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BIHAR

दुखद : वर्ष 2019 की इंटर स्टेट टाॅपर रोहिणी की दिल्ली में ट्रेन से क’ट कर मौ’त

Santosh Chaudhary

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बेतिया. साल 2019 की इन्टर परीक्षा (Bihar Inter Exam) में कला संकाय में बिहार टॉपर बनने वाली छात्रा रोहिणी की मौ’त दिल्ली में ट्रेन से क’टकर हो गई है.

इंटर के नतीजों में अव्वल आने के बाद वो आईएएस (IAS) की तैयारी के लिए पढ़ाई करने दिल्ली (Delhi) गई थी. मृतका पश्चिमी चंपारण के मझौलिया थाना क्षेत्र के सेनुवरिया पंचायत अंतर्गत दुबौलिया गांव निवासी एलआईसी (LIC) एजेंट प्रदीप कुमार सिंह की बेटी थी.

घने कोहरे के कारण हुआ हादसा

दिल्ली में आईएएस की तैयारी कर रही पुत्री रोहिणी रानी की मौत रेल दुर्घटना में दिल्ली में उस वक्त हुई जब वो रेलवे फाटक के दूसरे लाइन पार कर रही थी. इसी क्रम में वो ट्रेन की चपेट में आ गई जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई. मृतका के पिता प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि 8 जनवरी को सुबह रोहिणी रानी दिल्ली में रेलवे फाटक पार कर रही थी. उसके सामने से लाइन नंबर 1 से ट्रेन गुजर रही था. अधिक कोहरा होने के कारण दूसरे लाइन पर जैसे ही गयी थी कि उसे सामने से आते हुए ट्रेन दिखाई नहीं दिया तभी वह ट्रेन की चपेट में आ गई जिससे घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई.

पोती की मौत की खबर सुनकर दादा भी हुए बीमार

रोहिणी रानी ने बेतिया शहर के संत टेरेसा विद्यालय से मई 2019 में 463 अंक इंटर में लाकर बिहार टॉपर बनी थी. उसके पिता प्रदीप कुमार सिंह एलआईसी एजेंट हैं. हाल हीं में रोहिणी का दिल्ली में डीयू के एक कॉलेज में नामांकन हुआ था. वो आईएस की तैयारी के लिए कोचिंग करने जा रही थी. प्रदीप कुमार सिंह की पत्नी सरोज देवी आंगनबाड़ी सेविका है. मृतका के 80 वर्षीय दादा मुंशी सिंह को जैसे ही इस हादसे की खबर मिली उनकी हालत गंभीर हो गई.

हिंदी ऑनर्स की पढ़ाई का था सपना

पश्चिम चम्पारण जिला के संत टेरेसा बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बेतिया की छात्रा रोहिणी रानी ने टॉपर बनने के बाद कहा थी कि उसका सपना हिंदी ऑनर्स से ग्रेजुएशन करना और जिस स्कूल में पढाई की है उसी स्कूल में शिक्षिका बनना है. रोहिणी रानी की मनपसंद साहित्यकार महादेवी वर्मा थी एवं गौरा और सोना इनकी फेवरेट कहानियां थीं.

 

 

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पटना में 25 लाख में बिक रही थी एक छिपकली, इंटरनेशनल मार्केट में एक करोड़ है कीमत

Muzaffarpur Now

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पटना पुलिस ने गुरुवार को जानवरों की तस्करी से जुड़े एक गिरोह को पकड़ा है. पुलिस ने तस्करों को टोके गेको दुर्लभ प्रजाति की एक छिपकली की तस्करी करते हुुए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार होने केे बाद तस्करों के पास से जो छिपकली मिली है उसे बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का बताया जा रहा है. छिपकली की बाजार किमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है. पटना पुलिस के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है . इसलिए लोग इसका व्यापार अवैध रूप से करते है ताकि ज्यादा मुनाफा कमा सकें. बिहार में जंगली जानवरों की तस्करी को लेकर बढ़ती घटनाओं को देख पुलिस अब हरकत में नजर आ रही है. इसी के तहत राजधानी पटना में पुलिस को यह बड़ी कामयाबी हाथ लगी है.

बरामद टोके गोके प्रजाति की छिपकली.

आपको बता दें कि टोके गोके प्रजाति भारत सही कई अन्य देशों में दुर्लभ प्रजाति है. जिसके चलते भारत में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत इस प्रजाति की छिपकली का व्यापार करना अवैध है . अगर कोई व्यापार करता है तो उसे तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. इस प्रजाति की छिपकली का इस्तेमाल दवाईयां और तेल तैयार करने के लिए किया जाता है जो मुख्य रूप से त्वचा और किडनी की रक्षा के लिए काम आता है.

क्यों है छिपकली की इतनी कीमत

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक टोके गेको प्रजाति की इस छिपकली को विदेश भेजने की तैयारी थी. विदेश में इस छिपकली की काफी डिमांड है. दरअसल छिपकली की इस खास प्रजाति से ब्लड कैंसर की दवाएं बनाई जाती है. सूत्रों के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुंचते-पहुंचते इस छिपकली की कीमत एक करोड़ से भी अधिक हो जाती है.  फिलहाल वन विभाग ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है. शुरुआती जांच और तस्करों से पूछताछ में जो बातें सामने आई है, उसके मुताबिक इस रैकेट का संबंध इंटरनेशल गैंग से हो सकता है.

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BIHAR

बच जाएगा बेनीपुरी का घर, पूरा होगा रघुवंश बाबू का सपना

Muzaffarpur Now

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अब औराई प्रखंड के बेनीपुर गांव में समाजवाद के पुरोधा, कलम के जादूगर रामबृक्ष बेनीपुरी द्वारा बनवाया गया उनका ऐतिहासिक मकान और उनकी समाधि बच जाएगी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं समाजवादी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के पत्र के आलोक में राज्य सरकार ने बेनीपुर गांव में उनके जमींदोज हो रहे मकान के चारों तरफ रिंग बांध बनाने की घोषणा की है। इस मकान की दीवारें जयप्रकाश नारायण, प्रभावती देवी, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, शिवपूजन सहाय, फिल्मकार पृथ्वीराज कूपर एवं सूरजनारायण सिंह समेत अनेक समाजवादी राजनेताओं और साहित्यकारों की मेजबानी की साक्षी हैं। बागमती तटबंध के निर्माण के बाद बेनीपुर गांव वीरान हो गया। सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए। बेनीपुरी का मकान और दरवाजे पर उनका समाधि स्थल बागमती की रेत में जमींदोज होने लगा। विरासत को बचाने व संजाने की मुख्यमंत्री की पहल से मुजफ्फरपुर और खासकर बेनीपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। जल संसाधन विभाग के आदेश पर बागमती प्रमंडल के मुख्य अभियंता शांति रंजन प्रसाद ने बेनीपुरी जी के घर के चारों तरफ रिंग बांध बनाने का प्रस्ताव भेजा है।

रघुवंश बाबू ने संरक्षण का भरोसा दिया था

रघुवंश प्रसाद सिंह 23 दिसंबर 2016 को ऐतिहासिक मकान के सामने बेनीपुरी जयंती समारोह में शामिल हुए। बेनीपुरी चेतना समिति की ओर से डॉ. महेंद्र बेनीपुरी एवं महंथ राजीव रंजन दास ने बेनीपुरी स्मारक के विकास एवं मकान को सुरक्षित कराने की मांग की थी। रघुवंश प्रसाद सिंह ने विरासत के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास की घोषणा की थी। राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने बताया कि रघुवंश प्रसाद सिंह ने अंतिम सांस लेने से पहले एक पत्र उनके विभाग को भी लिखा, जिसमें बेनीपुरी के मकान और समाधि को बचाने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री ने रघुवंश बाबू के पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण के शीघ्र बाद उनके पत्र के ऐसे कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया है, जो संभव हैं।

पुल और सड़क से जोड़ने का प्रस्ताव

बेनीपुरी की जयंती पर हर साल 23 सितंबर को सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और साहित्यकार नाव से बागमती नदी पार कर बेनीपुर गांव में समारोह आयोजित करते रहे हैं। गांव की सड़क, स्कूल, अधिकांश मकान एवं बिजली के खंभे भी जमींदोज हो चुके हैं। गांव पहुंचने में भारी परेशानी होती है और ऐतिहासिक धरोहर के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। जल संसाधन विभाग ने रिंग बांध निर्माण कर उसके अंदर बेनीपुरी के मकान के चारों ओर दीवार बनाने और उस पर ग्रिल लगाने का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में मकान तक पहुंचने के लिए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के माध्यम से पुल और संपर्क सड़क बनवाने का भी सुझाव दिया गया है। तत्काल पुल व संपर्क सड़क पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

यह घर नहीं, बेनीपुरी की समाधि

एक बार रामधारी सिंह दिनकर ने घर को देखते हुए बेनीपुरी जी से कहा था, अगर ऐसा घर शहर में बनवाते तो पर्याप्त किराया मिलता। बनेपुरी ने जवाब दिया था, यह घर नहीं मेरी समाधि है। यही बात उन्होंने दो जनवरी 1953 को जयप्रकाश नारायण के सामने तब दोहरायी, जब उन्होंने कहा था कि यह घर नहीं महल है। नाटककार बेनीपुरी इंग्लैंड यात्रा के दौरान 16 मई 1951 को शेक्सपीयर के गांव पहुंचे थे। एवन नदी के किनारे म्यूजियम और स्मारक की तरह सजाए गए शेक्सपीयर का घर देखकर बेनीपुरी भावुक हो गए। वे लिखते हैं-मैं भी एक छोटा सा नाटककार हूं। इस तरह शेक्सपीयर मेरे गोत्र के थे-यह भावना और भाव विभोर बना रही है….. क्या हम राजापुर में तुलसीदास की और बिस्फी में विद्यापति की स्मृति में कुछ ऐसा ही आयोजन नहीं कर सकते हैं?

Source : Hindustan

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BIHAR

रघुवंश बाबू के नाम होगी म्यूजियम की गैलरी, दस्तावेज हमेशा रखेंगे जीवंत

Muzaffarpur Now

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पूर्व केंद्रीय मंत्री व कद्दावर राजनेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) का रविवार को इलाज के दौरान निधन हो गया। दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (Delhi AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली। सोमवार को वैशाली जिले के महनार हसनपुर घाट पर राजकीय सम्‍मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। रघुवंश बाबू की यादों को सहेजने के लिए वैशाली नगवां म्यूजियम ने अपनी एक गैलरी उनके नाम कर दी है।

जीवंत बनाए रखने के लिए ‘डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह गैलरी’

म्यूजियम में एक गैलरी का नामकरण डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह गैलरी करने का ऐलान उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए सोमवार को किया गया। म्यूजियम के संस्थापक सचिव चितरंजन पटेल ने कहा कि डॉ. रघुवंश बाबू जैसे असाधारण व्यक्तित्व को वह हमेशा जीवंत बनाए रखने का काम करेंगे। चितरंजन ने कहा कि डॉक्टर रघुवंश के चहने वाले देश के हर कोने के लोग हैं।

राजनीतिक जीवन की गतिविधियां के साथ होगा बहुत कुछ

नगवां म्यूजियम में उनके नाम पर बनाई गयी गैलरी में डॉ रघुवंश बाबू के जीवन से जुड़ी तथ्यात्मक रिपोर्ट, उनके छायाचित्र, वक्तव्यों से संबंधित अखबारी कतरन, संसद में संबोधन से जुड़े दस्तावेज, राजनीतिक जीवन की गतिविधियां, केंद्रीय मंत्री रहते उनके द्वारा संचालित मनरेगा, पीएम ग्रामीण सड़क निर्माण योजना एवं अन्य योजनाओं से संबंधित उपलब्धि को संग्रहीत किया जाएगा। इससे आने वाली पीढ़ी के साथ म्यूजियम पहुंचने वाले पर्यटक भी उनकी जीवनी से रूबरू हो सकेंगे।

विधानसभा परिसर में दी श्रद्धां‍जलि

इसके पहले रघुवंश प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर रविवार की शाम में बिहार की राजधानी पटना पहुंचा, जिसके बाद विधानसभा परिसर ले जाया गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, स्पीकर विजय कुमार चौधरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तथा बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी सहित कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उसके बाद आम लोगों के दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को कौटिल्या नगर स्थित आवास में रखा गया।

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