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दुनिया में पहली बार ‘Living Coffin’ में किया गया अंतिम संस्‍कार, अनूठी चीज से बना है ये ताबूत

Muzaffarpur Now

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नीदरलैंड: शव के डीकंपोजिशन में तेजी लाने के लिए नीदरलैंड में एक अनूठा प्रयोग किया गया है. यहां एक ‘जीवित ताबूत’ (Living Coffin) में एक व्‍यक्ति का अंतिम संस्‍कार किया गया. ऐसे अनूठे ताबूत में अंतिम संस्‍कार (Last Rites) किए जाने का ये दुनिया का पहला मामला है.

First deceased buried in 'living coffin' - Teller Report

इस ताबूत को ‘Living Cocoon’ नाम दिया गया है. यह ताबूत मायसेलियम (Mycelium) से बना है, जो कि मशरूम की जड़ होती है.

डेल्‍फ्ट टेक्‍नीकल यूनिवर्सिटी की स्‍टूडेंट लेबोरेटरी में इस ताबूत को बनाने वाले बॉब हेंड्रिक्‍स ने कहा, ‘यह दुनिया का पहला जीवित ताबूत है और पिछले शनिवार को नीदरलैंड में पहली बार एक इंसान के शरीर को खाद में तब्‍दील करने के लिए इसका इस्तेमाल हुआ.’

Video] Start-Up Develops One Of A Kind 'Living Coffin' That Becomes One With Nature

इन ताबूतों की मदद से शरीर दो से तीन वर्षों में डीकंपोज (Decomposition) हो सकता है जबकि पारंपरिक ताबूत में ऐसा होने में 10 साल लग जाते हैं. यह ताबूत 30 से 45 दिनों के भीतर गायब हो जाएगा.

हेंड्रिकैक्स ने माइसेलियम को प्रकृति का ‘सबसे बड़ा रिसाइकलर’ बताते हुए कहा कि शरीर को दफनाने के लिए इस ताबूत का उपयोग करना ‘सबसे अच्‍छा प्राकृतिक तरीका’ है. उन्‍होंने आगे कहा, ‘इसके कारण अब हम अपने शरीर, ताबूत और इसके साथ जाने वाली अन्‍य चीजों के साथ पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करेंगे, बल्कि यह तो शरीर को खाद में बदलकर प्रकृति को और समृद्ध करेगा.’

हेंड्रिक्‍स ने कहा कि यह कास्केट (Casket) किसी की जेब पर बोझ भी नहीं डालेगा क्योंकि इसकी कीमत करीब 1500 यूरो (8 लाख रुपये या 1,764.87 अमेरिकी डॉलर) है.

Source : Zee News

WORLD

चीन में बिकने लगा है कोरोना वायरस का टीका, जानिए कितनी है कीमत और कौन खरीद सकता है इसे

Ravi Pratap

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पूर्वी चीन के एक शहर में क्लिनिकल ट्रायल से अलग प्रयोग के तौर पर हाई रिस्क ग्रुप के लोगों को कोरोना का टीका बेचा जा रहा है। आपातकालीन टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीका 60 डॉलर (करीब 4400 रुपए) में दिया जा रहा है। बीजिंग बेस्ड सिनोवैक बायोटेक की ओर से विकसित किए जा रहे टीका CoronaVac को पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत के जियाशिंग शहर में स्वास्थ्यकर्मियों, महामारी की रोकथाम में जुटे लोगों, जनसेवा में जुटे लोगों और पोर्ट इस्पेक्टर्स को दिया जा रहा है।

चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रायोगिक टीका बाद में आम नागरिकों को लगाया जाएगा। जियाशिंग सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कहा है, ”चाइनीज कंपनी सिनोवैक बायोटेक लिमिडेट की ओर से विकसित किए गए टीके को 18 से 59 साल के लोगों को 400 युयान (59.5 डॉलर) में दिया जाएगा।”

जियाशिंग सीडीसी ने यह भी कहा है कि वैक्सीन को आधिकारिक रूप से मार्केटिंग के लिए मंजूरी नहीं मिली है, इसे अभी केवल अर्जेंट यूज के लिए मंजूर किया गया है। वैक्सीन को दो डोज हैं जो 14-28 दिनों के अंतराल पर लगाया जाता है।

रॉयटर्स ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा, ”कंपनी का वैक्सीन ब्राजील, इंडोनेशिया और तुर्की में आखिरी चरण के ट्रायल में है। कंपनी ने कहा है कि फेज 3 का अंतरिम विश्लेषण नवंबर की शुरुआत में आ सकता है।” जून के अंत में चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन (NHC) ने चाइनीज वैक्सीन मैनेजमेंट कानून के तहत हाई रिस्क लोगों के लिए वैक्सीन के इमर्जेंसी यूज को मंजूरी दी थी।

25 सितंबर को एक टॉप हेल्थ ऑफिसर ने कहा कि बीजिंग को इमर्जेंसी यूज के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन से सहमति और समर्थन मिला है। जुलाई से अब तक चीन ने प्रायोगिक टीका हजारों लोगों को लगाया है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने एचटी से कहा था कि बीजिंग ने घरेलू प्राधिकरण के फैसले पर टीकाकरण शुरू किया था।

Input: Live Hindustan

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INDIA

क्या है वो ब्लू फ्लैग, जो पहली बार भारत के 8 समुद्र तटों को मिला है

Muzaffarpur Now

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हाल ही में भारत के 8 समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग मिला है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के समुद्री तटों को पहली बार ये मान्यता मिली है. इसके साथ ही हमारा देश भी उन 50 देशों की लिस्ट में शामिल हो गया, जिनके पास ये फ्लैग है. बता दें कि ये मान्यता दुनिया के सबसे साफ-सुथरे बंदरगाहों को दी जाती है. जानिए, क्या है ब्लू फ्लैग और किन समुद्री तटों को ये दर्जा मिला है.

मिला ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेट

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने रविवार को देश के एक या दो नहीं, बल्कि एक साथ 8 समुद्र तटों को ब्लू फ्लैग मिलने की घोषणा की. स्वच्छ समुद्री तटों के लिए मिलने वाला ये सम्मान डेनमार्क का ‘फाउंडेशन फॉर एनवायरमेंट एजुकेशन’ (FEE) देता है. ये संस्था ग्लोबल स्तर पर अपनी पारदर्शिता और सख्त मापदंडों के लिए जानी जाती है, जो बिना फर्क समुद्री तटों की बारीकी से पड़ताल करती और तब उन्हें फ्लैग देती है. कुल 33 अलग-अलग मापदंडों पर समुद्री तट की पड़ताल होती है.

किन तटों को मिली मान्यता
अब तक देश के किसी भी समुद्री तट को इतना स्वच्छ नहीं माना गया था कि उसे ब्लू फ्लैग मिल सके. साल 2018 में देश के पर्यावरण मंत्रालय ने 13 समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग के करीब पाया और इनमें से भी 8 तटों के नाम डेनमार्क भेजे गए. वहां संस्था ने इन सभी 8 समुद्र तटों को अपने मानकों पर खरा पाया और ये फ्लैग दिया. ये फ्लैग पाने वाले बीचों में शिवराजपुर (गुजरात), घोघला (दीव), कासरकोड और पदुबिद्री (दोनों कर्नाटक में), कप्पड़ (केरल), रुशिकोंडा (आंध्र), गोल्डन (ओडिशा) और राधानगर (अंडमान) हैं. साथ ही देश को समुद्री तटों की स्वच्छता बनाए रखने की कोशिश के लिए थर्ड इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिस अवार्ड भी मिला.

श को समुद्री तटों की स्वच्छता बनाए रखने की कोशिश के लिए थर्ड इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिस अवार्ड भी मिला (Photo- Twitter)

एशिया में 4 ही देश इसके योग्य
वैसे बता दें कि एशिया में भारत को मिलाकर केवल 4 देशों के पास ब्लू फ्लैग आ सका है. इनमें जापान, यूएई और साउथ कोरिया हैं. ब्लू फ्लैग सूची के तहत फिलहाल स्पेन के पास दुनिया में सबसे ज्यादा 566 समुद्री तट हैं जो साफ हैं, जबकि ग्रीस के 515 और फ्रांस के 395 तटों को यह दर्जा मिला हुआ है. यानी इन तटों में प्रदूषण का स्तर काफी कम है.

स्पेन हमेशा सबसे आगे 
समुद्री तटों को स्वच्छ बनाने की मुहिम चलाने वाली संस्था FEE एक गैर-सरकारी संस्था है, जिसके 60 सदस्य देश हैं. हर साल FEE अपने सदस्य देशों के तटों को स्वच्छता के आधार पर चुनती और फ्लैग देती है. साल 1987 से तटों को साफ बनाने के लिए प्रोत्साहित करने को दिए जाने वाले इस पुरस्कार में स्पेन शुरुआत से ही सबसे आगे रहा है. बता दें कि ये देश पिछले तीन दशकों से लिस्ट में सबसे ऊपर रहा, यानी यहां के समुद्र तट सबसे साफ-सुथरे माने जाते हैं.

किन मानकों पर मिलता है फ्लैग 
किसी समुद्र तट को ब्लू फ्लैग का खिताब यूं ही नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए कई मानकों पर खरा उतरना होता है. इसमें पानी का स्वच्छ होना ही काफी नहीं, बल्कि ये भी चेक किया जाता है कि बीच के आसपास लोगों की सुरक्षा का कैसा इंतजाम है. इसके लिए तट पर चौबीसों घंटे लाइफ गार्ड्स की तैनाती होनी चाहिए ताकि दुर्घटना रोकी जा सके. साथ ही दुर्घटना की स्थिति में फर्स्ट एड का भी बंदोबस्त हो.

साथ ही साथ पानी के भीतर रहने वाले जीव-जंतुओं और वनस्पति की सुरक्षा के बारे में सोचा जाता है. बीच की स्वच्छता बनाए रखने के लिए एक मैनेजमेंट कमेटी हो, जो लगातार इस बारे में आम जनता को सचेत करती रहे. बीच घूमने आने वालों के लिए डस्टबिन के लेकर सफाई के दूसरे इंतजाम हों. समुद्री तटों पर लोग कुत्ते टहलाने भी लाते हैं. लिहाजा ये ध्यान में रखना होता है कि पालतू जानवरों के लिए भी बीच के कुछ नियम हों, जिनका पालन पशु के मालिक को करना होता है.

Source : News18

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WORLD

चीन को दोस्‍त पाकिस्‍तान ने भी दिया झटका, बैन किया चाइनीज ऐप TikTok

Muzaffarpur Now

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पाकिस्‍तान (Pakistan) ने भी चीनी ऐप टिकटॉक (TikTok) को बैन कर दिया है. पाकिस्तान के जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, टिक टॉक द्वारा गैरकानूनी ऑनलाइन कंटेंट पर रोक लगाने के लिए कोई भी कदम न उठाए जाने के कारण ये कार्रवाई की गई है. वीडियो शेयरिंग ऐप को पाकिस्‍तान में अश्‍लीलता फैलाने के कारण ब्‍लाक किया गया है. हालांकि पाकिस्‍तान टेलीकम्‍यूनिकेशन अथॉरिटी का यह भी कहना है कि उसने सुरक्षा नहीं, संस्‍कृति के लिए यह फैसला किया है. अगर टिकटॉक अपने कंटेंट में सुधार करेगा तो अथॉरिटी अपने फैसले पर दोबारा विचार करेगी.

Pakistan considers TikTok ban over 'vulgar content' - Nikkei Asia

अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के सूचना मंत्री शिबली फराज ने द न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि प्रधानमंत्री इमरान खान भी टिकटॉक को बैन (TikTok Ban) करना चाहते हैं. लेकिन उन्होंने साफ किया कि यह डेटा सिक्योरिटी की वजह से नहीं बल्कि दूसरे कारणों से बैन किया जा सकता है. इसके पीछे की वजह है देश में फैल रही अश्लीलता. टिकटॉक के साथ इस तरह के अन्य ऐप को भी बैन करने पर विचार किया जा रहा है.

भारत और अमेरिका में टिकटॉक बैन

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम इमरान खान ने पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) को आदेश दिया है कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऐप्स को अश्लीलता से मुक्त किया जाए. पीटीए ने हाल ही में पांच डेटिंग ऐप्स को बैन किया था जिन पर नग्नता और समलैंगिकता फैलाने का आरोप था. वहीं, सीमा विवाद के बीच हाल ही में भारत ने टिकटॉक सहित 100 से अधिक चाइनीज ऐप्स को बैन कर दिया, जिससे चीन बौखला गया. भारत ने डेटा सुरक्षा, देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए इन ऐप्स को खतरनाक बताया था. इसके बाद अमेरिका ने भी टिकटॉक को बैन कर दिया है.

Pakistan to block social media app TikTok for "immoral" content, say  sources - The Financial Express

भारत ने अब तक 200 से ज्‍यादा ऐप किए बैन, जानिए क्यों उठाया गया ये कदम

भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने लगभग एक महीने पहले 118 और चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले इन ऐप्स पर हुई ये तीसरी कार्रवाई है. 118 की सूची में जो ऐप और गेम शामिल हैं, उनमें PUBG मोबाइल लाइट, लूडो वर्ल्ड, APUS लॉन्चर, Ulike, AliPay, सुपर क्लीन- मास्टर ऑफ क्लीनर, फोन बूस्टर, टेनसेंट वेयुन, बाइडू, फेसयू, ऐपलॉक लाइट और क्लीनर- फोन बूस्टर शामिल हैं. यह कदम भारत सरकार के 29 जून को 59 ऐप पर प्रतिबंध लगाने के बाद आया था. जिसके लगभग एक महीने बाद 47 और ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था.

ये ऐप भारत में पहले से प्रतिबंधित ऐप्स की क्लोन ऐप थीं. यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के संबंधित प्रावधानों (सार्वजनिक पहुंच से सूचना की पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) के नियम 2009 की धारा 69 ए के तहत मिली शक्तियों के आधार पर भारत की सुरक्षा, अखंडता और रक्षा के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए उठाया गया था.

Source : News18

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