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दुल्हन की तरह सजा मां वैष्णो का दरबार, जयकारों से गूंज रहा त्रिकुटा पर्वत

Ravi Pratap

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चैत्र नवरात्र में मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए भक्तों में काफी उत्साह है। कोरोना संकट के बावजूद प्रशानिक दिशानिर्देशों के अनुसार रोजाना भक्तों की आमद में बढ़ोतरी हो रही है। भक्त मां की पवित्र पिंडियों के दर्शन कर जारी शतचंडी महायज्ञ में भी हाजिरी लगा रहे हैं। उधर, सुबह-शाम की अटका आरती में प्रसिद्ध गायक महामाई की महिमा का गुणगान कर रहे हैं, जिससे धर्मनगरी सहित यात्रा मार्ग और दरबार मां की भक्ति में लीन होन चुका है।

मां वैष्णो देवी का भवन, दरबार जयकारों से गूंज रहा है। वीरवार को भवन में अटका आरती के उपरांत प्रसिद्ध गायक लखविंदर वडाली ने मां की महिमा का गुणगान किया। इस दौरान रेहमतां दी मीं बरसा दातिए… व मैनू बल नई तोड़ निभावन दा..आदि भेंटें प्रस्तुत कर भक्तों को झूमने को मजबूर कर दिया।

शाम को गायिका उमा लहरी ने भी भेंटों से समां बांधा। इसके अटका आरती का लाइव प्रसारण हो रहा है, जिस कारण देश-दुनिया में मौजूद भक्त मां के दर्शन कर रहे हैं। उधर, मुख्य बस अड्डे पर भी शतचंडी महायज्ञ जारी है।इस बीच कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है। समूचे यात्रा मार्ग सहित भवन व धर्मनगरी में सुरक्षा चाक चौबंद है।

आठ बजे तक दस हजार से अधिक भक्तों ने भवन की ओर किया प्रस्थान

चैत्र नवरात्र पर मां के भक्तों में काफी उत्साह है। प्रदेश सहित देशभर के भक्त धर्मनगरी में पहुंच कर मां के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। तीसरे नवरात पर देर शाम आठ बजे तक पंजीकरण कक्ष के अनुसार दस हजार से अधिक भक्त भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। पहले नवरात्र में 16 हजार और दूसरे में 12 के करीब भक्तों ने माथा टेका था।

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क्या आप जानते हैं भगवान शिव के इन 4 प्राचीन मंदिरों के बारे में? ये है इनकी खासियत

Ravi Pratap

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सोमवार (Monday) का दिन भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित है. ऐसे में कहा जाता है कि अगर सोमवार को भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामना पूरी होती है. शिव सदा अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं. मान्यता है कि भगवान शिव को खुश करने के लिए सोमवार को सुबह उठकर स्नान करके भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए. ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. लाखों शिव भक्त देश के प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में भोले शंकर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

वैसे तो सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन शिव मंदिर उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ मंदिर को समझा जाता है लेकिन, भारत के कोने-कोने में कुछ ऐसे भी प्रसिद्ध और प्राचीन शिव मंदिर हैं, जहां भक्त घूमने के लिए जा सकते हैं. भारत के अलग-अलग शिव मंदिरों को महाकाल मंदिर, नटराज मंदिर और महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है. वैसे कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अभी मंदिरों में जानें से बचें लेकिन आइए आपको घर बैठे बताते हैं कुछ प्राचीन शिव मंदिरों के बारे में.

सोमनाथ मंदिर, गुजरात

कहा जाता है कि केदारनाथ के बाद भारत में सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है गुजरात का सोमनाथ मंदिर. कई लोगों का मानना है कि भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है सोमनाथ मंदिर. सोमनाथ मंदिर में करोड़ों भारतीय और विदेशी शिव भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. समुद्र किनारे स्थित यह शिव मंदिर चालुक्य शैली वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना माना जाता है. अगर आप गुजरात घूमने के लिए जा रहे हैं, तो आपको सोमनाथ मंदिर जरूर जाना चाहिए.

भीमाशंकर मंदिर, पुणे

भीमाशंकर शिव मंदिर महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है. यहीं से भीमा नदी भी निकलती है. भीमाशंकर मंदिर नागर शैली की वास्तुकला से बनी एक प्राचीन और नई संरचनाओं का समिश्रण है. इस मंदिर से प्राचीन विश्वकर्मा वास्तुशिल्पियों की कौशल श्रेष्ठता का पता चलता है. इस सुंदर मंदिर का शिखर नाना फड़नवीस द्वारा 18वीं सदी में बनाया गया था. कहा जाता है कि महान मराठा शासक शिवाजी ने इस मंदिर की पूजा के लिए कई तरह की सुविधाएं प्रदान की थीं.

रामेश्वरम मंदिर तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम इलाके में स्थित है. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से भी एक है. रामेश्वरम का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है. रामेश्वरम का मंदिर भारतीय निर्माण-कला और शिल्पकला का एक सुंदर नमूना है. इसके प्रवेश-द्वार चालीस फीट ऊंचा है. प्राकार में और मंदिर के अंदर सैकड़ौ विशाल खंभें है, जो देखने में एक-जैसे लगते हैं.

काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश

भारत में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है काशी विश्वनाथ मंदिर. यह बनारस में स्थित है. कहा जाता है कि महाशिवरात्री के दिन यहां के अन्य मंदिरों से शोभा यात्रा, ढोल नगाड़े के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है. इस मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि जो काशी विश्वनाथ में अपनी जीवन की अंतिम सांस लेता है, वो पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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इस रामनवमी पर 9 सालों बाद पांच ग्रहों का ये दुर्लभ शुभ संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Ravi Pratap

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चैत्र नवरात्रि 2021 का पर्व पूरे देश में मनाया जा रहा है. जिसका आज छठा दिन है. इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि की रामनवमी 21 अप्रैल 2021 को है. इस बार चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन 21 अप्रैल को रामनवमी के दिन 2013 (9 वर्ष) के बाद पांच ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है. यह दुर्लभ संयोग इस दिन की शुभता में वृद्धिकारक होगा. इससे पहले यह संयोग वर्ष 2013 में बना था.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म कर्क लग्न और अभिजीत मुहूर्त में मध्यान्ह 12 बजे हुआ था. संयोगवश इस दिन अश्लेषा नक्षत्र, लग्न में स्वग्रही चंद्रमा, सप्तम भाव में स्वग्रही शनि, दशम भाव में सूर्य, बुध और शुक्र है और दिन बुधवार रहेगा. ग्रहों की यह स्थिति इस दिन को अति मंगलकारी बनाएगी. इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई पूजा और खरीददारी, अत्यत लाभकारी और शुभकारी होगी. भक्त गण /उपासक पूजा के दौरान मास्क लगा सकते हैं.

ज्योतिष के मुताबिक़ भगवान श्रीराम की राशि और लग्न दोनों कर्क है. लग्न में स्वग्रही चंद्रमा का होना सुख शांति प्रदान करेगा. इसके साथ अश्लेषा नक्षत्र भी दिन की शुभता को बढ़ाएगा. चूंकि भगवान श्रीराम का जन्म मध्यान्ह 12 बजे हुआ था, इसलिए इनकी आरती भी इसी समय अर्थात 12 बजे करना उत्तम और शुभदायक होगा.

चैत्र नवरात्रि 2021 राम नवमी शुभ मुहूर्त

  • चैत्र नवरात्रि नवमी तिथि का प्रारम्भ 21 अप्रैल, 2021 को 00:43 बजे से
  • चैत्र नवरात्रि का नवमी तिथि समाप्त 22 अप्रैल, 2021 को 00:35 बजे पर
  • रामनवमी की पूजा और हवन के लिए शुभ मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक
  • राम नवमी मध्याह्न समय : दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर

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चैती छठ महापर्व कल से, घर पर ही अर्घ्य देंगी व्रतियां

Ravi Pratap

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नवरात्र के आगमन के साथ चैत्र छठ महापर्व की भी तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। 16 अप्रैल को नहाय-खाय के साथ नेम-निष्ठा वाला यह लोक आस्था का पर्व शुरू होगा। चैती छठ के उमंग पर इस साल भी कोरोना ने पानी फेर दिया है। संक्रमण के भय के कारण इस साल व्रतियां घरों में ही अर्घ्य देने की तैयारी कर रही हैं। पिछले साल लॉकडाउन के बीच व्रतियों ने स्थानीय छठ घाटों पर अर्घ्य दिया था।

चार दिवसीय सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ पूजा के निमित 16 अप्रैल को कद्दू-भात होगा। 17 अप्रैल को खरना है। 18 अप्रैल को अस्ताचलगामी सूर्य और 19 अप्रैल की सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर यह पर्व संपन्न होगा। इस साल लोग आसपास के छठ घाटों पर जाने से परहेज कर रहे हैं। व्रतियां घरों पर ही हौज बनाकर या प्लास्टिक के एयर ट्यूब में पानी भर कर अर्घ्य देने की तैयारी में हैं। छत और आंगन में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए छठ महापर्व मनाया जाएगा।

अभी तक छठ पर्व को लेकर कोई सरकारी दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है। लेकिन अधिसंख्य व्रतियों ने स्वयं घरों पर ही अर्घ्य देने का निर्णय लिया है। हालांकि गत वर्ष चैत्र छठ तक धनबाद में कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया था। लेकिन इस साल आंकड़े हर दिन नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। इसलिए कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता है। इधर छठ महापर्व के नजदीक आने के बावजूद नगर निगम शहर में कहीं भी तालाबों में सफाई अभियान नहीं चला रहा है।

Input: Live Hindustan

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