पटना. बिहार में एक तरफ सोमवार को जहां नीतीश कुमार के नेतृत्‍व में नई सरकार शपथ ले रही है, वहीं महागठबंधन (Mahagathbandhan) के 21 प्रत्याशी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Elections 2020) में महागठबंधन के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के निर्देश पर महागठबंधन के हारे हुए प्रत्याशी कोर्ट जाएंगे. तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया है कि आरजेडी (RJD) इस मामले में पूरी ताकत के साथ खड़ी है और हरसंभव मदद करेगी. इन 21 प्रत्याशियों में से सबसे ज्यादा आरजेडी के उम्मीदवार हैं. आरजेडी के 14, सीपीआई माले के 3, सीपीआई के 1 और कांग्रेस पार्टी के 3 उम्मीदवार कोर्ट जाने की तैयारी में है.

गौरतलब है कि बीजेपी और जेडीयू के भी तकरीबन एक दर्जन उम्मीदवार एक हजार से कम अंतर से हारे हैं. ऐसे में बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को बेशक बहुमत नहीं मिला हो, लेकिन आरजेडी नेताओं ने अभी तक सरकार बनाने की आस नहीं छोड़ी है. आरजेडी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता मनोज झा के ट्वीट भी इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं.

बीजेपी के उम्मीदवार भी सबसे कम वोट से हारे दूसरी तरफ बिहार विधानसभा का परिणाम इशारा कर रहा है कि सबसे कम अंतर से ज्यादा सीटों पर आरजेडी उम्मीदवारों की ही जीत हुई है. ऐसे में महागठबंधन के प्रत्याशियों का कोर्ट रुख करने से एनडीए और खासकर कम अंतर से हारने वाले बीजेपी प्रत्याशियों के लिए भी कोर्ट जाने का रास्ता खुल सकता है.ये उम्मीदवार जा सकते हैं कोर्टगौरतलब है कि हिलसा विधानसभा सीट से आरजेडी प्रत्याशी शक्ति सिंह यादव मात्र 12 वोटों से जेडीयू उम्मीदवार से हार गए थे. भोरे विधानसभा सीट से जेडीयू के सुनील कुमार ने सीपीआई (माले) उम्मीदवार जितेंद्र पासवान को 462 वोट से पराजित किया था. बेगूसराय के बछवाड़ा विधानसभा सीट पर बीजेपी के सुरेंद्र मेहता ने सीपीआई के अवधेश कुमार राय को 484 मतों के कम अंतर से हराया था. चकाई विधानसभा सीट से निर्दलीय सुमित कुमार सिंह ने आरजेडी के सावित्री देवी को 581 मतों के कम अंतर से हराया. सुमित कुमार सिंह ने एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है.

10 नवंबर को मतगणना के दिन भी महागठबंधन के उम्मीदवारों के द्वारा ईवीएम में पड़े वोट और वीवीपीएटी (वोटर वेरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की पर्ची में मिलान कराने पर जोर दिया जा रहा था. मतगणना के 40 दिनों तक वीवीपीएटी और ईवीएम का डाटा संभाल कर रखा जाता है. ऐसे में कोई भी प्रत्याशी इस दौरान कोर्ट जा सकता है.

Source : News18

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