दूसरा शाही स्नान आज; अब तक सात अखाड़े कर चुके स्नान

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कुंभ मेला का आज दूसरा प्रमुख शाही स्नान है। माघी अमावस्या (मौनी अमावस्या) पर मध्यरात्रि से डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ संगम के घाटों पर पहुंच रही है। अमरत्व स्नान के लिए संगम घाट पर सबसे पहले सुबह 6:15 बजे महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा ने स्नान किया। इसके बाद श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा, तपोनिधि श्री पंचायती आनंद, पंचदशनाम जूना अखाड़ा, अग्नि, आह्वान अखाड़े के संतों ने डुबकी लगाई। निर्वाणी अनि और दिगंबर अखाड़ा स्नान के लिए संगम घाट पहुंच चुका है। सभी अखाड़ों को अमरत्व स्नान के लिए 40 मिनट का समय दिया गया। 41 घाट तैयार किए गए हैं। यहां करीब तीन करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है।

मेला प्रशासन ने घाटों पर सुगम स्नान के प्रबंध किए हैं। जाल के साथ बैरीकेडिंग की गई है। पैरा मिलिट्री की 17 कंपनियां, आरएएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों की 37 कंपनियां तैनाती की गई हैं। एनडीआरएफ की 10 कंपनियां मुस्तैद हैं। होमगार्ड के 14 हजार जवानों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है। 111 घुड़सवार पुलिस घाटों से लेकर संगम तक निगरानी कर रहे हैं।

10 जोन में बांटा गया मेला क्षेत्र

मेले के 10 जोनों को आगजनी से बचाने के लिए 40 सब फायर स्टेशन चौबीस घंटे सक्रिय किए गए हैं। 440 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। 96 फायर वाॅच टावर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़े गए हैं।

मौनी अमावस्या का महत्व

माघ महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन कुंभ के पहले तीर्थांकर ऋषभ देव ने लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। सनातन धर्म में हर अमावस्या का खास महत्व है। इस बार सोमवती और मौनी अमावस्या पर महोदय योग बन रहा है। दुर्लभ योग में गंगा स्नान, दान पुण्य करने से राहु, केतु और शनि से संबंधित कष्टों से मुक्ति मिलेगी। श्रवण नक्षत्र, वियातिपाद योग और सर्वार्थ सिद्धि योग की भी निष्पत्ति हो रही है। कुंभ होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। महोदय योग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के तट पर स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से साधक को कई गुना अधिक पुण्य फल मिलता है।

Input-Bhaskar

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