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BIHAR

थोड़ी देर में आएगा बिहार इंटरमीडिएट का रिजल्ट, बोर्ड की वेबसाइट पर जारी होगा परिणाम

Ravi Pratap

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बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट के नतीजे आज कुछ ही देर में biharboardonline.bihar.gov.in पर घोषित होने वाले है। ऐसे समय में जब कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए अधिकांश परीक्षा बोर्ड अपनी अपनी परीक्षाएं और मूल्यांकन का कार्य स्थगित कर रहे हैं, बिहार बोर्ड 12वीं का रिजल्ट जारी कर रहा है।

हालांकि कोरोना वायरस महामारी की स्थिति के मद्देनजर परीक्षाफल की घोषणा के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन नहीं किया जाएगा बल्कि इसे इंटरनेट पर जारी किया जाएगा। पिछले साल बिहार बोर्ड इंटर का रिजल्ट मार्च के अंतिम सप्ताह में जारी किया गया था। लेकिन इस बार उससे भी जल्दी जारी करके बिहार बोर्ड अपना ही रिकॉर्ड फिर से तोड़ने जा रहा है।

कुछ दिनों पहले बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव महाजन ने कहा था इंटर का रिजल्ट समय पर आएगा। मूल्यांकन केंद्रों पर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए शिक्षकों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कोरोनो को लेकर शैक्षिक सत्र विलंबित नहीं होगा।

आनंद किशोर ने कहा था कि समिति द्वारा इंटर एवं वार्षिक माध्यमिक परीक्षा का रिजल्ट समय पर ही जारी किया जाएगा।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड – बीएसईबी) हर वर्ष इंटरमीडिएट आर्ट्स स्ट्रीम (कला संकाय) की परीक्षा आयोजित करवाता है। बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट आर्ट्स स्ट्रीम की परीक्षा फरवरी माह में आयोजित होगी। इस बार बिहार बोर्ड इंटर के एग्जाम 03 फरवरी, 2020 से 13 फरवरी, 2020 तक चले थे। पिछले साल आर्ट्स संकाय में 76.53 फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे। पहले स्थान पर रोहीणी रानी और मनीष कुमार (463), दूसरे स्थान पर विकास कुमार और महनूर जहां (460), तीसरे स्थान पर हर्षिता कुमारी, निषिकांत झा (458) रहे थे।

आर्ट्स में जहां 330305 छात्राएं पास हुईं, वहीं 225767 छात्र इसमें पास हुए। आर्ट्स में कुल छात्रों की संख्या 556072 थी। आर्ट्स में जहां 136858 छात्र 1st डिविजन में पास हुए, वहीं 255092 छात्र 2nd डिविजन में और 33600 छात्र तृतीय श्रेणी में पास हुए थे।

Input : Live Hindustan

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बिहार: सात साल से था जेल में बंद, परिवार ने सोचा मर गया है बेटा, Corona ने ऐसे मिलवाया

Santosh Chaudhary

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पटना. कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण जहां विश्वभर के लिए आफत बन कर आया है, वहीं बिहार के छपरा का एक परिवार ऐसा भी है जिसके लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है. छपरा में पिछले सात साल से लापता हुए एक व्यक्ति को उसके परिवार से मिलने का मौका मिला है. कोरोना के चलते उत्तर प्रदेश में फंसा पैगा मित्रसेन गांव का यह शख्‍स 7 साल बाद अपने परिवार के पास लौटा सका है. जानकारी के अनुसार, गांव के बाबूलाल दास का बेटा अजय कुमार सात साल पहले अचानक लापता हो गया था. परिवार ने ढूंढ़ने की काफी कोशिश की लेकिन जब तीन साल तक उसका कुछ पता नहीं चला तो परिवार ने उसे मृत मान लिया और तलाश बंद कर दी.

फिर एक दिन अचानक लौटा

नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपी पुलिस अचानक सोमवार को एक युवक को लेकर भेल्दी थाना पहुंची. वहां से जानकारी मिली कि अजय पैगा मित्रसेन गांव का है. फिर अजय को लेकर पुलिस पैगा पहुंची. अजय को सात साल बाद घर की दहलीज पर देख कर उसके मां बाप की खुशी का ठिकाना नहीं था. जिस बेटे को पिछले चार साल से वे मृत मान रहे थे वे जिंदा खड़ा था. पुलिस ने बताया कि घर से लापता होने के बाद अजय भटकता हुआ बाराबंकी पहुंच गया था और यहां पर एक आपराधिक मामले में उसे जेल हो गई थी.

कोरोना के चलते छूटा

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बाद जब कोर्ट ने कुछ कैदियों को पैरोल पर रिका किया तो उस सूची में अजय कुमार का भी नाम था. ऐसे में जेल से छूटने के बाद यूपी पुलिस उसे लेकर सीधे छपरा पहुंची और उसे परिवार से मिला दिया. अब उसके परिवार के साथ ही गांव की भी खुशी का ठिकाना नहीं है. अब ग्रामीणों का कहना कि यदि कोरोना नहीं होता तो शायद अयज कभी भी लौट कर नहीं आता. उसका कारण है कि बाराबंकी में अजय की जमानत करवाने वाला कोई नहीं था और उसके परिवार व किसी अन्य को भी उसके वहां होने की कोई जानकारी नहीं थी.

Input : News18

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गांवों की चहल-पहल पर भारी पड़ा लॉकडाउन, लेकिन अनुशासन देखने लायक

Pratik Ratna

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कहते हैं गांव की सुबह शहर से जल्दी होती है। और ये सत्य भी है क्योंकि यहां सूर्य इंसान को नहीं, इंसान सूर्य को जगाता है। कोरोना का डर तो पुरे विश्व में है पर गांव के किसानों को अभी फसल काटने की भी चिंता है। चैत्र मास खत्म होने वाला है, पछुआ हवा तेज है और खेत गेंहू के पक चुके सुनहरे पौधों से भरी हुई है। ऐसा लगता है मानों पुरी धरती सोने की हो, यहां देखकर आपको यकीन हो जाएगा की सोना जमीं पर उगाया जाता है। वैसे तो गांवों में पुरा मोहल्ला हीं एक परिवार होता है पर लॉकडाउन की वजह से यह परिवार फिलहाल स्थिर है। आजकल सुबह सिर्फ किसान हीं बाहर निकलते हैं क्योंकि दिन में धूप तेज हो जाता है अतः सुबह और शाम में गेहूं की कटाई चलती है।

मजदूरों की कमी के कारण कुछ लोग कड़े दोपहर में भी कटाई करते दिखाई देते हैं। परन्तु गांवों का अनुशासन देखने लायक है। सुबह उठते हीं आंखें मलते पड़ोस वाले चाचा के घर बैठकर चाय पीने वाले आजकल अपने हीं घरों में रहते हैं। लॉक डाउन का पालन करते हैं। गांव के कई मोहल्लों के रास्ते गांव वालों ने बंद कर रखें है। गांवों में हमेशा से हाट में जाकर सब्जियां खरीदने का रिवाज रहा है पर आजकल लोग घर में हीं है। शहरों में घुम घूमकर सब्जी बेचने की प्रथा आजकल गांव में दिख रही है।

पर सुबह 9 बजते हीं हर घर से रामायण धारावाहिक की ध्वनि गूंजने लगती है। यहां तो हर कोई गरीब है फिर भी जान की परवाह हर किसी को होती है। गिने चुने दवाई की दुकानें व चंद किराने की दुकानें खुली हुई रहतीं हैं। शायद आपको आश्चर्य हो परन्तु यहां किराने की दुकान सुबह 6 बजे से 9 बजे तक और शाम को 4 बजे से 6 बजे तक हीं खुलता है। शहर को गांवों की तुलना में हमेशा अधिक शिक्षित माना गया है किंतु यहां अनुशासन में गांव आगे है।

शाम होते-होते हर कोई थक जाता है घरों में बैठे – बैठे। शाम को सब अपनें – अपनें घरों के बाहर बरामदे पर बैठते हैं एकजुट नहीं होते। सोशल डिस्टेंसिंग भी तो जरूरी है। पर यहां जो चर्चा होती है वो आपको चकित कर देगा। यहां हास्य, व्यंग और ज्ञान, सबकुछ संतुलित मात्रा में मिलता है। सबसे अच्छी बात की यहां लॉक डाउन के पालन के लिए पुलिस को अधिक मेहनत की आवश्यकता नहीं पड़ी।

बिहार के वैशाली जिले के एक गांव में अध्ययन के आधार पर।

 

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BIHAR

कोरोना से जिंदगी की जंग जीतकर NMCH से डिस्चार्ज हुए सिवान के चार मरीज, बिहार में कोई नया केस भी नहीं

Ravi Pratap

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बिहार में कोरोना के कहर के बीच सोमवार का दिन राहत लेकर आया। जहां राज्य में एक भी नया मामला नहीं आया, वहीं चार कोरोना संक्रमित लोग ठीक होकर डिस्चार्ज हो गए। लगातार दो रिपोर्ट निगेटिव आने और स्थिति में सुधार होने के बाद सोमवार को शरनम अस्पताल के वार्ड ब्वॉय सूरज कुमार समेत सिवान के चार मरीजों को एनएमसीएच से छुट्टी दे दी गई। इसके साथ ही अस्पताल से स्वस्थ होकर घर जाने वाले मरीजों की संख्या आठ हो गई है।

इससे पहले एम्स पटना से भी एक महिला स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुकी है। सोमवार को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों का चेकअप करने के बाद घर जाने की इजाजत दे दी गई। सभी को चौदह दिनों तक घर पर ही आइसोलेशन में रहने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले गौरीचक की महिला तथा फुलवारीशरीफ और बटाऊकुआं के युवक भी स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

सूबे में सबसे पहले दीघा निवासी अनिता एम्स से स्वस्थ होकर घर जा चुकी है। डॉक्टरों ने बताया कि जगनपुरा निवासी सूरज शरनम अस्पताल का कर्मी है, जो कि मो. सैफ के संपर्क में आने से संक्रमित हो गया था, जबकि सिवान के चारों युवकों की ट्रैवल हिस्ट्री है। स्थिति बिगड़ने पर चारों को सिवान में भर्ती कर सैंपल जांच के लिए आरएमआरआई भेजा गया था। जहां रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर सभी को एनएमसीएच के आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती कराया गया था। स्वस्थ होने के बाद सभी मरीजों ने कहा कि डॉक्टरों के प्रयास और अस्पताल में अच्छी व्यवस्था के कारण वे अब बेहतर महसूस कर रहे हैं।

मरीजों ने लोगों से कोरोना से सावधान रहने और सोशल डिस्टेंस का पालन करने की सलाह दी है। सोमवार को डिस्चार्ज होनेवालों में 38 वर्षीय मनोज साह (कतर), 29 वर्षीय राजा यादव (नाइजीरिया), 36 वर्षीय भोला शर्मा और 25 वर्षीय मो. मिराज हुसैन (दुबई)की ट्रैवेल हिस्ट्री है। सिवान निवासी चारों पीड़ितों को डॉ. उमाशंकर प्रसाद, डॉ. संजय कुमार व दो को नोडल पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार सिन्हा की यूनिट में भर्ती कराया गया था। अधीक्षक डॉ. निर्मल कुमार सिन्हा ने बताया कि ठीक होने के बाद सभी को उसके घर सिवान एम्बुलेंस से भेजा गया है। जहां सभी 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहेंगे। जिसकी सूचना सिवान जिले के सिविल सर्जन को भी भेज दी गई है।

Input : Live Hindustan

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