नहीं होता है विश्वास हिमालय पर उग रही है घास, बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा
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नहीं होता है विश्वास हिमालय पर उग रही है घास, बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

Santosh Chaudhary

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Global Heating Intensifies: दुनिया में सबसे ठंडे स्थानों में से एक हिमालय के शिखर धीरे-धीरे गर्म हो रहे हैं। सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के आसपास भी इसका काफी असर हुआ है। एवरेस्ट के आसपास और कभी पूरी तरह से बर्फ से ढके रहने वाले हिमालय के बर्फीले इलाकों में घास और झाड़ियां पनप रही हैं। ब्रिटेन की एक्सटर विश्वविद्यालय के अध्ययन में यह बात सामने आई है।

पनप रहीं है वनस्पतियां

ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में सामने आया है कि हिमालय में कुछ इलाके ऐसे हैं जहां पर किसी भी प्रकार की वनस्पति पैदा नहीं होती थी और साल में कोई ऐसा वक्त नहीं होता था जब यहां पर बर्फ न हो। हालांकि यह अध्ययन बताता है कि इन स्थानों पर पानी की ज्यादा आवक से वनस्पतियों के पनपने में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

पानी की पूर्ति भले ही कम हो लेकिन वनस्पतियों में बढोतरी के कारण यह हिमालय क्षेत्र में बाढ़ के खतरे को बढ़ा सकती है। यहां मौसमी बर्फ होती है और जब यह गर्म होती है तो इनके पिघलने की दर बढ़ जाती है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही यहां से एशिया की बड़ी नदियों में से 10 नदियां निकलती हैं, जो कि एक अरब 40 करोड़ लोगों की प्यास बुझाती है।

दुर्गम इलाकों में पनप रही घास

इस अध्ययन में सैटेलाइट से प्राप्त डाटा का उपयोग कर घास और छोटी झाड़ियों के पनपने का पता लगाया है। इसके मुताबिक ऊंचाई को चार वर्गों में बांटकर के निष्कर्ष निकाले गए हैं। इसके मुताबिक सबसे ज्यादा 16 हजार से 18 हजार फीट के बीच वनस्पतियां सबसे ज्यादा बढ़ी हैं। वहीं अन्य तीन वर्गों में भी बढोतरी दर्ज की गई है।

दोगुनी तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर

हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार इस सदी में दोगुनी हो चुकी है। पिछले चार दशकों में करीब एक चौथाई से ज्यादा बर्फ पिघल चुकी है। शोधकर्ता केरेन एंडरसन के मुताबिक, यहां का पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन की चपेट में है। बर्फ के पिघलने पर बहुत सारे शोध किए गए हैं, जिसमें एक अध्ययन में बताया है कि 2000 और 2016 के बीच बर्फ के नुकसान की दर दोगुनी हो गई है।

नजर रखी जानी चाहिए

एंडरसन का कहना है कि घास और छोटे पौधेहिमालय के बड़े हिस्से को घेर रहे हैं। मुख्य पहाड़ों पर से बर्फ गायब हो रही है। यह काफी चिंताजनक है, जिस पर नजर रखी जानी चाहिए। हालांकि यह बहुत बड़ा इलाका है।

यहां नहीं उगते पौधे

माना जाता है कि नए पौधों के लिए 20 हजार फीट की ऊंचाई पर उगना संभव नहीं होता है। इसका कारण है कि इस ऊंचाई पर बर्फ के कारण पौधे उग नहीं पाते हैं। गर्म होते इलाकों में से एक यह इलाका दुनिया का सबसे तेजी से गर्म हो रहे इलाकों में से एक हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से दुनिया जूझ रही है। हालांकि इन सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात ग्लेशियरों का पिघलना है।

आर्कटिक में भी बढ़ी वनस्पति

आर्कटिक में वनस्पति बढ़ने पर हुए अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि वनस्पति बढ़ने से आसपास के परिदृश्य में गर्म प्रभाव पाया गया। पौधे अधिक प्रकाश को अवशोषित कर लेते हैं और मिट्टी को गर्म करते हैं।

नासा के चित्रों से मिली मदद

नासा के उपग्रहों द्वारा प्राप्त जानकारी काफी उपयोगी रही है। नासा उपग्रहों द्वारा 1993 से 2018 के बीच खींचे चित्रों के अध्ययन के बाद एक्सटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट से 18 हजार फीट तक वाले इलाकों में वनस्पति के प्रसार को मापा है।

Input : Dainik Jagran

 

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एक्टिंग छोड़ रवीना टंडन अब करने जा रही हैं ये काम, कहा- दोनों काम साथ नहीं कर सकती

Md Sameer Hussain

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मुंबई. लगातार तीन दशक से बॉलीवुड में काम कर रही अभिनेत्री रवीना टंडन (Raveena Tondan) आखिरी बार पर्दे पर फिल्म “शब” में नज़र आई थीं तो वही छोटे पर्दे पर रवीना छोटे पर्दे के मशहूर रियलिटी शो “नच बलिए” में बतौर जज नज़र आई थीं. हलांकि अब फिल्मों के बजाए अब वो अपनी क्रिएटिविटी एक्सप्लोर कर रही हैं. हाल ही में रवीना ने ‘मल्टीपल पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर’ पर एक वेब सीरीज लिखी है. इस वेब सीरीज को रवीना खुद प्रोड्यूस कर रही हैं. रवीना की यह वेब सीरीज उनके अपने बैनर एए फिल्म्स के बैनर तले बनेगी.

रवीना टंडन ने न्यूज 18 हिंदी से इस पर बात करते हुए बताया, “जिस कहानी पर मैंने कड़ी मेहनत की है, उसे दुनिया के सामने लाने को लेकर मैं काफी एक्साइटेड हूं. यह एक एंटेरटेनिंग कहानी है, जिसे मैंने खुद लिखा है, यह दर्शकों को उनकी सीट से चिपकाए रखेगा. कॉन्सेप्ट की बात करें तो यह वेब सीरीज बहुत अलग है, इसलिए मुझे आशा है कि लोगों को यह पसंद आएगी.”

स्‍प्‍लिट पर्सनालिटी पर आधारित शो के सवाल पर रवीना ने कहा, “स्प्लिट पर्सनालिटी डिसॉर्डर एक ऐसी चीज रही है जिसके बारे में जानने की उत्सुकता मेरे अंदर हमेशा से रही है. ये बहुत ही दिलचस्प होता है. हां, मैंने कई इंटरनेशनल फिल्में देखी हैं और कई किताबें पढ़ी हैं लेकिन अभी तक कुछ भी एक्सप्लोर नहीं किया गया है. आज की जेनेरेशन भारत में बायपोलर क्या है ये समझने लगी है लेकिन कोई इसकी गहराई में नहीं उतरा है. इसे डिसएसोसिएटेड डिसॉर्डर कहते हैं जिसके बारे में ज्यादा कुछ एक्सप्लोर नहीं किया गया है. इसमें बहुत सा सस्पेंस होता है और ये बहुत ही इंट्रेस्टिंग है.”

हलांकि इस बातचीत में रवीना ने साफ़ किया कि वह इन प्रोजेक्ट्स में पर्दे के पीछे काम करेंगी. इस सीरीज में रवीना एक्टिंग नहीं बल्कि राइटिंग करेंगी और प्रोड्यूसर बनकर शो की कमान संभालेंगी.

रवीना का कहना है कि वेब सीरीज के प्रोडक्शन में बहुत समय लग जाता है. ऐसे में वह खुद को भटकाना नहीं चाहती. इसीलिए वह खुद को पर्दे के रोल से दूर रख पर्दे के पीछे के काम मैनेज करने पर जोर दे रही हैं. बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अपने प्रोजेक्ट के नाम का खुलासा करते हुए रवीना टंडन ने बताया, “इस प्रोजेक्ट का नाम है सीकिंग जन्नत और इस किरदार को निभाने के लिए हमें ऐसा एक्टर चाहिए था जो स्ट्रांग हो और अपने भूमिका को अच्छी तरह से निभा सके. क्योंकि इस मुश्किल किरदार को निभाने के लिए एक एक्टर के अंदर गहराई होनी चाहिए”.

Input : News18

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आजादी मिलने के बाद हिमालय क्यों जाना चाहते थे सुभाष चंद्र बोस

Md Sameer Hussain

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आजादी के बाद देश में अक्सर ये माना जाता था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन विमान हादसे में नहीं हुआ है. वो जल्द अज्ञातवास से वापस स्वदेश लौटेंगे और तब देश में आमूलचूल बदलाव आएगा. ये तो चर्चाओं की बात थी लेकिन नेताजी आजादी की लड़ाई के दौरान आजाद हिंद फौज के सहयोगियों से एक खास इच्छा जाहिर करते थे, जिसके लिए वो आजादी के बाद हिमालय जाना चाहते थे.

उनके एक खास सहयोगी एसए अय्यर ने इस बारे में कई बार लिखा भी. इसमें ये बताया गया है कि सुभाष उनसे अक्सर आजादी के बाद एक खास काम करने की इच्छा जाहिर करते थे. वो कहते थे कि खून से सनी दिल्ली जाने वाली सड़क पर वो अपनी क्रांतिकारी सेना का संचालन करेंगे लेकिन जैसे ही उन्हें अपने इस उद्देश्य में सफलता मिल जाएगी, तब वो अपने जीवन के असली ध्येय की ओर मुड जाएंगे.

सुभाष बोस पर लिखी पत्रकार संजय श्रीवास्तव की किताब “सुभाष की अज्ञात यात्रा” में इस बारे में चर्चा की गई है. ये भी बताया गया है कि सुभाष क्यों अक्सर ये बात कहते थे. सुभाष कहते थे,” देश को आजादी मिलते ही वो हिमालय चले जाएंगे, जहां वो ध्यान-भजन करेंगे. यही उनके जीवन का असली ध्येय है.”
दरअसल आध्यात्म सुभाष के जीवन का एक अनिवार्य और गहन तत्व था, जिसने उनके अंदर किशोरवय से ही पैठ जमा ली थी. जब वो किशोर हो रहे थे, तब उनका रुझान आध्यात्म की ओर होने लगा. तब वो बाबा और साधुओं की तलाश में लग गए. इससे उनके व्यक्तित्व में अजीब सा बदलाव आने लगा. उनके घरवालों ने भी इसे महसूस किया.

क्यों एकांत जगह की तलाश करते थे
साधु और महात्माओं की संगत को तलाशने के चलते वो घर से कई कई घंटों के लिए बाहर रहते. आसपास के उन स्थानों में चले जाते, जहां प्रकृति की छटा होती और एकांत होता. ऐसी जगहों पर वो ध्यान साधना करने लगते. घर में रहने पर वो कोई अंधेरा कमरा तलाशते और वहां बैठकर खुद को ध्यान में डूबोने की कोशिश करते.किताब कहती है,” बाद में जब वो जर्मनी और जापान में लंबे समय के लिए रहे तब भी हर हाल में रोज रात में ध्यान साधना जरूर करते थे. वो रोज रात भगवद्गीता पढ़ते थे, इससे उन्हें शांति और शक्ति मिलती थी. हालांकि उनका ज्यादा समय लोगों के बीच बीतता था लेकिन रात में ज्यों एकांत मिलता, वो ध्यान साधना में लीन हो जाते.”

रात का समय उनके आध्यात्मक का समय होता था
जनता के बीच वो मंच पर लंबा भाषण देते थे लेकिन मंच से अलग होते ही एकांत चाहते थे. तब वो कम ही लोगों से बातचीत करते थे. भोजन के बाद वो आमतौर पर विश्राम करते लेकिन अगर उनके पास कोई बुलाया हुआ व्यक्ति आ जाता था तो पूरे घंटे में शायद कुछ ही शब्द बोलते थे. वो उस समय शांति ज्यादा चाहते थे. वो उनका आध्यात्मिक समय होता था.

घंटों ध्यान साधना करते थे
रात में उनका ध्यान लंबा होता था. वो देर रात दो-तीन बजे तक सोते थे लेकिन सबेरे उठने पर चेहरे ताजगी और आभा से भरपूर होता था. सिंगापुर में रहने के दौरान सोने के पहले रामकृष्ण परमहंस आश्रम चले जाते थे. वहां जाकर ध्यान करते थे. उनके रोज के काम और आध्यात्मिक साधना साथ-साथ चलती रहती थी. बर्लिन में जब दूसरे विश्व युद्ध के दिनों में बमबारी की आबाज आती थी, तब वो अपने घर में देर रात तक ध्यान करते रहते थे.

मानते थे तंत्र साधना की ताकत
उनकी जीवन की आदतें आमतौर पर सादगी लिये हुए थीं. वो खुद उसी राशन का भोजन करते थे, जो उनके सैनिक करते थे. वो मां काली के भक्त थे. ये भी कहा जाता है कि वो तंत्र साधना की शक्ति मानते थे. जब वो गांधीजी के विरोध के बाद 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए तो कुछ समय बाद रहस्यमय तरीके से बीमार हो गए. तब उनका मानना था कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ तंत्र साधना की थी.

1933 में जब वो एसएस गंगे जहाजे से यूरोप जा रहे थे तो अपने दोस्त दिलीप कुमार रॉय को लिखा, मैं शिव के प्रति ज्यादा भक्तिभाव में रहता हूं. कुछ सालों से मंत्रों की शक्ति को मानने लगा हूं. वाकई मंत्रों में बहुत ताकत होती है. पहले मैं मंत्रों को लेकर सामान्य भाव रखता था. बाद में मैने तंत्र फिलास्फी पढ़ी. कुछ मंत्र तो शक्ति देने के मामले में वाकई अदभुत होते हैं.

Input : News18

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जीएसटी के दायरे में आ सकते हैं प्लंबर और इलेक्ट्रिशन भी

Santosh Chaudhary

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सरकार ऐसे प्लंबर, इलेक्ट्रिशन और ब्यूटीशियन जैसे कामगारों को भी जल्द गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) नेटवर्क के दायरे में लाने पर विचार कर रही है, जो ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स पर लिस्टेड हैं। इसे गिग इकॉनमी वर्कर्स (स्वतंत्र रूप से काम करने वाले कामगार) को फॉर्मल वर्कफोर्स में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ऐंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) UrbanClap, HouseJoy और Bro4u जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए यह अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है कि वे ऐसे सर्विस प्रफेशनल्स को ही जोड़ सकते हैं जिनके पास जीएसटी नंबर है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने ET को यह जानकारी दी।

अधिकतर को नहीं देना होगा जीएसटी

हालांकि, ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स से जुड़े अधिकतर प्लंबर्स, इलेक्ट्रिशन, फिटनेस ट्रेनर्स की सालाना आमदनी 40 लाख रुपये से कम है और इसलिए उन्हें जीएसटी नहीं चुकाना होगा। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम ऐसे प्रफेशनल्स का डेटाबेस तैयार करने के मकसद से भी उठाया है।


‘अभी सरकार के पास इनका डेटा नहीं’

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, ‘ये प्रफेशनल्स लोगों के घर जाते हैं और उनकी पहचान का हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। हो सकता है कि उन्हें जीएसटी नहीं देना पड़ा और तिमाही फाइलिंग की भी जरूरत ना हो, लेकिन यदि वे नेटवर्क पर रजिस्टर्ड हैं तो हम किसी अप्रिय घटना की स्थिति में खोजकर निकाल सकते हैं।’


कपंनियां रखेंगी पूरा हिसाब

अधिकारी ने यह भी बताया कि इन प्रफेशनल्स को जोड़ने वाली कंपनियों से कहा जाएगा कि वे उनके द्वारा किए गए सभी कामों का हिसाब रखें। UrbanClap ने इस मुद्दे पर अभी कॉमेंट करने से इनकार किया है, क्योंकि सरकार की ओर से आधिकारिक रूप में कुछ नहीं गया गया है। Housejoy और Bro4u के अधिकारियों ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है।


‘अभी भी है वॉलेंटरी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘हम कई मुद्दों की पड़ताल कर रहे हैं, जैसे उपभोक्ता की सुरक्षा और इन वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा। उन्होंने कहा, ‘आज भी वॉलेंटरी जीएसटी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। इसलिए हम उन्हें कोई बड़ी चीज नहीं करने को कह रहे हैं।’

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