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पिता ने ‘लूडो’ में की चीटिंग तो बेटी पहुंची फैमिली कोर्ट, जानें पूरा मामला

Ravi Pratap

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अजीब मामला सामने आया है. यहां की फैमिली कोर्ट में जब यह मामला आया तो सभी भौचक्के रह गये. यहां एक युवती ने अपने ही पिता पर लूडो खेल (Ludo) में चीटिंग का आरोप लगाया है. युवती ने कोर्ट में अपने पिता के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है. उसने कहा है कि वह अब मेरे पापा नहीं रहे. उन्होंने मुझे धोखा दिया है.इस 24 वर्षीय युवती के पिता पर आरोप लगाने के बाद फैमिली कोर्ट के काउंसलर अब उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं. युवती का कहना है कि वह अपने पापा के साथ लूडो खेल रही थी, तब उन्होंने बेईमानी की. वह अपने पिता पर इतना विश्वास करती है कि उनसे बेईमानी की उम्मीद नहीं की थी. चाहे वह लूडो का खेल ही क्यों न हो.

युवती ने कहा कि पिता के चरटिंग से उसे काफी दुख हुआ है और अब कोर्ट में पिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है. फैमिली कोर्ट के काउंसलर सरिता ने एएनआई को बताया कि वे युवती की लगातार काउंसलिंग कर रहे हैं. अब तक 4 राउंड की काउंसलिंग हो चुकी है.

काउंसलर ने बताया कि महिला ने कहा कि युवती ने अपने पिता के लिए सम्मान खो दिया क्योंकि उन्होंने उसे हराने के लिए चीटिंग की थी. उसे लगता है कि उसके पिता को उसकी खुशी के लिए खेल में हार जाना चाहिए था. 4 राउंड काउंसलिंग के बाद वह अब सकारात्मक महसूस कर रही है.

लूडो के खेल से कोर्ट तक पहुंचा यह मामला सोशल मीडिया पर आफी तेजी से वायरल हो रहा है. इस खबर पर लोग अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. भोपाल फैमिली कोर्ट के लिए भी यह अपनी तरह का एक अलग मामला है.

Input: Prabhat Khabar

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सबसे अमीर प्रत्याशी अनंत सिंह पर है 17 करोड़ की देनदारी, इन 5 प्रत्याशियों के पास 0 संपत्ति

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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के पहले चरण की तैयारियां जोरों पर हैं. अब मतदान (Voting in Bihar) में कुछ दिन शेष बचा है. ऐसे में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच (Bihar Election Watch) ने प्रत्याशियों से जुड़ा एक आंकड़ा जारी किया है. इस आंकड़े के लिए एडीआर ने कुल 1066 में से 1064 प्रत्याशियों के शपथ पत्र का विश्लेषण किया है.

आंकड़ों के मुताबिक, बिहार चुनाव (Bihar Election) में इस बार 375 उम्मीदवार (कुल 35 प्रतिशत) करोड़पति हैं, यानी हर तीसरे उम्मीदवार की संपत्ति करोड़ में है. वहीं, सभी प्रत्याशियों की औसत संपत्ति 1.99 करोड़ है. इसमें 9 प्रतिशत उम्मीदवारों की संपत्ति 5 करोड़ से ज्यादा, 12 प्रतिशत उम्मीदवारों की संपत्ति 2 से 5 करोड़, 28 प्रतिशत उम्मीदवारों की संपत्ति 50 लाख से 2 करोड़ के बीच है.

किस पार्टी में कितने करोड़पति

बिहार इलेक्शन वॉच और एडीआर के मुताबिक, सबसे ज्यादा करोड़पति उम्मीदवार राष्ट्रीय जनता दल के पास हैं. पहले चरण में राजद 41 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें 39 उम्मीदवार (95 प्रतिशत) करोड़पति हैं. इसके बाद जनता दल यूनाइटेड में सबसे ज्यादा प्रत्याशी करोड़ों के मालिक हैं. प्रथम चरण में जदयू के 35 में से 31 (89 प्रतिशत) प्रत्याशियों के पास करोड़ों की संपत्ति है. वहीं, भाजपा के 29 में 24 प्रत्याशी (83 प्रतिशत), लोजपा के 41 में 30 प्रत्याशी (73 प्रतिशत), कांग्रेस के 21 में से 14 प्रत्याशी (67 प्रतिशत) और बसपा के 26 में से 12 प्रत्याशी (46 प्रतिशत) करोड़पति हैं.

अनंत सिंह हैं सबसे ज्यादा अमीर

शपथ पत्र के मुताबिक, पटना जिला के मोकामा से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे बाहुबली अनंत सिंह के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है. उनकी चल संपत्ति 18 करोड़ 49 लाख तो अचल संपत्ति 50 करोड़ 7 लाख यानी कुल संपत्ति 68 करोड़ 56 लाख रुपए से ज्यादा है. हालांकि, उनके ऊपर 17 करोड़ 15 लाख की देनदारी भी है. वहीं, दूसरे नंबर पर बरबिघा (शेखपुरा) से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे गजानंद शाही के पास 61 करोड़ 23 लाख की संपत्ति है तो तीसरे नंबर पर अमीर प्रत्याशियों की लिस्ट में गया के अतरी सीट से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं मनोरमा देवी हैं, जिनकी कुल संपत्ति 50 करोड़ 62 लाख से ज्यादा है. पटना के मोकामा से अनंत सिंह जहां सबसे अमीर प्रत्याशी हैं, वहीं इसी सीट से एक ऐसा प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में है, जिसके पास संपत्ति के नाम पर शून्य (0) रुपए है.

5 ऐसे प्रत्याशी, जिनकी संपत्ति है 0 रुपए

बिहार विधानसभा के पहले चरण के चुनाव में सभी प्रत्याशियों की औसत संपत्ति भले ही 1.99 करोड़ रुपए हो, लेकिन 5 ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिनकी संपत्ति शून्य (0) है. मुंगेर के जमालपुर के निर्दलीय प्रत्याशी कपिलदेव मंडल, पटना के मोकामा से जागरुक जनता पार्टी के अशोक कुमार, कैमूर के चैनपुर से राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के प्रभु सिंह, औरंगाबाद के नबी नगर से शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के गोपाल निशाद और गया के बोधगया सीट से भारतीय इंसान पार्टी के महावीर मांझी के पास शून्य (0) की संपत्ति है. इन पांचों प्रत्याशियों के अलावा सबसे कम संपत्ति वाले उम्मीदवारों में गया के गया सदर से चुनाव लड़ रही लोग जन पार्टी की रिन्कु कुमारी (2700 रुपए की कुल संपत्ति), औरंगाबाद के कुटुम्बा से अखिल हिन्द फॉरवर्ड ब्लॉक के शैलेश राही (9 हजार रुपए की कुल संपत्ति) और रोहतास के करगहर से निर्दलीय उम्मीदवार लाल धारी सिंह (10 हजार रुपए की कुल संपत्ति) शामिल हैं.

Source : News18

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MUZAFFARPUR

दो बार IPS बनने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुई ये लड़की, फिर ऐसे बनीं IAS

Muzaffarpur Now

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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक मानी जाती है. इस परीक्षा को पास करने के लिए दिन रात एक करना पड़ता है, लेकिन हम आपको ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इस मुश्किल परीक्षा को पास कर 2 बार IPS और एक बार IAS बनी हैं.

इस लड़की का नाम निधि बंसल हैं, जो मध्य प्रदेश के कैलारस कस्बे, मुरैना की रहने वाली है. वर्तमान में वह अपने परिवार के साथ ग्वालियर में शिफ्ट हो गई हैं. निधि की शुरुआती पढ़ाई मुरैना में हुई.

NDTV से बात करते हुए निधि ने कहा, उन्होंने कंप्यूटर साइंस इन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री NIT त्रिचि से ली, जिसके बाद एक साल तक नौकरी की. प्राइवेट नौकरी के दौरान ही उन्होंने अपनी यूपीएससी की जर्नी की शुरुआत की. जहां निधि नौकरी करती थी वहां काम और सैलरी दोनों ही अच्छी थी, लेकिन वह संतुष्ट नहीं थी. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि IAS बनना है और यूपीएससी के लिए तैयारी करनी है.

दो बार IPS बनने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुई ये लड़की, फिर ऐसे बनीं IAS

बता दें, नीधि को यूपीएससी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसके बारे में उन्होंने अपने दोस्तों से पूछना शुरू किया. फिर उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी, जिसमें उन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट सोशियोलॉजी को चुना. पहले प्रयास में निधि इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाई, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की इस कठिन परीक्षा को पास कर दिखाया.

दूसरी बार यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें 219 रैंक हासिल हुई. इस रैंक के तहत उन्हें IPS सेवा त्रिपुरा अलॉट हुई. निधि बेहद खुश थी, लेकिन संतुष्ट नहीं थी. उन्हें एहसास हुआ उनका लक्ष्य IAS बनना था. जिसके बाद उन्हें तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा दी.

तीसरे प्रयास में उनकी 226वीं रैंक आई. जिसके बाद उन्हें इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अलॉट हुआ था. इस बार उन्हें झारखंड कैडर मिला था. दो बार IPS का पद मिलने का बाद भी निधि संतुष्ट नहीं थी. जिसके बाद निधि ने चौथी बार यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया. निधि अच्छी रैंक लाना चाहती थी, लेकिन रैंक उनके मनमुताबिक आई नहीं थी. जिसके बाद उन्होंने पिछले तीन साल की यूपीएससी तैयारी का अच्छे से आकलन किया.

उन्होंने महसूस किया, ऑप्शनल सब्जेक्ट में सोशियोलॉजी चुनने के बाद भी अच्छी रैंक नहीं आ रही है. वह इस सब्जेक्ट में अच्छी थी, लेकिन उनका फेवरेट सब्जेक्ट मैथेमेटिक्स था. उन्होंने महसूस किया उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट ही उन्हें पीछे खींच रहा है.ऐसे में इसे बदल लेना ही बेहतर है.

उन्होंने मैथेमेटिक्स को ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में चुना. इसके लिए उन्होंने सेल्फ स्टडी की. चौथे प्रयास में भी उनकी मनमुताबिक रैंक नहीं आई. लेकिन ऑप्शनल में उनके मार्क्स पहले के मुताबिक काफी अच्छे थे. इसके लिए वह पांचवे प्रयास के लिए मोटिवेट हो गई. पांचवें और अंतिम प्रयास में निधि को साल 2019 में 23वीं रैंक प्राप्त हुई और आखिरकार वह IAS बनने में सफल रही.

Source : NDTV

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तिरहुत क्षेत्र के शिक्षक निर्वाचन में बंपर वोटिंग, 79.77 प्रतिशत पड़े वोट; स्नातक निर्वाचन के प्रति उत्साह कम

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बिहार विधान परिषद के तिरहुत क्षेत्र शिक्षक निर्वाचन के लिए गुरुवार काे मतदाताओं ने काेराेना काे मात देते हुए बंपर मतदान किया। 79.77 प्रतिशत शिक्षक मतदाताओं ने वाेट डाले। दूसरी तरफ स्नातक क्षेत्र के चुनाव में उत्साह कम दिखा। सिर्फ 43.91 प्रतिशत वाेटिंग हुई। यह पिछले चुनाव से भी कम रहा। पिछले चुनाव में 46.33 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इसके साथ ही सभी 22 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई। कड़ी सुरक्षा व एहतियात के बीच हुए चुनाव में पुरुषाें के साथ महिला मतदाताओं ने भी भारी उत्साह से मतदान किया। कोरोना काल में हुए इस पहले बड़े चुनाव में कोरोना का थोड़ा असर ताे दिखा। लेकिन, शिक्षकाें ने उसे मात देते हुए यह दिखा दिया कि संक्रमण से बचाव जरूरी है, पर मतदान के अधिकार का प्रयोग भी उतना ही जरूरी।

धैर्य के साथ साेशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए अपनी बारी का इंतजार किया। बूथाें पर कोरोना संक्रमण से बचाव के भी पुख्ता इंतजाम थे। वाेट के पहले मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई और हाथों को सैनिटाइज कराया गया। मतदाता भी मास्क पहने पहुंच रहे थे। मतदान सुबह 8 बजे से शुरू हुआ।

पहले घंटे में रफ्तार काफी धीमी रही। हर बूथ पर 12 से 15 वोट गिरे। कलेक्ट्रेट कैंपस स्थित एसडीओ पूर्वी पश्चिमी, डीसीएलआर पूर्वी पश्चिमी में शिक्षक निर्वाचन के लिए 4 बूथ होने के बावजूद 10 बजे तक सन्नाटा रहा। पर, दिन चढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने लगी। पूजा कर मतदाता घर से निकले तो दोपहर बाद कई बूथाें पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं।

मतदान के लिए पूर्व वीसी को 60 किमी दूर साहेबगंज और प्राध्यापक काे पटना जाना पड़ा

मतदान के दौरान बूथाें काे लेकर कई मतदाताओं को भारी परेशानी हुई। उर्दू फ़ारसी विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी एवं विवि उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. तौकीर आलम को मतदान के लिए 60 किलाेमीटर दूर साहेबगंज जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनका विभाग विवि और घर सादपुरा में है। फिर भी पता नहीं कि कैसे साहेबगंज भेज दिया गया। आरडीएस कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विकास नारायण उपाध्याय ने बताया कि उन्हें एक दिन पहले मैसेज आया कि स्नातक में उनका बूथ पटना है।

कई बूथों पर हाथ जोड़े हुए प्रत्याशी ले रहे थे मतदाताओंं का हालचाल

मतदान के दिन भी मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश होती रही। कलेक्ट्रेट गेट से घुसते ही कई शिक्षक प्रत्याशी हाथ जोड़ कर मतदाताओं से उनका हालचाल पूछते दिखे। ये प्रत्याशी सुबह से ही वहां जमे रहे। मोबाइल से भी वोटरों को बुलाने एवं अन्य बूथों की भी जानकारी लेने का कार्य चलता रहा।

भीड़ अधिक न हाे, इसलिए बूथ भी अधिक थे: भीड़ अधिक नहीं हाे, इसलिए इस बार बूथ भी अधिक थे। पिछले चुनाव में स्नातक क्षेत्र के लिए मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली के कुल 90526 मतदाताओं के लिए 96 बूथ थे। इस बार 94775 वोटराें के लिए 127 और मुख्यालय में 59 बूथ थे। शिक्षक निर्वाचन के लिए 2014 में 8172 मतदाताओं के लिए 57 बूथ थे। इस बार 8684 मतदाताओं के लिए चारों जिलों में 58 और मुजफ्फरपुर में 19 बूथाें पर मतदान हुआ।

Source : Dainik Bhaskar

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