न्याय के देवता हैं शनिदेव, इन 5 उपायों से पा सकते हैं उनकी कृपा
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न्याय के देवता हैं शनिदेव, इन 5 उपायों से पा सकते हैं उनकी कृपा

Santosh Chaudhary

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शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है।  वहीं, उनकी छवि अत्यंत क्रोधित रहने वाले देवता के रूप में भी मानी गई है।  लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि शनिदेव को अन्याय करने वाले लोगों पर ही क्रोध आता है।  वहीं, पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्मों के कर्म हमें अगले जन्म में भुगतने पड़ते हैं, जिसकी वजह से शनिदेव किसी व्यक्ति के जीवन पर हावी होते हैं यानी उनकी कुंडली में शनि की छाया होती है।  अगर आपके जीवन में भी शनिदेव की तिरछी दृष्टि है, तो आप कुछ उपाय करके उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं।

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पीपल के पेड़ के पास जलाएं दीया
यदि सूर्यास्त के समय पीपल के पेड़ के पास दिया जलाया जाये, तो शनिदेव की कृपा दृष्टि पड़ने लगती है।  कोशिश करें, कि पेड़ किसी मंदिर में लगा हो।  अगर ऐसा पीपल के पेड़ में सूर्य अस्त होते समय दीया जलाया जाए, शनि की महादशा समाप्त होने लगती है।

शनिवार को करें तेल दान
शनिवार के दिन सुबह उठकर होकर स्नान करें, उसके बाद एक कटोरी तेल से भरे और उस तेल में अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को शनिवार को ही किसी गरीब या जिसे जरूरत हो उसे दान कर दें।  वैसे भी शनिवार को तेल का दान करना शनिदेव को प्रसन्न करने का उपाय बताया गया है।

 

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इस मंत्र का करें जाप
अगर आप फूल नहीं चढ़ा सकते और सुबह तेल दान नहीं कर सकते, तो आप रुद्राक्ष की माला लेकर एक सौ आठ बार ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जप करें, शनिदेव की कृपा बनेगी और महादशा दूर होगी।

हनुमान जी की करें पूजा
शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो आपकी पूजा करेगा मेरी भी कृपा उस पर पड़ेगी, इसलिए हनुमान जी की पूजा करने को भी कहा जाता है।  लेकिन बहुत कम लोग जानते है की बंदरों को गुड चना खिलाने से भी हनुमान जी प्रसन्न होते हैं, क्योंकि उनकी पूजा बानर रूप में ही की जाती है।

शनि को इस रंग का फूल चढ़ाएं 
अगर आप किसी शनि मंदिर में जाते हैं और अगर उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाते हैं, तो ध्यान रखें कि नीले रंग के फूल चढ़ाएं।  उन्हें ये प्रिय है।  शनिवार को दान पुण्य करने से भी शनि की कृपा बनती है।  इसके अलावा मन साफ रखें, गलत विचार मन में ना लाएं और किसी पर अत्याचार ना करें।  दूसरों की मदद करें शनिदेव न्याय के देवता हैं, ऐसे में वो अपने भक्तों के साथ हमेशा अच्छा ही करते हैं।

Input : Hindustan

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गौतम बुद्ध ने शिष्यों के सामने एक रस्सी में तीन गांठ लगा दीं और पूछा कि इन गांठों को कैसे खोल सकते हैं?

Md Sameer Hussain

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गौतम बुद्ध से जुड़ी कथाओं में हमें जीवन के सभी दुखों को दूर करने के सूत्र मिलते हैं। अगर इन सूत्रों को जीवन में उतार लिया जाए तो हम सुखी हो सकते हैं। यहां जानिए एक ऐसी कथा, जिसमें बताया गया है कि हम समस्याओं को कैसे दूर कर सकते हैं…

  • प्रचलित कथा के अनुसार एक दिन बुद्ध के सभी शिष्य प्रवचन सुनने के लिए बैठे हुए थे। कुछ समय बाद गौतम बुद्ध वहां आए, उनके हाथ में एक रस्सी भी थी। रस्सी देखकर शिष्यों को हैरानी हुई। अपने आसन पर बैठकर बुद्ध ने रस्सी में तीन गांठ लगा दी। इसके बाद उन्होंने शिष्यों से पूछा कि क्या ये वही रस्सी है जो गांठ बांधने से पहले थी?

  • इस प्रश्न के जवाब में एक शिष्य ने कहा कि इसका उत्तर थोड़ा मुश्किल है। ये हमारे देखने के तरीके पर निर्भर करता है। ये रस्सी वही है, इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं है। दूसरे शिष्य ने कहा कि अब इसमें तीन गांठें लगी हुई हैं, जो कि पहले रस्सी में नहीं थीं। इस वजह से रस्सी को बदला हुआ कहा जा सकता है। कुछ शिष्यों ने कहा कि मूलरूप से रस्सी वही है, लेकिन गांठों की वजह से बदल गई है।
  • बुद्ध ने सभी शिष्यों की बातें ध्यान से सुनी। इसके बाद कहा कि आप सभी सही हैं। अब मैं इन गांठों को खोल देता हूं। ये बोलकर बुद्ध रस्सी के दोनों सिरों को खिंचने लगे। बुद्ध ने पूछा कि क्या इस तरह रस्सी की गांठें खुल सकती हैं?

  • शिष्यों ने कहा कि ऐसा करने से तो गांठें और ज्यादा कस जाएंगी, ये नहीं खुलेंगी। इन्हें खोलना और मुश्किल हो जाएगा।
  • बुद्ध ने कहा कि ठीक कहा। अब बताओ इन गांठों को खोलने के लिए हमें क्या करना होगा? शिष्यों ने जवाब दिया कि हमें इन गांठों को ध्यान से देखना होगा, जिससे हम जान सकें कि इन्हें कैसे लगाया गया है। इसके बाद हम ये गांठें आसानी से खोल सकते हैं।

  • बुद्ध इस जवाब से संतुष्ट हो गए और उन्होंने कहा कि ये बात एकदम सही है। हम जब भी परेशानियों में फंसते है, तब हम बिना कारण जाने ही उनका हल खोजने लगते हैं। जबकि हमें पहले समस्याओं के मूल कारण को समझना चाहिए। जब समस्याओं की वजह समझ आ जाएगी तो हम उन्हें बहुत ही आसानी से सुलझा सकते हैं। इसीलिए पहले समस्याओं के मूल को समझें और उसके बाद ही उसे हल करने के लिए आगे बढ़ें।

Input : Dainik Bhaskar

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साईं बाबा के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं शिरडी तो पहले यहां पढ़ लें पूरी जानकारी

Santosh Chaudhary

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महाराष्ट्र के शिरडी में स्थित साई बाबा के मंदिर में दर्शन के लिए हर साल लाखों लोग आते हैं. कहते हैं कि साईं अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. अगर आप पहली बार शिरडी जाने का प्लान कर रहे हैं तो मन में कई उहापोह हो सकती हैं. जैसे कि कैसे जाएं, कहां जाएं, कहां रहें और किस मौसम में शिरडी जाना सबसे ठीक रहेगा. आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से…

 

मुंबई और औरंगाबाद के पास है शिरडी

शिरडी मुंबई से लगभग 250 किलोमीटर और औरंगाबाद से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. शिरडी जाने के लिए आप ट्रेन, बस या फिर अपने वाहन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां अपने वाहन के लिए रोड रूट काफी बेहतर हैं और लगभग सभी डिस्ट्रिक्ट से जुड़े हुए हैं.

शिरडी में रहें यहां

शिरडी में ठहरने के लिए आपको बजट के हिसाब से होटल मिल जाएंगे. अगर आप 1000 रुपये खर्च करते हैं तो आपको यहां ठीक-ठाक होटल मिल जाएगा. लेकिन अगर आप होटल बुक नहीं करना चाहते हैं तो आप श्री साई बाबा ट्रस्ट द्वारा बनाए गए आवास में भी रुक सकते हैं. यह आवास आपको बेहद कम कीमत में मिल जाएंगे. इस सिलसिले में सारी जानकारी आप साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट की वेबसाइट पर जाकर ले सकते हैं और चाहें तो यहीं से ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं.

इस मौसम में जाएं शिरडीशिरडी जाने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा रहता है. दरअसल इस दौरान शिरडी में ज्यादा भीड़भाड़ नहीं होती है जिससे कि होटल कम कीमत पर मिल जाते हैं, दर्शन आसानी से हो जाते हैं और ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है. यहां किसी त्योहार या अवकाश वाले दिन न जाएं क्योंकि इस दिन यहां काफी भीड़ होती है.

Input : News18

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कालभैरव अष्टमी अाज, नारद पुराण के अनुसार काल भैरव पूजा से दूर होती हैं तकलीफ

Md Sameer Hussain

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हर महीने कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इसके अनुसार, माघ माह में कृष्ण पक्ष की कालाष्टमी 17 जनवरी, शुक्रवार को यानी आज है। कृष्णपक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी या भैरवाष्टमी के रूप मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान भैरव की पूजा और व्रत करते हैं। इस व्रत में भगवान काल भैरव की उपासना की जाती है।

 

  • कालअष्टमी के दिन भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करने से घर में फैली हुई हर तरह की नकारात्मक ताकतें दूर हो जाती है। भगवान शिव ने बुरी शक्तियों को मार भागने के लिए रौद्र रुप धारण किया था। कालभैरव इन्हीं का स्वरुप है।

नारद पुराण में बताया है महत्व

नारद पुराण में बताया गया है कि कालभैरव की पूजा करने से मनुष्‍य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मनुष्‍य किसी रोग से लम्बे समय से पीड़‍ि‍त है तो वह रोग, तकलीफ और दुख भी दूर होती हैं।

काल भैरव की पूजा विधि

 

  • इस दिन भगवान शिव के स्‍वरूप काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ हो जाएं। संभव हो तो गंगा जल से शुद्धि करें।
  • व्रत का संकल्‍प लें। पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें। ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः का जाप करें। इसके उपरान्त काल भैरव की आराधना करें। अर्धरात्रि में धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करें।  व्रत के सम्पूर्ण होने के बाद काले कुत्‍ते को मीठी रोटियां खिलाएं।

रोगों से दूर रहता है व्यक्ति

  1. कालाष्टमी के दिन व्रत रखकर भगवान भैरव की पूजा तो की जाती है। इसके साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की कथा और भजन करने से भी घर में सुख और समृद्धि आती हैं। साथ ही काल भैरव की कथा सुननी चाहिए।
  2. कालअष्टमी के दिन भैरव पूजन से प्रेत और बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं। मान्यता के अनुसार भगवान भैरव का वाहन काला कुत्ता माना जाता है। इस दिन काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलानी चाहिए।
  3. कालाष्टमी पर किसी पास के मंदिर जाकर कालभैरव को दीपक जरूर लगाना चाहिए।
  4. कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि -विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं। काल उससे दूर हो जाता है।
  5. इस व्रत को करने से व्यक्ति के रोग दूर होने लगते हैं और उसे हर काम में सफलता भी प्राप्त होती है।

Input : Dainik Bhaskar

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