।

अकबर ने सुनकर कहा यह ज्वालामाई कौन है ? और वहां जाने से क्या होगा? ध्यानू भक्त ने उत्तर दिया महाराज ज्वालामाई संसार का पालन करने वाली माता है। वे भक्तों के सच्चे ह्रदय से की गई प्राथनाएं स्वीकार करती हैं। उनका प्रताप ऐसा है उनके स्थान पर बिना तेल-बत्ती के ज्योति जलती रहती है। अकबर ने कहा अगर तुम्हारी बंदगी पाक है तो देवी माता जरुर तुम्हारी इज्जत रखेगी। अगर वह तुम जैसे भक्तों का ख्याल न रखे तो फिर तुम्हारी इबादत का क्या फायदा? या तो वह देवी ही यकीन के काबिल नहीं, या फिर तुम्हारी इबादत झूठी है। इम्तहान के लिए हम तुम्हारे घोड़े की गर्दन अलग कर देते है, तुम अपनी देवी से कहकर उसे दोबारा जिन्दा करवा लेना। इस प्रकार घोड़े की गर्दन काट दी गई। ध्यानू भक्त ने कोई उपाए न देखकर बादशाह से एक माह की अवधि तक घोड़े के सिर व धड़ को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की। अकबर ने ध्यानू भक्त की बात मान ली और उसे यात्रा करने की अनुमति भी मिल गई।

 

बादशाह से विदा होकर ध्यानू भक्त अपने साथियों सहित माता के दरबार मे जा उपस्थित हुआ। स्नान-पूजन आदि करने के बाद रात भर जागरण किया। प्रात:काल आरती के समय हाथ जोड़ कर ध्यानू ने प्राथना की कि मातेश्वरी आप अन्तर्यामी हैं। बादशाह मेरी भक्ती की परीक्षा ले रहा है, मेरी लाज रखना, मेरे घोड़े को अपनी कृपा व शक्ति से जीवित कर देना। कहते है की अपने भक्त की लाज रखते हुए माँ ने घोड़े को फिर से ज़िंदा कर दिया।

यह सब कुछ देखकर बादशाह अकबर हैरान हो गया। उसने अपनी सेना बुलाई और खुद मंदिर की तरफ चल पड़ा। वहाँ पहुँच कर फिर उसके मन में शंका हुई। उसने अपनी सेना से मां की ज्योतियों को बुझाने के लिए अकबर नहर बनवाया लेकिन मां के चमत्कार से ज्योतियां नहीं बुझ पाईं। इसके बाद अकबर मां के चरणों में पहुंचा लेकिन उसको अहंकार हुआ था कि उसने सवा मन (पचास किलो) सोने का छत्र हिंदू मंदिर में चढ़ाया है। इसलिये ज्वाला माता ने वह छतर कबूल नहीं किया, इसे लोहे का बना (खंडित) दिया था। आप आज भी वह बादशाह अकबर का छतर ज्वाला देवी के मंदिर में देख सकते हैं जब माँ ने अकबर का घम्मंड दूर कर दिया था और अकबर भी माँ का सेवक बन गया था,तब अकबर ने भी माँ के भगतो के लिए वहाँ सराय बनवाए।

Input: Live Bihar

 

 

RELIGION

यहां सूखा पड़ने पर शिवलिंग पर दूध चढ़ाते हैं भक्त, इस मंदिर में मांगी हुई हर मुराद होती है पूरी

Muzaffarpur Now

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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के महदेवा का प्राचीन शिव मंदिर वर्षो से भक्तों के आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। सावन मास के साथ प्रत्येक सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ होती है। स्थानीय लोग मंदिर को बउरहवा बाबा के नाम से पुकराते हैं।

प्राचीन शिव मंदिर।

किवंदती के अनुसार कई सौ वर्ष पहले एक चरवाहा गाय चराते हुए उंचे टीले पर पहुंच गया। वहां पर एक शिवलिंग पर उसकी नजर पड़ी। चरवाहे के कोई संतान नहीं थे, उसने शिवलिंग के पास जाकर संतान प्राप्ति का मन्नत मांगा। कुछ दिनों के बाद उसे संतान की प्राप्ति हो गई।

उसके बाद से शिवलिंग की साफ-सफाई निरंतर करने लगा। शिवलिंग का आकार भी धीरे-धीरे बढ़ता गया। आज वह शिवलिंग विशाल रूप धारण कर लिया है। मान्यता है कि क्षेत्र में कभी भी सूखा का प्रकोप होता है, तो बउरहवां बाबा मंदिर पर जलाभिषेक करके शिवलिंग को पूरा डूबा देते हैं। उस रात जरूर बारिश होती है।

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ग्राम प्रधान ने कराया जीर्णोद्धार

करीब 50 वर्ष पहले क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ा था। किसानों के फसल सूख कर नष्ट हो गए थे। लोग मंदिर में पहुंचे और दूध, जल चढ़ाया। सुबह से लेकर शाम तक शिवलिंग को दूध और जल से डूबा दिए। इस दौरान काला नाग निकला और उसी जल में तैरने लगा। शाम होते ही नाग विलुप्त हो गए। उसके बाद रात में खूब बारिश हुआ। तभी से जब भी क्षेत्र में सूखा पड़ता है तो लोग बउरहवा बाबा की शरण में जाते हैं।

मंदिर के पुजारी राम आसरे ने बताया कि मंदिर की अलग महत्व है, सच्चे मन से मांगी गई सभी मनौती पूर्ण होती है।

ग्राम प्रधान विनोद चौधरी ने जर्जर मंदिर को भव्य रूप देने के लिए मंदिर को करीब सात लाख की लागत से जीर्णोद्धार कराया। प्रधान ने कहा कि शिव में गहरी आस्था है। इस लिए मंदिर को भव्य रूप दिया। शिवरात्रि के दिन क्षेत्र के कई जिलों के लोग यहां जल चढ़ाने पहुंचते हैं।

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RELIGION

गुप्त नवरात्रि आज से, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त, होती है इन देवियों की पूजा

Ravi Pratap

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सनातन धर्मावलंबी आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा यानी आज से ग्रीष्म आषाढ़ी नवरात्र पूजा करेंगे। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना में श्रद्धालु लीन रहेंगे। आषाढ़ी नवरात्रि में तंत्र साधना की प्रधानता के  कारण इसे गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। इस दौरान साधक दस महाविद्याओं की साधना करेंगे।

Gupt Navratri 2020 : Ghatasthapana Subh Muhurat In Hindi - माघ ...

धन, संतान का सुख देता है यह नवरात्र 

ज्योतिषाचार्य प्रियेंदू प्रियदर्शी के मुताबिक गुप्त नवरात्रि के दौरान 26 जून को पंचमी पूजा के साथ बेल नोती होगी। श्रद्धालु 28 जून को महाष्टमी और 29 जून को महानवमी पूजा व हवन करेंगे। उनके अनुसार गुप्त नवरात्रि किसी खास मनोकामना की पूजा के लिए तंत्र साधना का मार्ग लेने का पर्व है। अन्य नवरात्रि की तरह ही इसमें भी व्रत-पूजा, पाठ, उपवास किया जाता है। इस दौरान साधक देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के अनेक उपाय करते हैं। इसमें दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ काफी लाभदायी यह माना गया है। यह नवरात्रि धन, संतान सुख के साथ-साथ शत्रु से मुक्ति दिलाने में भी कारगर है।

Dharm News In Hindi : Gupt Navratri will be worshiped from June 22 ...

कलश स्थापना का मुहूर्त:-

सुबह 9.30 बजे से सुबह 11 बजे तक गुप्त नवरात्र

26 जून – पंचमी-बेल नोती पूजा

28 जून- महाष्टमी, 29 जून-हवन व महानवमी

गुप्त नवरात्र में होती हैं इन देवियों की पूजा

मां काली, तारादेवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्न माता, त्रिपुर भैरवी मां, धुमावती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी इन 10 देवियों का पूजन करते हैं।

Input : Live Hindustan

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RELIGION

सरकार का बड़ा फैसला, बैद्यनाथधाम-देवघर का श्रावणी मेला स्‍थगित

Ravi Pratap

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राज्य के देवघर व दुमका में लगनेवाला श्रावणी मेला इस बार आयोजित नहीं होगा। राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होनेवाला रथ मेला भी इस बार आयोजित नहीं होगा। आपदा प्रबंधन सचिव अमिताभ कौशल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही धार्मिक सभा, समागम आदि पर रोक लगा रखी है। ऐसे में श्रावणी मेला व रथ मेला का आयोजन नहीं हो सकता। अमिताभ कौशल के अनुसार, केंद्र सरकार ने 30 मई को लॉक डाउन में रियायतों केा लेकर जो आदेश जारी किया है उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अभी भी किसी तरह की पब्लिक गैदरिंग नहीं हो सकती। धार्मिक सभा और समागम के आयोजन भी रोक बरकरार रखी गई है। उनके अनुसार, केंद्र का उक्त आदेश अभी भी लागू है।

इस वर्ष नहीं होगा देवघर श्रावणी मेला का आयोजन

कोरोना का प्रभाव विश्व प्रसिद्ध देवघर श्रावणी मेले पर भी पड़ा है। इस वर्ष श्रावणी मेले का आयोजन नहीं होगा। इसके अलावा राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होनेवाला श्रीजगन्नाथ रथयात्रा मेला भी इस बार नहीं लगेगा। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन सचिव अमिताभ कौशल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही धार्मिक सभा, समागम आदि पर रोक लगा रखी है। ऐसे में श्रावणी मेला व रथ मेला का आयोजन नहीं हो सकता।

आपदा प्रबंधन सचिव ने कहा, केंद्र ने पहले ही आयोजन पर लगा रखी है रोक

अमिताभ कौशल के अनुसार, केंद्र सरकार ने 30 मई को लॉक डाउन में रियायतों को लेकर जो आदेश जारी किया है उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अभी भी किसी तरह की पब्लिक गैदिङ्क्षरग नहीं हो सकती। धार्मिक सभा और समागम के आयोजन भी रोक बरकरार रखी गई है। केंद्र का उक्त आदेश अभी भी लागू है।

बता दें कि देवघर के श्रावणी मेले में देश-विदेश से लाखों लोग जुटते हैं। इससे लाखों लोगों को रोजगार भी मिलता है। मेले के आयोजन नहीं होने से उनके समक्ष रोजगार का संकट भी उत्पन्न हो जाएगा। भगवान जगन्नाथ के विभिन्न मंदिरों में भी बड़ा मेला लगता है, जो इस बार नहीं लग सकेगा।

झारखंड सरकार का बड़ा फैसला

  1. नहीं होगा श्रावणी व रथ यात्रा मेला का आयोजन
  2. आपदा प्रबंधन सचिव ने कहा, केंद्र ने पहले ही आयोजन पर लगा रखी है रोक

बाबा बैद्यनाथ मंदिर के चारों ओर लगी सख्त पहरेदारी

झारखंड सरकार के स्तर से इस वर्ष श्रावणी मेला का आयोजन नहीं करने के निर्णय के बाद जिला प्रशासन ने बैद्यनाथ मंदिर जाने के सभी रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया है। सोमवार की देर रात  देवघर की उपायुक्त  नैंसी सहाय के निर्देश पर कोविड-19 महामारी से बचाव एवं इसके संक्रमण को रोकने के उद्देश्य सभी धार्मिक प्रतिष्ठानों को हरहाल में बंद रखने कड़ा निर्देश दिया है।

मुख्य द्वार तक भी अब नहीं पहुंच सकेंगे श्रद्धालु

दरअसल अनलॉक-1 में मिली रियायत के बाद ऐसा देखा जा रहा था कि बाबा मंदिर के प्रवेश द्वार पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो रही थी। जिला प्रशासन ने यहां जमा हो रहे भीड़ को गंभीरता से लेते हुए कई स्थानों पर ड्रॉप ग्रेट बैरियर लगाने के साथ  दंडाधिकारियों एवं पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति तीन पारियों में करने का निर्णय लिया है।

प्रथम पाली सुबह चार बजे से 9.30 बजे तक किया गया है। द्वितीय पाली 9.00 बजे से शाम तीन बजे तक किया गया है। तृतीय पाली दोपहर 2.30 बजे से रात्रि आठ बजे तक किया गया है। इसके अलावा सीता होटल, लक्ष्मी चौक, बीएन झा पथ, हिन्दी विद्यापीठ, जलसार मोड़ के समीप प्रथम, द्वितीय व तृतीय पाली में दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।

Input : Dainik Jagran

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